श्रीनगर : केबल टीवी, एसएमएस, मोबाईल और इंटरनेट सेवाओं को ठप करने के बाद प्रशासन ने वादी में अगले आदेश तक स्थानीय अखबारों के प्रकाशन व वितरण पर भी तथाकथित रोक लगा दी है। अधिकारिक तौर पर आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन वादी में रविवार को प्रशासन ने किसी भी अखबार का वितरण नहीं होने दिया।
नागरिक या पुलिस प्रशासन ने स्थानीय अखबारों के प्रकाशन व वितरण पर रोक पर कुछ भी कहने से इंकार किया है। लेकिन दबे मुंह संबंधित अधिकारियों ने स्वीकार किया कि इसका आदेश ऊपर से ही आया है ताकि कश्मीर में हालात को बिगड़ने से बचाया जा सके। यह कदम एहतियातन उठाया गया है, क्योंकि हमने वर्ष 2010 में वादी में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान कई बार पाया कि लोगों को सड़क पर लाने में, अफवाहों को हवा देने में अखबारों की भी भूमिका रही है।
शनिवार रात को 11 बजे पुलिस ने अखबारों के प्रकाशन व उनके वितरण को रुकवाने का ऑपरेशन शुरू किया, जो रविवार तड़के तक जारी रहा। कश्मीर के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ग्रेटर कश्मीर के प्रिंटर पब्लिशर राशिद मखदूमी ने बताया कि हम अपने अखबार को अंतिम रूप दे रहे थे कि अचानक पुलिस आ गई। पुलिस अधिकारियों ने हमें कहा कि अखबार नहीं छपेगा, अगर छपेगा तो वह उसे वितरित नहीं होने देंगे। इसके बाद हमने अखबार को नहीं छापा, अलबत्ता हमारा ऑनलाइन एडिशन ही जारी हुआ है।
कश्मीर रीडर अखबार के संपादक शौकत मौटा ने कहा, हमारा अखबार छप चुका था, लेकिन पुलिस ने उसे लालचौक में हमारे एजेंट के पास से जब्त कर लिया। एक भी प्रति कहीं नहीं जा पाई है। पुलिस ने कार्यालय के लिए भी एक प्रति नहीं छोड़ी। हमें चार दिनों तक अखबार न छापने की हिदायत की गई है।
वादी के प्रमुख न्यूज पेपर वितरक जनता न्यूज एजेंसी के अनुसार, उन्हें रात को ही पुलिस ने सूचित किया था कि कोई अखबार नहीं बांटा जाए। इसलिए हमने अपने तौर पर भी सभी अखबार वालों को सूचित किया कि हम अखबार नहीं ले पाएंगे और न बंटवा सकेंगे। यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बाद मीडिया के साथ बातचीत में लोगों से संयम बनाए रखने और मीडिया से विशेषकर न्यूज चैनलों से आग्रह किया था कि वह किसी भी समाचार को महज सुनी सुनाई बात पर न प्रसारित करें, उसके प्रसारण से पूर्व सभी तथ्य जांच लें। (जागरण)