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इलाहाबाद

कुंभ में पापियों के पाप धोने और फिर पापी होने की परंपरा

हमारे नेता और अभिनेता, सारे के सारे अचानक जाग गए हैं। कुंभ जा रहे हैं। हर हर गा रहे हैं। इलाहाबाद में छा रहे हैं। गंगा में नहा रहे हैं। और पाप बहा रहे हैं। जी हां, पाप। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक कुंभ के पवित्र स्नान से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं। फिर यह कुंभ तो पूरे 144 साल बाद आया है और इतने ही सालों बाद वापस आएगा। यह भी कहते हैं कि  कुंभ में नहाने से सौ गंगा स्नान का पुण्य मिलता है। फिर कुंभ अगर 144 साल बाद वाला खास हो तो उसके तो कहने ही क्या। निश्चित रूप से उसमें तो हर किस्म के पाप धुल ही जाते होंगे।

हमारे नेता और अभिनेता, सारे के सारे अचानक जाग गए हैं। कुंभ जा रहे हैं। हर हर गा रहे हैं। इलाहाबाद में छा रहे हैं। गंगा में नहा रहे हैं। और पाप बहा रहे हैं। जी हां, पाप। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक कुंभ के पवित्र स्नान से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं। फिर यह कुंभ तो पूरे 144 साल बाद आया है और इतने ही सालों बाद वापस आएगा। यह भी कहते हैं कि  कुंभ में नहाने से सौ गंगा स्नान का पुण्य मिलता है। फिर कुंभ अगर 144 साल बाद वाला खास हो तो उसके तो कहने ही क्या। निश्चित रूप से उसमें तो हर किस्म के पाप धुल ही जाते होंगे।

नेता इसीलिए जा रहे हैं। अभिनेता भी इलाहाबाद इसीलिए आकर नहा रहे हैं। अभिनेता और नेता यह कभी नहीं कहेंगे कि वे कुंभ में नहाकर अपने पाप धो रहे हैं। लेकिन अपना मानना है कि वहां नहाने का नया पाप करने अवश्य पहुंचे हैं। नया पाप… जी हां नया पाप। नया इसलिए कि उनके नहाते ही पुराने पापों का मुलम्मा तो भले ही उतर जाएगा। लेकिन गंगा स्नान का जितना जोरदार प्रचार करके उसका राजनीतिक और व्यापारिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, उससे साफ लगता है कि मंशा उनकी पुण्य कमाने की तो कतई नहीं है। और यह एक नया पाप नहीं तो क्या है। वैसे भी राजनीति और फिल्मों की मायावी दुनिया का सारा का सारा नफा नुकसान कुल मिलाकर सिर्फ और सिर्फ एक सफलता पर ही निर्भर करता है। फिर सफलता चाहे किसी एक फिल्म को हिट करने की हो या राजनीति में अपनी एक गोटी को फिट करने की। मंशा कुल मिलाकर सिर्फ और सिर्फ व्यावहारिक है। इसलिए हमारे नेताओं और अभिनेताओं के कुंभ स्नान के पीछे कोई धार्मिक आस्था या पुण्य कमाने की परंपरागत लालसा तो कतई नहीं दिखती।

पिछले अध्यक्षीय काल में शत प्रतिशत असफल रहने का तगमा उतारने के लिए बीजेपी के दुबारा अध्यक्ष बनकर सफल होने को तरस रहे राजनाथ सिंह कुंभ में नहाए। राजस्थान में सीएम की कुर्सी पर दुबारा बैठने के ख्वाब को सजाकर मैदान में उतरी महारानी वसुंधरा राजे भी कुंभ में नहाईं। बीजेपी के मुख्तार अब्बास नकवी भी डुबकी लगा आए। कोयले की दलाली के कलंक की कालिख से सने श्रीप्रकाश जायसवाल सहित उसी कोयले के दागी सुबोधकांत सहाय भी कुंभ में डुबकी लगाने आए। सहाय तो न केवल नहाए, बल्कि यह भी कह आए कि कुछ अवसरवादी राजनेता भारत के इस पवित्रतम धार्मिक अवसर को भी राजनीति का अखाड़ा बनाए हुए है। सहाय इलाहाबाद में यह भी बोले कि वे अब धर्म के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। सहाय और भी बहुत कुछ बोले। लेकिन अब आप ही बताइए कि वे खुद कुंभ में क्या करने आए थे। बहुत सारे और नेता भी कुंभ में डुबकी लगा आए।

हमारी परंपरा में जिस सास को हमारे देश में मां की तरह पूजा जाता है, उस पवित्र रिश्ते को खलनायिका के अवतार में परोसनेवाली फिल्म निर्माता एकता कपूर भी कुंभ नहा आई। लगातार सत्ताइस किस करने के बावजूद एक सांस तक न लेनेवाले इमरान हाशमी तो खैर परदे के आगे और पीछे दोनों तरफ अनेकों पाप करते रहे हैं, सो मान लिया जाए कि उनको अपने पाप धोने की बहुत जरूरत थी। लेकिन राज कुंद्रा के बीस साल पुराने गृहस्थी के तंबू को उजाड़ते हुए उनकी पत्नी को खदेड़कर राज की दूसरी पत्नी बनने का पुण्य करनेवाली शिल्पा शेट्टी पता नहीं अपने कौनसे वाले जनम का पाप धोने कुंभ आई थी। वैसे अपन ने कोई ठेका नहीं ले रखा है, कि नेताओं और अभिनेताओं के पापों का हिसाब किताब रखें। लेकिन हर साल लाखों शिवलिंग बनाने वाले अभिनेता राजपाल यादव,  भगवान शंकर के परम उपासक अभिनेता आशुतोष राणा एवं मसखरे राजू श्रीवावस्त के बारे में अपन कतई नहीं जानते कि उनने क्या पाप किए, सो कुंभ नहाए। पाप अपन से भी हुए होंगे, पर कुंभ नहाने आज तक कभी नहीं गए। जाना भी नहीं चाहते। क्योंकि डर यह है कि शिल्पा शेट्टियों और इमरान हाशमियों के नहाए पानी में नहाने से कहीं उनके पाप अपने पर न चढ़ जाएं। 

निरंजन परिहार का विश्लेषण.

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