सेवा में, प्रधान संपादक महोदय, भडास4मीडिया, विषय:- आपके पोर्टल पर चल रहे तथ्य विहीन खबर के संदर्भ में, महोदय, भड़ास4मीडिया पर एक ख़बर 'कहानी उस पत्रकार की इस प्रकार है' शीर्षक से प्रकाशित हुई है. इस खबर में जो तथ्य हैं, उसी से यह पता चल रहा है कि पूरी खबर व आरोप मनगढ़ंत है. खबर में बताया गया है कि मुझे छह महीने जेल में कटाने पड़े. जब 6 माह मुक़दमा पंजीकृत हुए ही नहीं हुआ तो मैंने छह माह जेल में कैसे बिता लिया? आपको एक बार शिकायती पत्र को पढ़ कर देखना चाहिए था कि क्या शिकायत करने वाला शख्स द्वेष से तो शिकायत नहीं कर रहा. उसने जो कई आरोप लगाये हैं उसका कोई तथ्य प्रमाण वह नहीं दे पाएगा क्योंकि वो सब झूठे हैं.
आपसे मैं आग्रह कर रहा हूँ कि मेरी भावनाओं को समझते हुए मेरी मदद करें जिससे तथ्यहीन शिकायतकर्ताओं का मनोबल न बढ़ सके. आज चार मार्च 2013 है और खबर में बताया गया है कि आठ अक्टूबर 2012 को मुक़दमा दर्ज हुआ. आप खुद ही विचार करें कि अभी पांच माह भी बीते नहीं हुआ फिर उसने यह आरोप कैसे लगा दिया कि मैं छह माह जेल काट कर आया हूं. और यह भी लिखा है कि आते ही मैंने फिर किसी का रेप भी कर दिया. सर प्लीज आप ऐसे गलत खबर को न चलायें जिससे कि किसी कि भावना को ठेस पहुंचे. आप उनसे आरोपों के समर्थन में प्रमाण मांगें. और अगर आपको लगे कि शिकायतकर्ता ने गलत शिकायत किया है तो आपसे निवेदन है कि पोर्टल पर चल रहे इस तथ्यहीन खबर को डिलीट करने की कृपा करें जिससे मेरी भावना को ठेस न पहुंचने पाए.
बताना चाहूंगा कि ठूठीबारी ग्राम सभा की पोखरी संख्या 903 पर ठूठीबारी के एक धनाढ्य व्यक्ति द्वारा व्यावसायिक काम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा था जिसे मैंने अमर उजाला में प्रकाशित कराया था. एसडीएम निचलौल ने मौके पर पंहुच कर काम पर रोक लगा दिया. चूंकि मामला ठूठीबारी ग्राम सभा के सबसे बड़े अमीरजादे का था तो उसने इस मामले को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया और तरह तरह के आरोप लगाने शुरू कर दिये. सीमा पर बसा क़स्बा होने के कारण यहाँ पर पत्रकारिता दूभर काम है. फिर भी मैंने 7 वर्षों तक निर्विरोध रूप से काम किया. जिस व्यक्ति द्वारा निर्माण कराया जा रहा था उसका करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जिससे वह काफी परेशान सा हो गया. जितने भी लोगों ने उक्त व्यावसायिक काम्प्लेक्स में रूम के लिए अडवांस दिए हुए थे, वे अपना पैसा वापस लेना शुरू कर दिए. जब मुझे वह किसी प्रकार से फंसा नहीं सका तो एक नशीली दवा के विक्रेता को अपना मोहरा बनाया जिसके खिलाफ मैंने दर्जनों बार समाचार प्रकाशित कराया है.
वह भी मौके की तलाश में बैठा था और अपनी बीबी को मोहरा बना आईजी गोरखपुर को वह अपनी बीबी को ले जा कर रोया गिड़गिड़ाया. आईजी गोरखपुर ने महिला की बात होने के कारण एसपी महाराजगंज को मामले की सत्यता की जाँच करा मुक़दमा पंजीकृत करने का आदेश दे दिया. मेरे खिलाफ कोतवाली में 08.10.2012 को आई.पी.सी. की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया और मैं इलाहाबाद चला गया और स्टे ले आया. मामला महाराजगंज सीजीएम कोर्ट में गया. वही मैंने खुली जाँच की मांग आईजी गोरखपुर सहित आला अधिकारियों से कर दी और सम्बन्धित प्रमाणों को संलग्न कर दिया. इस पर विवेचक को विवश होकर धाराओं को बदलना पड़ा. इन लोगों द्वारा विवेचना को भी प्रभावित कराया गया पर मैं अपने दिए प्रमाणों से आश्वस्त था कि एफआर लग जायेगा. पुलिस ने भी अपना काम किया. पुलिस पत्रकार के रिश्ते को आप मुझसे बहेतर जानते हैं.
पुलिस ने धाराओं को परिवर्तित करते हुए 417, 418 व 423 में आरोपित कर फाइल सम्मिट करा दिया. इसके बाद मुझे सीजीएम महाराजगंज द्वारा फाइनल बेल दे दिया गया. रही बात रेप की तो यह कहानी झूठी है. उनसे आप प्रमाण मांगे कि घटना कब की है और उस पंचायत में कौन कौन से लोग थे और रेप किसका हुआ था. नाम बदलकर बीमा के मामले में कहना चाहूंगा कि जब मैं किसी बीमा कम्पनी का एजेंट ही नहीं हूं तो बीमा करने का मुझे अधिकार किसने दे दिया. बीमा का एजेंट तो सहज का था और बीमा ओरिएण्टल से हुआ था. हां यह सच है की मैंने जिस डेट में रिसीप्ट श्री प्रभुनाथ को दी थी, सहज के द्वारा उस डेट पर पालिसी इशू नहीं कराई गयी. जिसका उन्होंने प्रमाण भी दिया है जिसे सम्मिट कर रहा हूँ. साथ में उनके बीमा की पालिसी भी.
अरुण कुमार वर्मा
पत्रकार
महराजगंज (यूपी)





