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इटली के हेलीकॉप्टर अबकी उतरेंगे सीधे हमारी संसद में

हमारे पीएम सरदार मनमोहन सिंह भी सदा की तरह अपने होठों पर ताला लगाए बैठे हैं। बोले तो क्या बोले। बहुत दिनों बाद विपक्ष के हाथ फिर एक बार बड़ा हथियार आया है। हेलीकॉप्टर सौदे में दलाली का मुद्दा सरकार की मुसीबत बन गया है। मामला इटली से जुड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सकते में तो हैं ही दुखी भी हैं। वैसे, जब से हेलीकॉप्टर सौदे में कमीशन की बात उछली है, नितिन गड़करी भी कोई कम दुखी नहीं है। उनका दुख यह है कि यह घोटाला महीने भर पहले सामने आ गया होता, तो उन पर लगे आरोप दब जाते और संघ उनको फिर से बीजेपी अध्यक्ष बनवाने में सफल हो जाता। लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता।

हमारे पीएम सरदार मनमोहन सिंह भी सदा की तरह अपने होठों पर ताला लगाए बैठे हैं। बोले तो क्या बोले। बहुत दिनों बाद विपक्ष के हाथ फिर एक बार बड़ा हथियार आया है। हेलीकॉप्टर सौदे में दलाली का मुद्दा सरकार की मुसीबत बन गया है। मामला इटली से जुड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सकते में तो हैं ही दुखी भी हैं। वैसे, जब से हेलीकॉप्टर सौदे में कमीशन की बात उछली है, नितिन गड़करी भी कोई कम दुखी नहीं है। उनका दुख यह है कि यह घोटाला महीने भर पहले सामने आ गया होता, तो उन पर लगे आरोप दब जाते और संघ उनको फिर से बीजेपी अध्यक्ष बनवाने में सफल हो जाता। लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता।

बहरहाल, हेलीकॉप्टर सौदे में दलाली मामले को बीजेपी दूसरा बोफोर्स घोटाला बता रही है। लेफ्ट भी लाल है। उसने सरकार को संसद में घेरने की चेतावनी दी है। बीजेपी सरकार से वैसे भी खार खाए बैठी है। अपना मानना है कि हेलिकॉप्टर खरीद घोटाले की जितनी गूंज अभी सुनाई दे रही है, उससे भी ज्यादा गड़गड़ाहट 21 फरवरी से शुरु हो रहे संसद के बजट सत्र में गूंजेगी। विपक्षी दलों ने रक्षा सौदे में दलाली के मुद्दे पर सरकार पर हमले की रणनीति ज़ाहिर कर दी है। सबसे ज्यादा आक्रामक बीजेपी है। दरअसल बीजेपी पिछले संसद सत्र से ही इस मुद्दे को उछाल रही है। बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर बता रहे थे कि उन्होंने संसद में 12 दिसंबर 2012 को सरकार से हेलीकॉप्टर सौदे में धांधली से जुड़ा सवाल पूछा था। जवाब मिला था कि सरकार को इस मामले में इटली में चल रही जांच की जानकारी है लेकिन किसी भी भारतीय एजेंसी से जांच की जरूरत नहीं है। इसके बाद 14 दिसंबर 2012 को प्रकाश जावड़ेकर ने रक्षा मंत्री एके एंटनी को बाकायदा चिट्ठी लिखी थी। जावड़ेकर ने अपनी उस चिट्ठी में बीजेपी की तरफ से सरकार से निश्चित वक्त में जांच की मांग भी की थी। और तथ्य के तौर पर कुछ दलालों की फोन की बातचीत और इटली की एक जांच में आए भारतीय नामों का जिक्र भी किया था। लेकिन सरकार ने इसे हवा में उड़ा दिया था।

पर, अब सरकार की बकरी डब्बे में आ रही है। सीधे सीधे सोनिया गांधी की तरफ उंगली करके तो नहीं पर मामले में जोर जोर से इटली – इटली चिल्लाकर निशाना उन्हीं पर है। बीजेपी का आरोप है कि तमाम जानकारी के बावजूद सरकार ने जानबूझकर कुछ नहीं किया। बीजेपी को राज्यसभा सांसद प्रकाश जावड़ेकर पहले भी कह रहे थे और अब तो कुछ ज्यादा ही चीख चीख कर कह रहे हैं कि हेलीकाप्टर सौदे में घोटाले की खबर शुरू से आ रही है। सारी दुनिया को जब पता चल गया था तो भारत की एजेंसियां क्यों नहीं जांच कर रही थी? वैसे अपना मानना है कि सरदारजी की सरकार ने नीति बना ली है कि मामले को जितना दबा सकते हो, दबाओ। इसीलिए बीजेपी ने जब जब संसद में ये मामला उठाने की कोशिश की, तो हर बार इसे दबा दिया गया। हालांकि कांग्रेस बैकफुट पर नहीं जाने का अभिनय कर रही है। पर जाना पड़ेगा। इटली की सरकार ने कार्रवाई की तो हमने भी मामला सीबीआई को सौंपकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया है। दिग्विजय सिंह पूछ रहे हैं कि अब और क्या कर सकते हैं? क्या एनडीए की सरकार होती तो बिना जांच के ही किसी को फांसी पर

निरंजन परिहार

चढ़ा देती? कांग्रेस कुछ भी कहे। लेकिन विपक्ष को हथियार मिल चुका है। इस बार भी संसद में सरकार को घेरने के साथ साथ विपक्ष कांग्रेस और श्रीमती सोनिया गांधी पर भी निशाना साधने से नहीं चूकेगा। मामला इटली से जुड़ा है और संसद इस बार भी जंग का मैदान बननेवाली है। लोकतंत्र में जंग हथियार सिर्फ जुबान में समाए होते है और मैदान अकसर सदन ही हुआ करते हैं। 

लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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