वयोवृद्ध वरिष्टतम पत्रकार एवं दैनिक समाचार पत्र “आज ” के पूर्व संपादक गिरिजाशंकर राय “गिरीजेश” का 16 फरवरी 2013 को वाराणसी के एक निजी अस्पताल में 80 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण निधन हो गया . पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के गाँव उधरनपुर में 1933 में पैदा हुए गिरिजेश जी ने पांच दशको से ज्यादा लम्बा समय हिंदी पत्रकारिता में व्यतीत किया और उसको अपना अमूल्य योगदान दिया। गिरिजेश राय समाचार पत्र आज के बरेली, गोरखपुर एवं वाराणसी संस्करण में संपादक रहे,उन्होंने हिंदी पत्रकारिता में अविस्मरणीय योगदान के साथ-साथ हिंदी एवं भोजपुरी साहित्यकार की भूमिका भी बखूबी निभायी।
रेस का घोडा, तनिबोला हो मैना और सेविका उनके प्रसिद्ध कहानी संग्रह है . भोजपुरी साहित्य में राय जी के योगदान को देखते हुए उत्तर प्रदेश के वीरबहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने हिंदी स्नातक के पाठ्यक्रम में उन्हें जगह दी वही बिहार के वीर कुंवरसिंह विश्वविद्यालय आरा के हिंदी विभाग में उनकी कहानियो पर शोध कार्य चल रहा है। राय जी के निधन से हिंदी पत्रकारिता एवं साहित्य जगत में एक ऐसा स्थान रिक्त हो गया है जिसे भर पाना अब शायद ही मुमकिन हो। हिंदी पत्रकारिता का मापदंड स्थापित करने वाले संपादकाचार्य बाबूराव विष्णुराव पराड़कर के प्रिय शिष्यों में से एक गिरिजेश जी के निधन से पूरे भारत ही नहीं अपितु मोरिशस, त्रिनिनाद टोबेगो जैसे हिंदी एवं भोजपुरी बाहुल्य देशों में भी शोक की लहर दौड़ गयी है अपने जीवन के अंतिम दो दशक गोरखपुर के पत्रकारपुरम कॉलोनी में व्यतीत करने वाले गिरिजा शंकर राय “गिरिजेश” के निधन पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने गहरा दुःख व्यक्त किया है उन्होंने कहा की गिरिजाशंकर राय का निधन पत्रकारिता एवं भोजपुरी साहित्य जगत की एक अपूरणीय क्षति है। गिरिजाशंकर राय के निधन पर विभिन्न राजनीतिकदलों ,साहित्यिक संगठनों समेत भोजपुरी फिल्म जगत के नामचीन हस्ती रविकिशन एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री जगदम्बिका पाल ने भी इसे दुखद समाचार बताया। अपने बीच से छ्त्रप तुल्य वयोवृद्ध पत्रकार के चले जाने से समूची पत्रकारिता जगत शोकाकुल है। साभार- श्रीराम राय “कमलेश” , पत्रकार/साहित्यकार





