Mohammad Anas : ना हरगिज़ नहीं, इस्तीफ़ा और गिरफ़्तारी से शहीद ज़िया उल हक़ नहीं वापिस आयेंगे.. ना… हमें नहीं मंज़ूर तुम्हारी ये सारी दलीले. हम हैं ही कहां, गिनती के दस बीस पचास ही बन पाते हैं ज़िया के जैसे, बाकियों को तुम जब मर्जी स्टेशन और घरों की दिवारों के पीछे से जेलों की सलाखो के पीछे डाल देते हो! राजा भैय्या या उसके जैसे मुख्तार और शहाबऊद्दीनो ने जाने कितने को मारा होगा, क्या उन सबको वापिस ला पाओगे, शायद नही ..तो फ़िर क्यों करते हो ऐसा काम, क्यों जगह दी थी मंत्रीमंडल में… क्यों एक निर्दलीय को जो खुद जेल के भीतर रहता है, उसे जेल मंत्री बना देते हो…
ये प्रदेश की कानून व्यवस्था से मजाक नहीं था तो और क्या था… फ़िर जिस राजा पर अस्थान में मुसलमानो को चुनावी रंजिश का सबक सिखाने के लिये पूरा मोहल्ला फ़ूंक देने की ज़रुरत पड़ जाये, उस राजा भैय्या को आप अपने साथ चोपर मे घुमाते हैं, जिस राजा भैय्या के भय से पुलिस वाले अपना ट्रांसफ़र करवाये, उस राजा भैय्या को आप और ताकतवर बना देते हो, ताकि वर्दी वाले ही उसे सेल्य़ुट करें… आज़म खान साहब, आप तो आये थे पिछली बार हमारे मुहाने, रुआंसे हो कर पिछली बसपा सरकार के कारनामों का हवाला दे रहे थे, और कह गये थे कि अपनी नस्ल बचानी हो तो सपा को वोट दीजिये… देखिये ना साब, हमने दिया वोट, और आपके भेजे हुए 224 लोगों को चुन कर सत्ता की चाभी सौंप दी, आपने नस्ल और वंश को ही खत्म कर दिया, किस गलती कि सज़ा दी है मुलायम सिंह जी ने!
युवा पत्रकार और एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.






