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नहीं रहा सदाबाहर फिल्‍मों का ‘गाइड’

बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता देवानंद का लंदन में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है. वो 88 वर्ष के थे. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार देवानंद का पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. वे अपने स्‍वास्‍थ्‍य चेकअप के लिए लंदन आए हुए थे. भारतीय समय के मुताबिक आधी रात के बाद 3.30 बजे उन्होंने लंदन के वॉशिंगटन में फेयर होटल में अंतिम सांसें लीं. उस समय उनके पुत्र सुनील साथ में थे. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्‍यक्ष सोनिया गांधी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी समेत बॉलीबुड की तमाम हस्तियों ने इस सदाबहार अभिनेता के निधन पर शोक जताते हुए अपनी श्रद्धांजलि दी.

बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता देवानंद का लंदन में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है. वो 88 वर्ष के थे. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार देवानंद का पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. वे अपने स्‍वास्‍थ्‍य चेकअप के लिए लंदन आए हुए थे. भारतीय समय के मुताबिक आधी रात के बाद 3.30 बजे उन्होंने लंदन के वॉशिंगटन में फेयर होटल में अंतिम सांसें लीं. उस समय उनके पुत्र सुनील साथ में थे. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्‍यक्ष सोनिया गांधी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी समेत बॉलीबुड की तमाम हस्तियों ने इस सदाबहार अभिनेता के निधन पर शोक जताते हुए अपनी श्रद्धांजलि दी.

देवानंद ने 1946 में फ़िल्मी दुनिया में क़दम रखा था और फ़िल्म थी हम एक हैं. इसके बाद उन्हें कई फ़िल्में मिलीं और एक वर्ष बाद जिद्दी के आने तक वो बड़े अभिनेता के रुप में स्थापित हो गए थे. देवानंद ने कई बेहतरीन फ़िल्में की और अपने अभिनय का लोहा मनवाया. इन फ़िल्मों में गाइड, पेइंग गेस्ट, बाज़ी, ज्वेल थीप, सीआईडी, जॉनी मेरा नाम, अमीर गरीब, हरे रामा हरे कृष्णा और देस परदेस का नाम लिया जा सकता है. आगे चलकर 1949 में देवानंद ने नवकेतन फ़िल्म प्रोडक्शन शुरु किया और कई फ़िल्मों का भी निर्माण किया. उन्होंने 35 से अधिक फ़िल्मों का निर्माण किया. फ़िल्मों में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2002 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया.

देवानंद के बारे में कहा जाता है कि वो कभी हार न मानने वाले लोगों में से थे और 88 वर्ष की उम्र में पूरे जोश के साथ नई फ़िल्म बनाने की तैयारी में लगे हुए थे. देवानंद को दो फ़िल्मफेयर पुरस्कार भी मिले. 1958 में फ़िल्म काला पानी के लिए और फिर 1966 में गाइड के लिए. गाइड ने फ़िल्मफेयर अवार्ड में पांच अवार्डों का रिकार्ड भी बनाया. इतना ही नहीं गाइड 1966 में भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए नामांकित भी हुई थी. आगे चलकर देवानंद ने नोबल पुरस्कार विजेता पर्ल बक के साथ मिलकर अंग्रेज़ी में भी गाइड का निर्माण किया था. 1993 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड दिया गया. देवानंद केवल अभिनेता ही नहीं थे. उन्होंने फ़िल्मों का निर्देशन किया, फ़िल्में प्रोड्यूस भी कीं.

देवानंद का जन्म अविभाजित पंजाब के गुरदासपुर (अब पाकिस्तान का नरोवल जिला) में 26 सितंबर, 1923 में हुआ था. देवानंद के माता-पिता ने उनका नाम धर्मदेव आनंद रखा था. उनके पिता किशोरीमल आनंद मशहूर वकील थे. देवानंद ने लाहौर कॉलेज से अंग्रेजी में बीए किया था. 1948 में देवानंद को पहली बड़ी कामयाबी मिली थी जब फिल्म जिद्दी बॉक्स ऑफिस पर हिट रही. गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में बॉलीवुड की कई नामी हस्तियों का निधन हुआ है. इनमें जगजीत सिंह, शम्मी कपूर और उस्ताद सुल्तान खां शामिल हैं. यह साल बॉलीबुड के लिए बढि़या नहीं रहा.

देवानंद के निधन पर बॉलीवुड के अभिनेताओं और कई लोगों ने प्रतिक्रियाएं दी हैं. अमिताभ बच्चन ने ट्विटर पर लिखा है कि देवानंद के जाने से एक ऐसा सूनापन आया है जो कभी नहीं भरा जा सकेगा. अनुपम खेर का कहना है कि देवानंद को श्रद्धांजलि स्वरुप क्यों न आज उनके ही गाने सुने जाए. शबाना आज़मी लिखती हैं कि देवानंद अपनी शर्तों पर जिए और उनके जीवन को सलाम. देवानंद के रिश्तेदार और जाने माने निर्देशक शेखर कपूर लिखते हैं कि सबको लगता था कि देवानंद हमेशा हमारे साथ रहेंगे. वो जीते जी मिथक हो गए थे. ट्विटर और फेसबुक पर कई लोगों ने देवानंद के जाने पर शोक जताया है और संवेदनाएं प्रकट की हैं. महेश भट्ट मुंबई में भोर हो रही है और मैं उस सितारे को सलाम करता हूं, जो हें अपनी मुस्‍कान के उजास के साथ छोड़ कर चला गया. माधुरी दीक्षित ने कहा देवानंद जी के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ. एक और आइकन ने स्‍टेज छोड़ दिया. हम उन्‍हें याद करेंगे. अभिषेक बच्‍चन ने कहा कि देव साहब के जाने की खबर पढ़कर झटका लगा. एक महान आदमी और महान एक्‍टर और सकारात्‍मकता के प्रतीक. लता मंगेशकर ने कहा कि देव साहब ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. न ही उन्‍हें किसी चीज पर पछतावा नहीं रहा. मधुर भंडारकर ने कहा कि अभी भी खबर पर विश्‍वास नहीं हो रहा है. वह ऊर्जा और जिंदगी के जश्‍न से लबरेज इंसान थे.  

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