अखबार प्रबंधन ने मान लिया है कि देर सबेर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करना ही पड़ेगा इसलिए वे इसके तोड़ में जुट गए हैं. खबर है कि सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड के खिलाफ याचिका दायर करने वाले राजस्थान पत्रिका ने मजीठिया बोर्ड लागू होने के संभावित डर को देखते हुए कर्मचारियों के साथ छल करना शुरू कर दिया है. खबर है कि राजस्थान पत्रिका अब अखबार में काम करने वाले लोगों को अपना कर्मचारी बनाने की बजाय प्लेसमेंट का कर्मचारी बताने पर तुल गया है.
सूत्रों का कहना है कि अखबार अब यह प्रचारित कर रहा है कि उसके यहां काम करने वाले कर्मचारी उसके अखबार के नहीं बल्कि प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारी हैं. अखबार के तमाम नए पत्रकार तथा गैर पत्रकार कर्मचारियों को प्लेसमेंट एजेंसी पोर्टफोलियो का कर्मचारी साबित किया जा रहा है. खबर है कि जनवरी महीने में इन लोगों की सैलरी भी प्लेसमेंट कंपनी पोर्टफोलियो कंपनी की ओर से ही दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि राजस्थान पत्रिका प्रबंधन इस मामले के सहारे यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि उसके यहां काम करने वाले कर्मचारी प्लेसमेंट कंपनी से ठेके पर लिए गए हैं.
इस तरह की कार्रवाई करके अखबार प्रबंधन मजीठिया वेज बोर्ड देने की बाध्यता से बच सकता है. इसलिए ही वो अब अपने ज्यादातर कर्मचारियों को प्लेसमेंट एजेंसी के चेक ही थमा रहा है. गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर पिछले साल जमकर छंटनी की थी. इसके अलावा दैनिक जागरण समेत तमाम अखबारों ने अपने पुराने कर्मचारियों से इस्तीफा मांग लिया था, जिसने इस्तीफा नहीं दिया उसका तबादला दूर दराज क्षेत्रों में कर दिया था. इस तरह की स्थिति पैदा होने के बाद कई लोग खुद इस्तीफा देकर चले गए थे.





