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जयपुर में पत्रकार कालोनी के दूसरे चरण में भूखंड के लिए मारामारी

: किसी ने लगाया तलाकनामा तो कोई धमकी पर उतरा : जयपुर। जयपुर में पत्रकार आवास योजना में भूखण्ड लेने के लिए पत्रकारों द्वारा की गई औपचारिकताओं में बहुत जोरदार बातें सामने आ रही है। किसी ने पहले भूखण्ड ले लिया और अब अपनी बीवी को दिलाने के लिए कागजों में तलाक ही ले लिया, तो एक बहुत वरिष्ठ पत्रकार तो सरकार को धमकियां देने पर ही उतर आए हैं। ये दो मामले बहुत रोचक तरीके से सामने आए हैं।

: किसी ने लगाया तलाकनामा तो कोई धमकी पर उतरा : जयपुर। जयपुर में पत्रकार आवास योजना में भूखण्ड लेने के लिए पत्रकारों द्वारा की गई औपचारिकताओं में बहुत जोरदार बातें सामने आ रही है। किसी ने पहले भूखण्ड ले लिया और अब अपनी बीवी को दिलाने के लिए कागजों में तलाक ही ले लिया, तो एक बहुत वरिष्ठ पत्रकार तो सरकार को धमकियां देने पर ही उतर आए हैं। ये दो मामले बहुत रोचक तरीके से सामने आए हैं।

जयपुर में पत्रकार और पूर्व में प्रेस क्लब के पदाधिकारी एक साहब धौलाई में बनी पहली पत्रकार कॉलोनी में भूखण्ड ले चुके हैं। उनकी पत्नी भी पत्रकारिता कर रही हैं लेकिन परिवार में किसी एक को ही यह लाभ मिलने का नियम है। ऐसे में उन साहब ने अपनी पत्नी से तलाक लेने के विधिवत कागजात ही आवेदन के साथ पेश कर दिए। बताइये। चार लाख रुपए के भूखण्ड के लिए जीवन संगनी से तलाक के कागज पेश कर दिए गए।

ऐसे ही एक बहुत वरिष्ठ पत्रकार जो पहले राजस्थान के एक बड़े दैनिक में रहे और बाद में एक अंग्रेजी अखबार में चले गए। दस साल वे यहां रहे। वे बाहर के ही थे और वापिस बाहर चले गए। ऐसे में उनका भूखण्ड का मामला कमेटी ने अटका दिया। पता चला है कि उन वरिष्ठ साहब ने कमेटी, सरकार और डीआईपीआर डायरेक्टर को नोटिस भेजकर कहा है कि यदि मुझे भूखण्ड नहीं मिला तो किसी को नहीं लेने दूंगा।

एक साहब जिन्दगी भर पीआर एजेन्सी का काम करते रहे। कभी पत्रकारिता नहीं की लेकिन एक सांध्यकालीन समाचार पत्र को वे अपनी पीआर एजेन्सी के जरिए बहुत ऑबलाइज करते थे। उस समाचार पत्र उन्हें वे सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जो उन्हें श्रमजीवी पत्रकार साबित करने के लिए काफी हैं। और भी बहुत रोचक बातें है। मसलन कुछ वाकई श्रमजीवी पत्रकार हैं जिनके पास दस्तावेज पूरे नहीं है, उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है और उनके नामों पर बार-बार संदेह हो जाता है, लेकिन जो श्रमजीवी नहीं है, उनके पास पूरे दस्तावेज हैं। वे जुगाड़ कर चुके हैं और उनको ना चाहते ही दस्तावेजों के आधार पर भूखण्ड मिलना तय है।

कानाफूसी

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