Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

8 फरवरी को बुक स्‍पीड पोस्‍ट 11 फरवरी को क्‍यों मिला?

नई दिल्ली: संसद पर हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु को फांसी दिए जाने की जानकारी उसके परिवार वालों को स्पीडपोस्ट के जरिये दिए जाने पर विवाद चल रहा है। इस बीच एनडीटीवी इंडिया ने स्पीडपोस्ट की वेबसाइट पर जाकर पड़ताल की तो पता चला कि यह स्पीडपोस्ट 7 और 8 फरवरी की मध्यरात्रि 12 बजकर 7 मिनट पर जीपीओ, नई दिल्ली में बुक कराया गया था। 8 फरवरी की सुबह 3 बजकर 19 मिनट पर इसे श्रीनगर के थैले में डाल दिया गया और 5 बजकर 51 मिनट पर इसे पालम के लिए भेज दिया गया।

नई दिल्ली: संसद पर हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु को फांसी दिए जाने की जानकारी उसके परिवार वालों को स्पीडपोस्ट के जरिये दिए जाने पर विवाद चल रहा है। इस बीच एनडीटीवी इंडिया ने स्पीडपोस्ट की वेबसाइट पर जाकर पड़ताल की तो पता चला कि यह स्पीडपोस्ट 7 और 8 फरवरी की मध्यरात्रि 12 बजकर 7 मिनट पर जीपीओ, नई दिल्ली में बुक कराया गया था। 8 फरवरी की सुबह 3 बजकर 19 मिनट पर इसे श्रीनगर के थैले में डाल दिया गया और 5 बजकर 51 मिनट पर इसे पालम के लिए भेज दिया गया।

यह बैग 7 बजकर 39 मिनट पर पालम पहुंचा, जहां से 10 बजकर 29 मिनट पर इसे श्रीनगर के लिए डिस्पैच कर दिया गया। भारतीय डाक की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह बैग 10 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 3 मिनट पर श्रीनगर में रिसीव किया गया और फिर इसे 4 बज कर 52 मिनट पर सोपोर के लिए रवाना किया गया। अंतत: यह स्पीडपोस्ट 11 फरवरी की सुबह 11 बजकर 2 मिनट पर अफजल के परिवार को मिला।

इस ब्योरे में ध्यान देने वाली बात यह है कि जब 8 फरवरी की सुबह साढ़े दस बजे ही इस स्पीडपोस्ट को श्रीनगर के लिए डिस्पैच कर दिया गया था, तो फिर यह उसी दिन श्रीनगर क्यों नहीं पहुंचा…? इतना ही नहीं, 9 फरवरी को यह स्पीडपोस्ट कहां-किस हाल में था, इसका कोई ब्योरा नहीं है। मतलब 8 तारीख की सुबह से 10 तारीख की दोपहर तक स्पीडपोस्ट कहीं दबा पड़ा था। 10 तारीख को रविवार होने के बावजूद जब इस स्पीडपोस्ट को उसके गंतव्य की तरफ आगे बढ़ाया गया था, तो यह काम 8 और 9 तारीख को भी किया जा सकता था।

9 तारीख को अफजल गुरु को फांसी दे देने के बाद से श्रीनगर में कर्फ्यू लगा दिया गया था, और अगर इस वजह से 9 तारीख को चिठ्ठी आगे नहीं बढ़ी तो फिर कर्फ्यू तो 10 तारीख को भी जारी रहा था। दिल्ली से चिट्ठी चलने और श्रीनगर में रिसीव होने में 48 घंटे से ज़्यादा का अंतर है। इतना ही नहीं, जेल प्रशासन के जिस लेटरहेड पर इस चिट्ठी को लिखा गया है, उस पर 6 फरवरी की तारीख लिखी गई है। अफजल को फांसी दिए जाने या न दिए जाने के विवाद से दूर स्पीडपोस्ट के इस मामले का संबंध परिवार वालों को समय पर सूचना नहीं मिलने से है। साथ ही इस तरफ ध्यान दिलाए जाने से भी कि आखिर 48 घंटे तक स्पीडपोस्ट कहां दबा रहा…?

लेखक उमाशंकर सिंह की यह रिपोर्ट एनडीटीवी न्यूज चैनल पर प्रसारित हो चुकी है. इस रिपोर्ट का प्रकाशन एनडीटीवी की वेबसाइट पर भी किया गया है. वहीं से साभार लेकर भड़ास पर प्रकाशित किया गया है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...