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लखनऊ

अंग्रेजी पुलिस जैसे निरंकुश बन गए थे वर्दीधारी (देखें तस्‍वीरें)

सुलतानपुर। सोमवार को पुलिस अधीक्षक दफ्तर जलियांवाला बाग से कम नहीं नजर आया। अंग्रेजी हुकूमत की तर्ज पर वर्दीधारी ज्ञापन देने गए लोगों की जान लेने पर उतारू थे। स्थिति को भड़काने में सत्ता पक्ष के माननीय की भूमिका अहम बताई जा रही है। हालॉकि यह दृश्य देख प्रत्यक्षदर्शियों के रोंगटे खड़े हो गए। बहरहाल माना जा रहा है कि पुलिस ने लाठी चार्ज न किया होता तो यह प्रदर्शन जिले के लिए इतिहास बन जाता। कानून को हाथ लेने वाले वर्दीधारियों की खबर लेने की तैयारी चल रही है। उधर, देररात एसआई गणेश शुक्ला व सिपाही रामसमुझ को एसपी ने छायाकार से अभद्रता मामले में निलंबित कर दिया।

सुलतानपुर। सोमवार को पुलिस अधीक्षक दफ्तर जलियांवाला बाग से कम नहीं नजर आया। अंग्रेजी हुकूमत की तर्ज पर वर्दीधारी ज्ञापन देने गए लोगों की जान लेने पर उतारू थे। स्थिति को भड़काने में सत्ता पक्ष के माननीय की भूमिका अहम बताई जा रही है। हालॉकि यह दृश्य देख प्रत्यक्षदर्शियों के रोंगटे खड़े हो गए। बहरहाल माना जा रहा है कि पुलिस ने लाठी चार्ज न किया होता तो यह प्रदर्शन जिले के लिए इतिहास बन जाता। कानून को हाथ लेने वाले वर्दीधारियों की खबर लेने की तैयारी चल रही है। उधर, देररात एसआई गणेश शुक्ला व सिपाही रामसमुझ को एसपी ने छायाकार से अभद्रता मामले में निलंबित कर दिया।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय में अखिलेश हजारे जब भड़काऊ नारेबाजी कर रहे थे तो वहां पहुंचे सत्ता पक्ष के माननीय से भी बहस हो गई। हजारे ने 2014 के चुनाव में उन्हें औकात में लाने तक की धमकी दे डाली। इतना सुनते ही माननीय भी आग बबूला हो गए। उन्होंने  समाजसेवी को सबक सिखाने के लिए वर्दीधारियों को उकसा दिया। फिर क्या था पुलिस वालों ने लाठियां भांजनी शुरू कर दी। पुलिस लाठी चार्ज से पुलिस अधीक्षक दफ्तर में भगदड़ मच गई। पुलिस इतनी आक्रोशित थी कि वह यह भूल गई कि किसी का गला दबाने से मौत भी हो सकती है। इसकी बगैर परवाह किए कई सिपाही तो प्रदर्शन करने वाले लोगों को सड़क पर ही पटकने लगे थे। पुलिस पिटाई की कई तस्वीरें मीडिया कर्मियों व अन्य लोगों ने भी कैद कर ली है।

पिटाई के बाद आधा दर्जन लोगों को जीप में भरकर हवालात में डाल दिया गया। इस पिटाई के दौरान पुलिस अधीक्षक किरण एस. अपने दफ्तर से भी बाहर नहीं निकले। दूसरा पहलू यह भी है कि यदि सोमवार को वर्दीधारियों ने प्रदर्शनकारियों को न खदेड़ा होता तो शायद यह घटना इतिहास भी बन जाती। लोगों का मानना है कि पहली दफा किसी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में भड़काऊ भाषण व नारेबाजी हुई है। हालॉकि इस घटना को पुलिस अधिकारियों ने भी गहराई से लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक लाठी चार्ज व पिटाई करने वाले कुछ सिपाहियों पर गाज गिर सकती है। मारपीट करने वाले वर्दीधारियों की पहचान भी की जा रही है। बहरहाल पुलिस दफ्तर में हुई यह घटना लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मंगलवार को पत्रकारों ने एडीजी कानून व्यवस्था को पत्र भेजकर दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

दूसरी तरफ छायाकार राज बहादुर यादव के साथ हुई अभद्रता मामले में एसआई गणेश शुक्ला व सिपाही रामसमुझ पर हुई कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गणेश शुक्ला जयसिंहपुर में तैनाती के दौरान लाइन हाजिर चल रहा था। जबकि सिपाही रामसमुझ की मौके पर मौजूदगी पर संदेह बरकरार है। हालॉकि यह कार्रवाई सीओ नगर वीपी सिंह की रिपोर्ट पर की गई है। सवाल यह खड़ा होता है कि जिस समय छायाकार के साथ अभद्रता व प्रदर्शनकारियों की पिटाई की जा रही थी वहां सीओ नगर मौजूद थे।

जब सत्येन्द्रवीर ने पेश की थी सहृदयता की मिसाल : वर्ष 2009 में जब एक विधायक की पूर्व महिला मित्र उनके आवास पर हंगामा मचा रही थी तो कवरेज करने गए एक पत्रकार से विधायक समर्थक की हाथापाई हो गई थी। जिसके विरोध में पत्रकारों ने कोतवाली का घेराव कर सड़क जाम किया था। उस समय के एसपी सत्येन्द्रवीर सिंह ने दोषी पर कार्रवाई का आश्वासन देते हुए पत्रकारों से जाम खोलने की अपील की थी। जब पत्रकार ने कहा कि विधायक समर्थक ने मेरी कालर पकड़ी तो एसपी ने सहृदयता दिखाते हुए कहा कि लो तुम मेरी कालर पकड़ लो। एसपी के इस स्वाभाव को देखकर पत्रकारों ने फौरन ही जाम खोल दिया था। काश! सहृदयता की कुछ ऐसी ही मिसाल सोमवार को एसपी किरण एस. पेश करते।

सुल्‍तानपुर से आसिफ मिर्जा की रिपोर्ट.

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