सुब्रत राय उर्फ सुब्रोतो राय उर्फ सहाराश्री उर्फ सहारा श्री सुब्रत राय उर्फ सुब्रत राय सहारा. कई नाम हैं इस आदमी के. वह खुद को बड़ा दार्शनिक और विद्वान बताता है. खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त घोषित करता है. खुद को सबसे बड़ा खिलाड़ी बताता है. वह क्रिकेट से लेकर फार्मूला वन तक के आयोजनों को न सिर्फ स्पांसर करता है बल्कि इसके लिए बड़े बड़े स्टेडियम और ग्राउंड भी तैयार करा देता है.
वह अक्सर क्रिकेट और राष्ट्रभक्ति के जुनून का मिक्सचर बनाकर उसे आम जनता के दिमाग पर लेप देता है. जनता क्रिकेट में मगन, राष्ट्रभक्ति में मगन, और सुब्रत राय दुनिया के बड़े-बड़े होटल्स खरीदने में लिप्त, जनता से पैसा निकालने में लिप्त, देश भर में कीमती जमीने खरीदने में लिप्त.

क्रिकेट और राष्ट्रभक्ति के माध्यम से जनता की आंखों पर सम्मोहन की पट्टी चढ़ाकर, सरकारी मशीनरी को उसकी औकात से ज्यादा खिला-पिलाकर, नेताओं और अफसरों की ब्लैकमनी को अपनी कंपनियों में लगवाकर, बड़े-बड़े खेलों और फिल्मी आयोजनों पर पैसे बरसाकर, भरपूर विज्ञापनों व पैसों के जरिए मीडिया हाउसों की बोलती बंद करा कर, खुद के न्यूज चैनलों और खुद के अखबारों के जरिए देश भर की जनता को अपने हिसाब से मानसिक रूप से तैयार बनाकर व लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने अनुकूल ढाल कर यह आदमी सुब्रत राय जो चाहता रहा, करता रहा. कहीं कोई बोलने वाला नहीं. कहीं कोई रोकने वाला नहीं. कहीं कोई टोकने वाला नहीं.
सुब्रत राय को करिश्मा मान लिया गया. सुब्रत राय ने सहारा समूह को दुनिया का सबसे बड़ा परिवार घोषित कर दिया और खुद को दुनिया के सबसे बड़े परिवार का अभिभावक. लेकिन यह परिवार अब उजड़ने को है, क्योंकि झूठ व फ्रॉड की नींव पर तैयार सहारा समूह देर से ही सही, कुछ डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशन्स के निशाने पर आ चुका है. इस सहारा समूह के फ्रॉड को पकड़ा जा चुका है. इस कारण सहारा समूह को सिर के बल खड़ा किया जा रहा है. नियम विरुद्ध ढंग से जनता से पैसे बटोरने और इस पैसे को नियम के खिलाफ दूसरे देशों में लगाने के घनचक्कर को समझा जा चुका है.
सत्तर के दशक में यूपी के गोरखपुर शहर में स्कूटर से चलने वाला सुब्रत राय चिटफंड के कारोबार का मामूली आदमी हुआ करता था. स्कूटर से घूम-घूम कर यह चिटफंड को मार्केट करता था, सेल करता था, और लोगों से पैसे लगवाने को तत्पर रहता था. कहते हैं कि यूपी के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने दो नंबर का अपना काफी पैसा सुब्रत राय के पास लगा दिया और बाद में उस पूर्व मुख्यमंत्री की मौत हो गई. दो नंबर का जो पैसा सुब्रत राय के पास था, वह सुब्रत राय के पास ही पड़ा रहा. वह पैसा इतना ज्यादा था कि उस पैसे के बूते सुब्रत राय ने अपने चिटफंड का कारोबार राष्ट्रीय स्तर पर फैला दिया और पैसा डबल करने के नाम पर जनता से पैसा बटोरने का महाअभियान शुरू कर दिया.
…जारी….
लेखक यशवंत भड़ास के संस्थापक और संपादक हैं. अगर आपके पास भी सुब्रत राय और सहारा समूह को लेकर कोई खास जानकारी, कहानी है तो उसे भड़ास के पास भेजें, उन जानकारियों, तथ्यों को इस सीरिज की अगली पोस्टों में समायोजित किया जाएगा. पता है: [email protected]





