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संघ के इशारे पर संसद में आक्रामक रुख अपनाएगी भाजपा

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की माफी के बाद भी संघ परिवार का गुस्सा पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। यह जरूर है कि ‘हिंदू आतंकवाद’ के अपने बहुचर्चित बयान पर शिंदे खेद जता चुके हैं। इसे भाजपा नेतृत्व ने स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन संघ नेतृत्व ने इस प्रकरण पर अपनी नाराजगी के संकेत दे दिए हैं। संघ के संकेत को समझकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संसद सत्र में आक्रामक रणनीति बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। उसकी कोशिश है कि सरकार को महंगाई और हेलीकॉप्टर रिश्वतकांड के मामले में ज्यादा घेरा जाए। अपनी रणनीति में विपक्ष के दूसरे दलों को शामिल करने के लिए भी भाजपा नेता ‘संवाद’ शुरू कर रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की माफी के बाद भी संघ परिवार का गुस्सा पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। यह जरूर है कि ‘हिंदू आतंकवाद’ के अपने बहुचर्चित बयान पर शिंदे खेद जता चुके हैं। इसे भाजपा नेतृत्व ने स्वीकार भी कर लिया था, लेकिन संघ नेतृत्व ने इस प्रकरण पर अपनी नाराजगी के संकेत दे दिए हैं। संघ के संकेत को समझकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संसद सत्र में आक्रामक रणनीति बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। उसकी कोशिश है कि सरकार को महंगाई और हेलीकॉप्टर रिश्वतकांड के मामले में ज्यादा घेरा जाए। अपनी रणनीति में विपक्ष के दूसरे दलों को शामिल करने के लिए भी भाजपा नेता ‘संवाद’ शुरू कर रहे हैं।

संसद के बजट सत्र की कल शुरुआत हो गई है। पहले दिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण हुआ। इसमें राष्ट्रपति ने इस सत्र की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। इसमें उन्होंने भूमि अधिग्रहण विधेयक, लोकपाल विधेयक, यौन हिंसा के खिलाफ कानून में संशोधन का विधेयक, सरकारी नौकरियों में दलितों के प्रमोशन में आरक्षण आदि विधेयकों को पारित कराने की सरकारी मंशा का उल्लेख कर दिया है। प्रणब के इस अभिभाषण को लेकर मुख्य विपक्षी दल भाजपा के तेवर आक्रामक ही बने रहे। पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडु ने कहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण से यही संदेश गया है कि सरकार के पास कोई सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार के दृष्टिकोण का ही संकेत रहता है। लेकिन, इस दौर में महंगाई और भ्रष्टाचार ज्वलंत मुद्दे हैं, लेकिन इन दोनों पर अभिभाषण में चुप्पी क्यों साधी गई है? लगता यही है कि यूपीए सरकार न महंगाई को लेकर चिंतित है और न भ्रष्टाचार को लेकर। जबकि पूरा देश जानता है कि पिछले वर्षों में इस सरकार के कामकाज में घोटाले ही घोटाले हुए हैं। सरकार, इन घोटालों को दबाने में ही अपनी राजनीतिक ऊर्जा लगाती रही है। इस बारे में अभिभाषण में कुछ नहीं कहा गया है।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, संघ नेतृत्व को शिंदे के मामले में भाजपा की रणनीति पसंद नहीं आई। दरअसल, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की पहल पर गृहमंत्री से खेद पत्र लिखवाने की समझदारी बनाई गई थी। ताकि, गृहमंत्री को लेकर राजनीतिक टंटा खत्म किया जाए। तय रणनीति के अनुसार बुधवार शाम गृहमंत्री ने खेद जताते हुए भाजपा नेतृत्व को पत्र भी लिख दिया था। इसके बाद भाजपा नेताओं ने इसका स्वागत करते हुए कह दिया था कि देर से सही, लेकिन शिंदे ने दुरुस्त कदम उठा लिया है। ऐसे में, उनके ‘बॉयकॉट’ के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार भी इससे खुश हो गए कि सत्र शुरू होने के पहले शिंदे को लेकर होने वाला बवाल टल गया है।

लेकिन, संघ के वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा की इस रणनीति पर नाराजगी जाहिर कर दी है। संघ के प्रवक्ता राममाधव ने मीडिया से कह दिया है कि हिंदू आतंकवाद को लेकर गृहमंत्री ने जिस तरह से गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया था, वह यूं ही माफी लायक नहीं है। कांग्रेस के नेताओं ने यह नहीं बताया कि उन्हें एक महीने बाद खेद जताने की याद क्यों आई? संघ के एक वरिष्ठ नेता ने ‘डीएलए’ से कहा कि गृहमंत्री ने अपने खेदनामे में यह भी जिक्र किया है कि उन्होंने बगैर किसी आधार के हिंदू आतंकवाद का आरोप लगाया था। ऐसे में, इस मुद्दे पर बहस जरूर होनी चाहिए कि आखिर गृहमंत्री की कुर्सी पर एक गैर-जिम्मेदार शख्स कैसे बैठ गया है? जो कि एक महीने पहले कहता है कि उसके पास कुछ ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जिनके आधार पर वे कह सकते हैं कि संघ और भाजपा के प्रशिक्षण शिविरों में हिंदू आतंकवादी तैयार किए जाते हैं। शिंदे के इस बयान को लेकर पार्टी के तमाम और नेता इसका समर्थन भी करते रहे हैं। लेकिन, संसद सत्र के दौरान जिस तरह से खेद जताया गया है, वह एक राजनीतिक स्वांगभर लगता है।

सूत्रों के अनुसार, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी से इस संदर्भ में बात की है। संघ प्रमुख ने इस बात पर हैरानी जताई है कि शिंदे की चिट्ठी के आधार पर ही सब कुछ माफ कर देने की रणनीति ठीक नहीं है। क्योंकि, संघ परिवार के लाखों कार्यकर्ता गृहमंत्री के बयान से दुखी हैं। यदि गृहमंत्री वाकई में माफी मांगना चाहते हैं, तो उन्हें खुलकर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। क्योंकि, यह मामला भाजपा तक ही सीमित नहीं रहा है। संघ प्रमुख का संकेत समझकर पार्टी के नेताओं ने संसद में आक्रामक रुख अपनाने की तैयार कर ली है।

राज्यसभा के उपसभापति पी.जे. कुरियन के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप है। केरल में 17 साल पहले सूर्यानेल्ली बलात्कार कांड हुआ था। 16 साल की एक लड़की के साथ कई दिनों तक गैंगरेप की शर्मनाक घटना हुई थी। पीड़िता ने अदालत में गुहार लगाई है कि इस मामले में कुरियन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। क्योंकि, यौन शोषण करने वालों में वे भी शामिल थे। हालांकि, इस मामले में तीन जांच और दो न्यायिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इन सभी में कुरियन को क्लीन चिट मिली थी। लेकिन, पीड़िता की नई मांग को लेकर उनकी दिक्कतें बढ़ गई हैं। विपक्ष के कई नेता दबाव बनाने लगे हैं कि इस संगीन मामले को देखते हुए कुरियन का इस्तीफा ले लिया जाए। लेकिन, कुरियन को बचाने के लिए कांग्रेस ने अपनी ताकत झोंक दी है।

कुरियन भी अपने बचाव के लिए विपक्ष के नेताओं से गुहार कर रहे हैं। उन्होंने राज्यसभा के सभी सांसदों को पत्र भी लिखा है। सपा नेतृत्व ने खुलकर कह दिया है कि कुरियन को जबरन फंसाया जा रहा है। ऐसे में, उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ाने का कोई तुक नहीं है। जबकि, भाजपा नेतृत्व ने कुरियन के मामले में अपने पत्ते अभी नहीं खोले। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस पर दबाव बढ़ाने के लिए भाजपा नेतृत्व कुरियन का इस्तीफा मांगने की तैयारी में है। ताकि, कांग्रेस नेतृत्व की किरकिरी कराई जा सके।

विशिष्ट व्यक्तियों के लिए इटली की कंपनी से 12 हेलीकॉप्टरों का एक रक्षा सौदा फरवरी 2010 में किया गया था। पिछले दिनों यह खुलासा हुआ है कि इस सौदे में कंपनी ने 362 करोड़ रुपए की रिश्वत भारत में भेजी थी। इसको लेकर राजनीतिक हंगामा मच गया है। विपक्ष इस दलाली कांड को दूसरा ‘बोफोर्स’ बनाने के फेर में है। जबकि, सरकार इस चक्कर में है कि इस मामले को ‘जांच’ के जरिए जल्द से जल्द रफा-दफा करा दिया जाए। भाजपा नेताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि इस बड़े दलाली कांड में ‘इटली कनेक्शन’ के चलते सरकार कई राज छिपा रही है। विपक्ष जब ‘इटली कनेक्शन’ की बात करता है, तो उसका इशारा कहीं न कहीं यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी तक पहुंचता है। क्योंकि, सोनिया मूलरूप से इटली की ही हैं। कांग्रेसी, भाजपा नेताओं के इस तीखे कटाक्ष से तुनक रहे हैं।
इस सत्र में बहुचर्चित भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक को भी पारित होना है। संसदीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप इस विधेयक में कुछ संशोधन किए गए हैं। इनमें से कई संशोधनों को लेकर कई दलों का विरोध जारी है। ऐसे में, आशंका है कि शायद ही यह विधेयक इस सत्र में पास हो पाए। भूमि अधिग्रहण विधेयक लंबे समय से लंबित रहा है। इस सत्र में इसके पास होने की उम्मीद जरूर की जा रही है। लेकिन, खाद्य सुरक्षा गारंटी विधेयक को लेकर संशय बढ़ने लगा है।

दरअसल, इस विधेयक के पीछे सोनिया गांधी का खास राजनीतिक एजेंडा रहा है। उन्हीं की पहल पर विधेयक का प्रारूप तैयार हुआ है। इस सत्र में इसे पारित कराने का संकल्प जताया गया है। लेकिन, सपा नेतृत्व ने इसके कई बिंदुओं पर अपनी आपत्ति जाहिर कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव ने कहा है कि जब तक किसानों की पूरी पैदावार खरीदने की गारंटी सरकार नहीं देती, तब तक खाद्य सुरक्षा गारंटी का कानून कैसे बनाया जा सकता है? उनका दावा है कि मौजूदा स्थितियों में यह विधेयक किसान विरोधी साबित हो सकता है। ऐसे में उनकी पार्टी विधेयक के कई बिंदुओं को संशोधित करने का दबाव डालेगी।

पिछले साल 16 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी में एक छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना हुई थी। इसको लेकर पूरे देश में रोष पैदा हुआ। इस घटना के बाद सरकार ने यौन उत्पीड़न जैसे अपराधों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की पहल की थी। जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में एक न्यायिक समिति बना दी गई थी। इस समिति ने भारतीय दंड संहिता में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन करने की सलाह दी है। इसी सलाह पर सरकार विधेयक ला रही है। इस विधेयक के कई बिंदुओं पर भी विपक्ष के कई दलों को आपत्तियां होने लगी हैं। यह रुख सरकार की कार्य योजना में बड़ी बाधा बन सकता है। तेलंगाना को अलग राज्य बनाने का मामला भी इस सत्र में काफी हंगामा करा सकता है। भाजपा नेतृत्व ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी शुरू की है। कोशिश की जा रही है कि इस मुद्दे के बहाने आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की राजनीतिक जड़ें कमजोर कर दी जाएं। कल शाम को हैदराबाद में बम-विस्फोट की की कई भयावह घटनाएं हो गई हैं। इनमें एक दर्जन से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। इस हादसे के पीछे आतंकवाद का चेहरा देखा जा रहा है। इस मामले को लेकर भाजपा नेतृत्व संसद में हंगामा जरूर करेगा। जाहिर है इस मामले को लेकर गृहमंत्री शिंदे नए सिरे से उसके निशाने पर आ जाएंगे।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।

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