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वो कैमरा ही नहीं, नौकरी भी देने को तैयार, पर ये कथित पीड़ित महोदय कहां हो गए फरार!

किन्हीं राकेश बंसल उर्फ स्वतंत्र फोटोग्राफर ने पिछले दिनों आरोप लगाया कि उनका कैमरा दीपक चौरसिया व उनके लोगों ने छीन लिया, गायब कर दिया, और मांगने पर दे नहीं रहे. राकेश बंसल के इस आरोप को आम आदमी पार्टी के लोगों ने तूल दे दिया. न्यू मीडिया और सोशल मीडिया पर इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया. लेकिन इसके पीछे की सच्चाई अब पता चली है. मामला ये है कि शुरू से ही दीपक चौरसिया ने राकेश बंसल को न सिर्फ कैमरा देने की बात कही, बल्कि नौकरी भी देने का प्रस्ताव रखा. पर राकेश बंसल गायब हो गए.

किन्हीं राकेश बंसल उर्फ स्वतंत्र फोटोग्राफर ने पिछले दिनों आरोप लगाया कि उनका कैमरा दीपक चौरसिया व उनके लोगों ने छीन लिया, गायब कर दिया, और मांगने पर दे नहीं रहे. राकेश बंसल के इस आरोप को आम आदमी पार्टी के लोगों ने तूल दे दिया. न्यू मीडिया और सोशल मीडिया पर इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया. लेकिन इसके पीछे की सच्चाई अब पता चली है. मामला ये है कि शुरू से ही दीपक चौरसिया ने राकेश बंसल को न सिर्फ कैमरा देने की बात कही, बल्कि नौकरी भी देने का प्रस्ताव रखा. पर राकेश बंसल गायब हो गए.

असल में राकेश बंसल उस टीम का हिस्सा थे, जो जंतर मंतर पर दीपक चौरसिया के लाइव शो का विरोध कर रही थी, नारेबाजी कर रही थी, लाइव शो का मंच तोड़ देने पर आमादा थी. ये लोग आम आदमी पार्टी के लोग थे. ये लोग केजरीवाल को इंडिया न्यूज द्वारा निशाना बनाए जाने से नाराज थे. हालांकि इंडिया न्यूज के लोगों का कहना है कि उनके चैनल ने अपनी तरफ से कोई आरोप अरविंद केजरीवाल पर नहीं लगाया बल्कि स्वामी अग्निवेश समेत ढेर सारे टीम अन्ना के पूर्व लोगों के आरोपों को प्रसारित किया और इन आरोपों पर केजरीवाल व उनकी टीम के लोगों से पक्ष लिया.

चैनलों का, मीडिया का काम भी यही होता है. पर आम आदमी पार्टी, केजरीवाल और इनके लोगों ने जिस तरीके से दीपक चौरसिया को टारगेट किया, उनके मोबाइल पर लगातार फोन कराए, अश्लील व गाली-गलौज भरे संवाद किए गए, गंदे व गाली-गलौज की भाषा में एसएमएस भिजवाए गए वो निंदनीय व अशोभनीय है. यह शूटिंग द मैसेंजर का ही मामला है जिसके माध्यम से टीम केजरीवाल अपनी तानाशाही और असहिष्णुता को प्रदर्शित कर रही है.

राकेश बंसल लाइव शो के दौरान अंदर घुसकर फोटो खींचने लगे. दीपक चौरसिया को टारगेट करने लगे. तब किसी ने उनका कैमरा उनसे छीन लिया. बाद में जब उन्होंने कैमरा गायब होने की शिकायत दीपक से की तो उन्होंने तुरंत कैमरा देने का आदेश दिया और इसके लिए राकेश बंसल को अपने कैमरे का बिल आदि लाने को कहा. फिर खुद राकेश बंसल ने कहा कि वो सीसीटीवी फुटेज के जरिए देखना चाहते हैं कि कैमरा किसने लिया. उन्हें फुटेज भी दिखाया गया. कुछ लोगों का कहना है कि भीड़ में से ही किसी ने उनका कैमरा चोरी कर लिया और एक हाथ से दूसरे हाथ होते हुए कैमरा गायब कर दिया गया.

राकेश बंसल ने दीपक से मिलकर पहले खुद को आज समाज अखबार का फोटोग्राफर बताया. फिर खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताया. अब जबकि दीपक चौरसिया उन्हें कैमरा देने को तैयार हैं तो वे गायब हो गए और दीपक पर तरह तरह के आरोप लगाकर सोशल व न्यू मीडिया में प्रसारित कराने लगे. राकेश बंसल के आरोपों को आम आदमी पार्टी के लोगों ने उछाल कर हवा दे दिया और फिर से लोग दीपक चौरसिया के मोबाइल पर मैसेज कराने लगे. जिसने कैमरा चोरी नहीं की, इसके बावजूद वो नया कैमरा देने के लिए तैयार हैं तो कथित पीड़ित लेने वाला फरार है और उसे आगे कर कई लोग अपनी अपनी भड़ास निकालने में जुट गए हैं. किसी पत्रकार को इस तरह बदनाम और परेशान किए जाने की इस घटना की हर मीडियाकर्मी को निंदा करनी चाहिए क्योंकि ऐसे तो कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी को टारगेट कर लेगी और उसका जीना हराम कर देगी.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

मूल खबर यहां है- फ्रीलांस फोटोग्राफर का कैमरा छिनवा लिया दीपक चौरसिया ने!

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