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जमानत रद्द होने पर हाईकोर्ट से फरार हो गया ‘हिमाचल आजकल’ का मालिक

: राजेश्वर सब्रवाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पड़ोसी राज्यों में छापेमारी शुरू : करीब 22 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोपी ‘हिमाचल आजकल’ न्यूज चैनल के मालिक राजेश्वर सब्रवाल की प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को अग्रिम जमानत खारिज कर दी। जमानत खारिज होते ही राजेश्वर सब्रवाल अदालत परिसर से शातिर अपराधियों को तर्ज पर फरार हो गया। नतीजन सोलन पुलिस हाथ मलती रह गई। हाईकोर्ट ने राजेश्वर सब्रवाल को 25 फरवरी तक अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन पुलिस को उसने छानबीन में सहयोग नहीं दिया। यही कारण है कि हफ्ता भर पहले सोलन पुलिस ने हाईकोर्ट में सब्रवाल की जमानत खारिज करने के लिए अर्जी दाखिल की थी।

: राजेश्वर सब्रवाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पड़ोसी राज्यों में छापेमारी शुरू : करीब 22 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोपी ‘हिमाचल आजकल’ न्यूज चैनल के मालिक राजेश्वर सब्रवाल की प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को अग्रिम जमानत खारिज कर दी। जमानत खारिज होते ही राजेश्वर सब्रवाल अदालत परिसर से शातिर अपराधियों को तर्ज पर फरार हो गया। नतीजन सोलन पुलिस हाथ मलती रह गई। हाईकोर्ट ने राजेश्वर सब्रवाल को 25 फरवरी तक अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन पुलिस को उसने छानबीन में सहयोग नहीं दिया। यही कारण है कि हफ्ता भर पहले सोलन पुलिस ने हाईकोर्ट में सब्रवाल की जमानत खारिज करने के लिए अर्जी दाखिल की थी।

सोलन के एसएसपी का कहना है कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद राजेश्वर सब्रवाल एक तरह से भूमिगत हो गया और उसने हाईकोर्ट के निर्देशों की हवेलना करते हुए छीनबीन में पुलिस को सहयोग नहीं दिया। उसके मोबाइल नंबर भी हमेशा बंद रहे। पुलिस राजेश्वर सब्रवाल के असली नाम को लेकर भी शंकित है। शिमला में परिचित लोग सब्रवाल को राजेश बख्शी और राजू बख्शी के नाम से जानते हैं, जबकि सेब के कारोबारियों में वह राजेश्वर सब्रवाल के नाम से जाना जाता है। सोलन पुलिस को आशंका है कि राजेश्वर सब्रवाल उर्फ राजेश बख्शी कहीं देश छोडक़र न भाग जाए, इसलिए देश के सभी हवाई अड्डों पर एतिहातन सूचना दे दी गई है। शिमला में बने उसके पासपोर्ट का नंबर भी हवाई अड्डों की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजैंसियों को मुहैया करवा दिया गया है, ताकि वह देश छोडक़र न भाग सके।

क्या है पूरा मामला : सोलन जिला के परवाणू के आढ़ती चुनी लाल चौहान के साथ राजेश्वर सब्रवाल ने दो साल पहले करीब 46 करोड़ रुपए के सेब का कारोबार किया। चुनी लाल चौहान का कहना है कि सब्रवाल उर्फ बख्शी ने खुद को सेना का सेवानिवृत कर्नल बताया और कहा कि सेब की पूरी सप्लाई सेना में ही की जाएगी। शुरुआत में सेब की खरीद का धन चौहान को मिलता रहा। सब्रवाल ने 46 करोड़ रुपए में से करीब 24 करोड़ रुपए का भुगतान चौहान को कर दिया। जब विश्वास कामय हो गया तो चुनी लाल चौहान आंख बंद करके सब्रवाल को सेब मुहैया करवाता रहा। इस तरह करीब 22 करोड़ रुपए के सेब चौहान ने सब्रवाल को बेचे, जिसका भुगतान आज तक नहीं हुआ।

थककर चुनी लाल ने धन की उगाही के लिए सब्रवाल पर सख्त दबाव बनाना शुरु कर दिया। फलस्वरुप पहली किश्त के तौर पर सब्रवाल ने उसे 90-90 लाख रुपए के तीन चैक थमा दिए। बाद में यह तीनों चैक बाऊंस हो गए तो सब्रवाल ने तर्क दिया कि यह तीनों चैक चोरी हो गए थे। लेकिन हैरानी इस बात की है कि पुलिस में कथित तौर पर चोरी हुए चैकों का कहीं भी मामला दर्ज नहीं है। अंतत: चुनी लाल चौहन ने कसौली कोर्ट में राजेश्वर सब्रवाल  के खिलाफ मामला दर्ज किया। कुछ समय बाद प्रारंभिक सुनवाई में अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में परवाणु पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश पारित किए। इससे पहले कि गैर जमानती धाराओं में पुलिस सब्रवाल को गिरफ्तार कर पाती, उसने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत हासिल कर ली जो आज पुलिस के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने रद्द कर दी। अब फरार राजेश्वर सब्रवाल की कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है तथा उसके पिछले सभी राज उजागर हो सकते हैं।

कौन है यह सब्रवाल : राजेश्वर सब्रवाल आखिर कौन है, इसका पता लगाने के लिए अभी तक सोलन पुलिस भी सफल नहीं हो पाई है। पुलिस को अभी तक केवल इतना ही मालूम हुआ है कि सब्रवाल पहले जम्मू और बाद में नई दिल्ली में कारोबार करता था। जम्मु में वह सेब के साथ-साथ केसर और मंहगी कश्मीरी शालों का धंधा करता था। वहां भी कुछ गड़बड़ के चलते वह दिल्ली भाग आया और दिल्ली के कनॉट प्लेस में छोटा सा दफ्तर लेकर इवेंट मैनेजमेंट के धंधे में लग गया। इस धंधे में भी वह विवादास्पद हो गया और दिल्ली से भागकर शिमला पहुंचा। शिमला में सेब के धंधे के साथ-साथ फरवरी 2012 में राजेश्वर सब्रवाल ने ‘हिमाचल आजकल’ के नाम से एक न्यूज बुलेटिन भी आरंभ किया। शुरू में यह बुलेटिन दिशा चैनल पर चला, जो एक अध्यात्मिक चैनल था। तीन माह तक बुलेटिन दिशा चैनल पर चलता रहा, लेकिन धन के लेनदेन में विवाद के कारण दिशा पर बुलेटिन बंद हो गया।

कुछ समय बाद सब्रवाल ने मोहाली (पंजाब) के 7 सी न्यूज चैनल पर हिमाचल आजकल बुलेटिन को शुरु किया, जो कि विधानसभा चुनाव के बीच बंद हो गया। प्रदेश विधानसभा चुनाव 4 नवंबर 2012 को होने थे और हिमाचल आजकल बुलेटिन चुनाव प्रचार के मध्य 25 अक्तूबर को अचानक बंद हो गया। 7 सी के प्रबंध निदेशक सरदार जसबीर सिंह के अनुसार धन का भुगतान न करने के कारण 25 अक्तूबर को हिमाचल आजकल बंद कर दिया गया था। उसके बाद राजेश्वर सब्रवाल ने लुधियाना के गुलिस्तान न्यूज चैनल पर भी हिमाचल आजकल बुलेटिन को शुरु करने की कोशिश की, लेकिन ठीक एक महीने बाद धन का भुगतान न करने के कारण वहां भी सब्रवाल का बुलेटिन बंद हो गया।

हिमाचल आजकल न्यूज बुलेटिन की शुरुआत राजेश्वर सब्रवाल ने पत्रकार कृष्ण भानु को साथ लेकर शुरू की थी। कृष्ण भानु हिमाचल के जाने-माने पत्रकार हैं तथा वे मौजूदा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेहद करीबी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के साथ भी भानु के मधुर संबंध रहे। राजेश्वर सब्रवाल ने संभवत: इसलिए कृष्ण भानु को अपने साथ जोड़ा, ताकि संकट के समय वे काम आ सकें। लेकिन करीब 34 साल के पुराने अनुभवी पत्रकार कृष्ण भानु ने जल्द ही सब्रवाल को भांप लिया और अपनी टीम सहित हिमाचल आजकल को अलविदा कह दिया। कृष्ण भानु के हिमाचल आजकल छोड़ते ही बुलेटिन के बुरे दिन शुरू हो गए और भटकाव शुरु हो गया। अब हिमाचल आजकल में ताले जड़ गए हैं और पुलिस से बचने के लिए इस बुलेटिन के मालिक राजेश्वर फरार हो गए हैं।

यहां दिलचस्प यह है कि परवाणु के चुनीलाल चौहान इकलौते सेब आढ़ती नहीं है, जो सब्रवाल के शिकार बने हैं। उनके अलावा भी रोहड़ू, जुब्बल, कोटखाई और किन्नौर के दर्जनों सेब उत्पादकों के करोड़ों रुपए सब्रवाल के पास फंसे हुए हैं। ये सभी लेनदार भी सब्रवाल की तलाश कर रहे हैं।

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