बेतुक में भी तुक हो जाता है. अब यही देखिए. गाने के साथ कार्टून और फोटो देने का क्या मतलब. वह भी तब जब कार्टून का फोटो से कोई लेना देना न हो और फोटो व कार्टून का गाने से कोई गुणा-गणित न हो. तीनों को एक जगह मिलाकर देने से बेतुकापन ही तो साबित होता है. लेकिन यह बेतुकापन कई बार जीवन के लिए जरूरी होता है क्योंकि जो कुछ सिस्टमेटिक दिखता है, उसमें रुटीन-सा और बासी-सी बदबू आती है, और बेतुकपने में कई बार स्पार्क, नयापन, सोंधी महक होती है. तो, लीजिए, इस बेतुकपने का आनंद उठाइए… – यशवंत

(देखें कार्टून)


Main to piya se naina laga aayi re… (Hazrat Amir Khusro)
Ustad Shujaat Hussain Khan की आवाज़…






