विराटनगर (नेपाल) : नेपाल के पूर्वांचल दौरे में रहे आर्ट आफ लीविंग का संस्थापक श्री श्री रविशंकर गुरुवार को विराटनगर के ऐतिहासिक शहीद रंगशाला मैदान में हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इश्वर सर्वत्र है, हमारी जो भी इच्छा है उसे पूरा करता है। जीवन को सरस बनाये नीरस नहीं। अपने चेहरे पर उदासी आने न दें। अध्यात्म को अपनायें और सुखी खुशी रहें। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कभी उदास नहीं रहना चाहिए। उदासी किसी समस्या का समाधान नहीं बल्कि रोग बीमारी का लक्षण है।
उन्होंने लोगों से खाद रहित भोजन अपनाने का सुझाव दिया। कहा चीनी कम खायें यह हानिकारक है, इसके खाने से कई बीमारी होती है। उन्होंने गुड़ को भारत का ब्रांड बताया है तथा इसके फायदे गिनाये। उन्होंने अत्यधिक मात्रा में चीनी सेवन से जोड़ों पीठ व घुटनों में दर्द बताते हुए उम्र दराज के लोगों में इसका अधिक असर होने की जानकारी दी। उन्होंने राजनेताओं पर चुटकी लेते हुए कहा कि राजनेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं, जो ठीक नहीं है। उन्होंने खाना खाने से पूर्व अन्नदाता सुखी भव मंत्रोचारण का सुझाव दिया। कहा कि जो किसान हमें अन्न उपजाकर देते हैं, अगर वह सुखी नहीं हो तो हम कैसे सुखी रह सकते हैं।

उन्होंने कहा जिस देश में व्यापारी दुखी है वह देश कभी तरक्की नहीं कर सकता। अगर व्यापारी सुखी होगा तो देश समृद्ध होगा। इससे पूर्व चार्टर विमान से विराटनगर पहुंचे श्री श्री रविशंकर पहले स्थानीय यूरो किड्स पहुंचे, जहां गोलछा परिवार के सदस्यों तथा विद्यायालय के छात्र छात्राओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस मौक पर आध्यात्मिक गुरु ने छात्र छात्राओं को शिक्षा के कई गुर भी सिखाये। कहा कि बच्चे को शरारती होना चाहिए। इस मौके पर गोलछा आर्गेनार्इजेशन के वरिष्ठ सदस्य ज्ञानचन्द्र दुग्गड़, उद्योग संगठन मोरंग के अध्यक्ष दिनेश गोलछा ने उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। बच्चों को देख प्रभावित आध्यात्मिक गुरु ने छात्र छात्राओं से बातचीत भी की तथा पढ़ाई में रुचि के संबंध में पूछा। उन्होंने बच्चों को टीवी से परहेज करने का सुझाव भी दिया। इस मौके पर विद्यालय के प्रेक्षा गोलछा सहित शिक्षक-शिक्षिका अभिभावक व अन्य लोग मौजूद थे।
अरुण कुमार वर्मा की रिपोर्ट.






