रायपुर। पुलिस द्वार एक हुक्का बार में छापे की कार्रवाई का कवरेज करने पहुंचे प्रेस फोटोग्राफरों के साथ प्रशिक्षु आईपीएस के इशारे पर क्राइम ब्रांच के एक सिपाही ने गाली-ग्लौज तथा मारपीट की। अधिकारी प्रेस फोटोग्राफरों पर कैमरे से खिंची गई फोटो डिलिट करने का दबाव बना रहे थे। फोटोग्राफरों में रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव भी शामिल थे। घटना से नाराज पत्रकारों ने इसकी लिखित शिकायत सिविल लाइन थाने में करने के साथ ही आईजी जीपी सिंह को भी जानकारी दी।
इसके बावजूद आईजी ने कोई कठोर कार्रवाई नहीं कि केवल आरोपी सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया, जबकि उसको उकसाने वाले प्रशिक्षु आईपीएस के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे पत्रकारों में रोष है और वे पूरे मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलने की तैयारी में हैं। घटना रविवार की शाम शंकरनगर स्थित इंडियन चिल्ली की है। इंडियन चिल्ली सहित शहर के कुछ अन्य स्थानों पर हुक्काबार चलने की शिकायत पर क्राइम ब्रांच की टीम ने छापा मार कार्रवाई की। इसका नेतृत्व दो प्रशिक्षु आईपीएस अफसर कर रहे थे। टीम में क्राइम ब्रांच के निरीक्षक रमाकांत साहू भी शामिल थे।
पुलिस ने वाहवाही लुटने के लिए इस छापे की कार्रवाई की सूचना पत्रकारों को दी तथा उन्हें मौके पर बुलाया। सूचना के बाद राजधानी के लगभग सभी प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। फोटोग्राफरों ने जैसे ही फोटो खींचना शुरू किया, वहां मौजूद दो लोगों ने उन्हें घेर लिया और कैमरे से उनकी फोटो डिलिट करने का दबाव डालने लगे। उन दोनों की पहचान से अनजान प्रेस फोटोग्राफारों ने ऐसा करने से मना कर दिया। इस पर विवाद शुरू हो गया।
अभी बातचीत हो रही थी कि बीच में क्राइम ब्रांच का एक आरक्षक कूद पड़ा। सादे कपड़े में कार्रवाई में शामिल इस जवान ने हरिभूमि प्रेस के फोटोग्राफर व रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव विनय शर्मा और नईदुनिया के फोटोग्राफर नरेंद्र बंगाले को धक्का तथा गाली देते हुए मारपीट की। क्राइम ब्रांच के अफसरों ने बाद में खुलासा किया कि फोटो डिलिट करने के लिए दबाव डाल रहे दोनों व्यक्ति प्रशिक्षु आईपीएस थे। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। घटना के प्रति रोष व्यक्त करते हुए उन्होंने मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच प्रभारी श्वेता सिन्हा और आईजी जीपी सिंह से की। जीपी सिंह ने मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कही है। इसके बाद सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई।
क्राइम ब्रांच प्रभारी सिन्हा ने बताया कि घटना में शामिल क्राइम ब्रांच के आरक्षक अभिषेक को लाइन अटैच कर दिया गया है। उन्होंने प्रशिक्षु आईपीएस अफसरों के संबंध में कोई भी बात करने से मना कर दिया। नाराज पत्रकार अब इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री रमन सिंह तक जाना चाहते हैं। आखिर सादे ड्रेस में कोई अधिकारी बिना अपना परिचय दिए कैसे किसी के साथ अकारण बदतमीजी कर सकता है।





