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वासिंद्र मिश्र हमेशा मंत्रियों की चापलूसी करते रहे हैं

यशवंत जी, कुमार अंशु ने ठीक बात लिखी है. वैसे तो मेरा वासिंद मिश्र से ज्यादा पाला नहीं पड़ा मगर जब पड़ा तो मैंने एक झटके में दूरी बनाना ही उचित समझा. मैं जी न्यूज़ राष्ट्रीय चैनल में वर्ष 2006 से 2009 तक रहा और जैसे ही जी यूपी लंच हुआ मैं इस चैनल से विदा हो गया. मेरा चैनल से विदा होना भी वासिंद मिश्र के कारण ही रहा. जी यूपी के लांच होने के दूसरे दिन फर्रुखाबाद से मैंने एक खबर उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल के खिलाफ बनायीं और उसे चैनल पर चलने के लिए भेजी तो देर रात में मुझे फोन आ गया कि मैं अपना सामान सट्टा लेकर नोएडा तलब हो जाऊं.

यशवंत जी, कुमार अंशु ने ठीक बात लिखी है. वैसे तो मेरा वासिंद मिश्र से ज्यादा पाला नहीं पड़ा मगर जब पड़ा तो मैंने एक झटके में दूरी बनाना ही उचित समझा. मैं जी न्यूज़ राष्ट्रीय चैनल में वर्ष 2006 से 2009 तक रहा और जैसे ही जी यूपी लंच हुआ मैं इस चैनल से विदा हो गया. मेरा चैनल से विदा होना भी वासिंद मिश्र के कारण ही रहा. जी यूपी के लांच होने के दूसरे दिन फर्रुखाबाद से मैंने एक खबर उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल के खिलाफ बनायीं और उसे चैनल पर चलने के लिए भेजी तो देर रात में मुझे फोन आ गया कि मैं अपना सामान सट्टा लेकर नोएडा तलब हो जाऊं.

अगले दिन मैंने सुबह सुबह चैनल को मेल भेज अपनी सेवाएं समाप्त कर दी थी. अपने तीन साल के काम के दौरान जी के राष्ट्रीय संस्करण में चली मेरी लगभग 400 से ज्यादा खबरों में एक भी खबर पर न कभी कैची चली और न ही खबर को किसी के पक्ष में या किसी के विरोध में होने का प्रश्न उठा. आधे घंटे के लगभग 20-25 प्रोग्राम तक में मेरी स्क्रिप्ट पर कभी छेड़छाड़ नहीं हुई. मगर जी यूपी के चालू होने पहले दिन ही चैनल के हेड वासिंद मिश्र द्वारा प्रदेश के एक पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल, जो उस वक़्त फर्रुखाबाद से बहुजन समाज पार्टी की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ रहा था, द्वारा पैसे बांटने की खबर को सिर्फ इसलिए नहीं दिखाया गया क्यूंकि वसिंद्र मिश्र उत्तर प्रदेश में सरकार के मंत्रियों की चापलूसी करते रहे और वही आदत वो नोएडा तक ले गए.

भला हो विनय राय का जो उन दिनों लखनऊ में तैनात थे, जिनकी वजह से अच्छी खबरें लखनऊ की मिल जाती थी वर्ना …… एक बात और … मेरे जी न्यूज़ राष्ट्रीय चैनल के काम के दौरान मैंने कभी वासिंद मिश्र से सम्पर्क नहीं किया, मेरा सीधा वास्ता नोएडा डेस्क से रहता था इसीलिए मेरी खबरों पर कैची नहीं चलती थी. बाद में पता चला कि चापलूसी तो श्री मिश्र की जड़ है, किसी ने मुझे बताया की मुलायम सिंह यादव ने उन्हें एक मारुति कार नब्बे के दशक में दी थी. उस समय वे अमर उजाला में हुआ करते थे और इसी वजह से वे वहां से किनारे किये गए. अब लिक्खाड़ और खबरचियों को तो कोई कार क्या साइकिल तक देने से रहा. इसीलिए इससे पहले मेरे ऊपर वासिंद मिश्र हावी हो पाते ससम्मान मैं खुद विदा हो आया.

हालाँकि आज भी जी राष्ट्रीय चैनल में डेस्क के कई लोग मुझे बुलाते हैं, मगर मैंने जी न्यूज़ के साथ काम की इच्छा होते हुए भी ये बोल कर मना कर दिया – जब तक किसी इंचार्ज की पोस्ट पर वासिंद मिश्र रहेंगे मेरा काम करना मुश्किल है. हाँ वासिंद की मानसिकता का पता चलते ही मैंने उस खबर को उसी दिन, जिसमें उनके चहेते नेता नरेश अग्रवाल चुनाव में नोट बांट कर अचार संहिता का उलंघन कर रहे थे, अपने ईटीवी वाले साथी सहित कई चैनल के रिपोर्टर को देकर उनका भला कर दिया. अगले दिन जब जी नेशनल डेस्क से फोन आया उस खबर के लिए, उनका एक रिपोर्टर जो टीआरपी सेंटर फर्रुखाबाद में तैनात था, वासिंद मिश्र की भेट चढ़ चुका था.

पंकज दीक्षित

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