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एक झटके में ही आडवाणी हुए रेस से बाहर!

भाजपा के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आज समापन होने जा रहा है। शुक्रवार को कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। इसमें भी पूरे समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की वाहवाही, बाकी सभी मुद्दों पर भरी पड़ी। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी पहले दिन से ही मोदी महिमा के बखान से शुरुआत की। इसके बाद तो यह सिलसिला लगातार बढ़ता ही रहा। कल से दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक शुरू हुई है। इसमें भी मोदी ही छाए रहे।

भाजपा के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आज समापन होने जा रहा है। शुक्रवार को कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। इसमें भी पूरे समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की वाहवाही, बाकी सभी मुद्दों पर भरी पड़ी। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी पहले दिन से ही मोदी महिमा के बखान से शुरुआत की। इसके बाद तो यह सिलसिला लगातार बढ़ता ही रहा। कल से दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक शुरू हुई है। इसमें भी मोदी ही छाए रहे।

राजनाथ सिंह ने जिस अंदाज में मंच पर मोदी को माला पहनाई, वह अपने में अभूतपूर्व माना जा रहा है। इस खुले अधिवेशन में देशभर से आए करीब 22 सौ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। ज्यादातर नेता मोदी का ही ‘भजन’ करते नजर आए। कई उत्साही कार्यकर्ताओं ने तमाम रोकटोक के बावजूद मोदी के पक्ष में नारे भी लगा डाले। दबाव यही रहा कि इसी अधिवेशन में मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए।

अपना महिमा मंडन देख-सुन कर मोदी लगातार मुस्कराते देखे गए। लंबे अरसे बाद यह पहला मौका है, जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री तीन दिन के अधिवेशन में पूरे समय हाजिर रहे। राजनाथ सिंह ने यह भी याद दिला डाला कि मोदी भाजपा के पहले ऐसे नेता हैं, जो लगातार भारी बहुमत से तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने में सफल रहे हैं। जबकि कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी ने मोदी को हरवाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा डाली थी। इसके बावजूद मोदी ने जीत का इतिहास बना डाला है। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के लिए वे अहम बन गए हैं। पार्टी नेतृत्व, मोदी के बारे में सभी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझ रहा है। ऐसे में इन भावनाओं का आदर जरूर किया जाएगा। अध्यक्ष के तौर पर वे सभी को इस बात का आश्वासन दे रहे हैं।

कल मंच पर ही उन्होंने माला पहनाकर मोदी का अभिनंदन किया था। इसी के साथ उन्होंने सभी का आह्वाहन कर दिया था कि सभी प्रतिनिधि खड़े होकर अपने लोकप्रिय नेता का स्वागत कर दें। अध्यक्ष ने माहौल में जोश पैदा करने की कोशिश की, तो कुर्सियों पर जमे बैठे प्रतिनिधियों ने खड़े होकर काफी देर तक तालियां बजार्इं और मोदी के पक्ष में नारेबाजी कर डाली। कई वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यदि पार्टी को अपनी जोरदार चुनावी हवा बनानी है, तो मोदी का नाम पीएम उम्मीदवारी के लिए तुरंत घोषित कर दिया जाए। बिहार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सीपी ठाकुर ने तो कार्यकारिणी की बैठक में भी मोदी के नाम की जमकर माला जपी थी। जिस अंदाज में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कार्यकारिणी से लेकर राष्ट्रीय परिषद में मोदी की सराहना की है, उससे सीपी ठाकुर काफी खुश नजर आए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक दशक के अंदर गुजरात का कायाकल्प हो गया है। इस राज्य ने विकास और सुशासन के नए मापदंड बना दिए हैं। सच्चाई तो यह है कि गुजरात का विकास पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है। नरेंद्र मोदी कुशल प्रशासक भी साबित हुए हैं। ऐसा शख्स देश की बागडोर संभाले, तो बात बन जाए। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद, राष्ट्रीय परिषद की बैठक में भी अपनी मोदी मुहिम जारी रखी। उनका कहना है कि बगैर किसी देरी के मोदी के नाम का ऐलान हो जाना चाहिए। यदि ऐसा किया गया, तो पार्टी को खास राजनीतिक फायदा मिलेगा। क्योंकि सभी ने देख लिया है कि देशभर से आए पार्टी प्रतिनिधियों ने एक स्वर से मोदी का ही नाम लिया है। यदि नाम का ऐलान हो जाता है, तो पार्टी को अंदरूनी कलह के तमाम मामलों से अपने आप राहत मिल जाएगी। क्योंकि मोदी के नाम का जादू पार्टी के कार्यकताओं में दूना उत्साह पैदा कर देगा।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी खुलकर मोदी की तारीफ करनी शुरू कर दी है। जबकि मोदी को लेकर उनका रवैया सवालों के घेरे में माना जाता रहा है। लेकिन मोदी के पैरवीकरों की संख्या बढ़ती देखकर उन्होंने भी यह बात स्वीकार कर ली है कि पार्टी के अंदर सबसे लोकप्रिय नेता मोदी हो गए हैं। जेटली ने एक मीडिया इंटरव्यू में यह बात स्पष्ट रूप से स्वीकार की है कि प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए वे सबसे मजबूत दिखाई पड़ते हैं। क्योंकि पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएं सबसे ज्यादा उनके साथ हैं। जेटली के इस नए रुख को भाजपा के हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के रुख को लेकर जरूर पार्टी की निगाहें टिकी हैं। क्योंकि इस अधिवेशन में सुषमा ने मोदी का महिमा मंडन नहीं किया। राजनाथ जैसे नेताओं की तरह उन्होंने यह भी नहीं कहा कि पार्टी में मोदी ही सबसे लोकप्रिय नेता हैं। उल्लेखनीय है कि सुषमा को भी पीएम उम्मीदवारी की रेस में माना जा रहा है। शिवसेना के प्रमुख बाल ठाकरे ने अपने आखिरी दिनों में कहा भी था कि सुषमा, भाजपा में सबसे काबिल नेता हैं। इस बयान के बाद पार्टी में यह बहस शुरू हो गई थी कि सुषमा का नाम आगे बढ़ा, तो मोदी का सपना अधूरा रह सकता है। वैसे भी उनके नाम को लेकर एनडीए के घटकों में एक राय नहीं है। खासतौर पर जदयू ने मोदी को लेकर अल्टीमेटम तक दे डाला है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कह चुके हैं कि सांप्रदायिक छवि वाले किसी नेता को वे अपना पीएम उम्मीदवार स्वीकार नहीं कर सकते। हालांकि, जेटली ने कहा है कि अभी जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा। पार्टी की कोशिश है कि जदयू से सहमति बनाकर ही चला जाए। वे खुद नीतीश कुमार के संपर्क में रहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि जदयू का साथ बना रहेगा।

गुजरात विधानसभा का चुनाव मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार भाजपा ने जीता है। इस जीत के बाद मोदी को केंद्रीय राजनीति में लाने का दबाव बढ़ा है। संघ नेतृत्व ने भी मोदी के पक्ष में दबाव बना दिया है। पार्टी के नए अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस अधिवेशन से साफ-साफ संकेत दे दिए हैं कि मोदी के मामले में उनका रुख पूरे तौर पर सकारात्मक है। पार्टी के बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर कई तरह के कयास लगते रहते हैं। चर्चा यह भी रही है कि ऐन वक्त पर ‘पीएम इन वेटिंग’ के लिए आडवाणी के नाम पर ही सहमति बनेगी। क्योंकि उनके नाम पर किसी घटक को ऐतराज नहीं हो सकता। उल्लेखनीय है कि 2009 के चुनावों में आडवाणी ही एनडीए के ‘पीएम इन वेटिंग’ थे। लेकिन इस चुनाव में हार के बाद संघ नेतृत्व के इशारे पर उन्हें ‘रिटायर’ करने की पहल तेज कर दी गई थी। लेकिन आडवाणी ने कभी नहीं कहा कि वे किसी रेस से बाहर हो गए हैं। ऐसे में उनको लेकर पार्टी में अटकलों का बाजार गरम बना रहा है।

लेकिन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अधिवेशन में कुछ ऐसे शब्द कहे जिससे कि एक झटके में ही आडवाणी ‘रेस’ से बाहर होते लगे। पार्टी अध्यक्ष ने कह दिया कि आदरणीय आडवाणी जी पार्टी में संकटमोचक की तरह हैं। वे हमेशा हमारे मार्गदर्शक बने रहेंगे। पार्टी हलकों में राजनाथ की इस टिप्पणी का यही निहितार्थ माना जा रहा है कि अब आडवाणी की भूमिका महज मार्गदर्शक की ही रहेगी। हालांकि, इस संदर्भ में पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता औपचारिक टिप्पणी करने को तैयार नहीं हुआ। पार्टी प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने यही कहा है कि नेतृत्व ने अधिवेशन में प्रतिनिधियों की भावनाएं समझ ली हैं। प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का फैसला सही समय पर संसदीय बोर्ड लेगा। ऐसे में राष्ट्रीय परिषद की बैठक में किसी को फैसले की उम्मीद करनी भी नहीं चाहिए।

बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं नीतीश सरकार के कैबिनेट मंत्री गिरिराज सिंह मोदी के धुर समर्थक माने जाते हैं। कार्यकारिणी की बैठक में उन्होंने जोर देकर कहा था कि अब मोदी के नाम का ऐलान हो ही जाना चाहिए। लेकिन शनिवार को उनकी प्रतिक्रिया यही रही कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जिस अंदाज में मंच पर मोदी का अभिनंदन किया है, उससे उन्होंने साफ-साफ संदेश दे दिया है। अब मोदी के नाम का ऐलान हो या नहीं, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता? इसी तरह की भावनाएं कोश्यारी सहित कई धुर मोदी समर्थकों ने व्यक्त की हैं। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कई राजनीतिक और आर्थिक प्रस्ताव भी रखे गए। प्रतिनिधियों ने यूपीए सरकार के खिलाफ अपनी राजनीतिक मुहिम चलाने के लिए रणनीतियों पर भी लंबी चर्चा की। राजनाथ ने जोर देकर यही कहा कि करप्शन ही ऐसा मुद्दा है, जिसे घर-घर तक पहुंचाकर कांग्रेस को निर्णायक शिकस्त दी जा सकती है। यह काम पार्टी ने शुरू भी कर दिया है। अब इसको बड़े स्तर पर शुरू किया जाए, तो 2014 का विजय लक्ष्य पाने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।

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