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लखनऊ

वो जो राजा भइया के पक्ष में नारेबाजी करते हैं…

Mohammad Anas : जहां एक ओर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, प्रतापगढ़, लखनऊ, अलीगढ़ और इलाहाबाद जैसे शहरों में शहीद डिप्टी एसपी ज़िया उल हक़ को इंसाफ़ दिलाने की मांग को लेकर कल देर शाम तक हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आये. वहीं इलाहाबाद विवि के छुटभइया किस्म के स्व-घोषित नेताओं ने, जिनमें ठाकुरों की संख्या अधिक है, शहीद सीओ ज़िया उल हक़ की हत्या की साज़िश में शामिल होने के आरोपी राजा भइया के समर्थन में नारेबाजी की तो दूसरी तरफ़ कुंडा में भी राजा ने अपने लोगों से प्रदेश सरकार के खिलाफ़ नारेबाजी करवाई.

Mohammad Anas : जहां एक ओर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, प्रतापगढ़, लखनऊ, अलीगढ़ और इलाहाबाद जैसे शहरों में शहीद डिप्टी एसपी ज़िया उल हक़ को इंसाफ़ दिलाने की मांग को लेकर कल देर शाम तक हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आये. वहीं इलाहाबाद विवि के छुटभइया किस्म के स्व-घोषित नेताओं ने, जिनमें ठाकुरों की संख्या अधिक है, शहीद सीओ ज़िया उल हक़ की हत्या की साज़िश में शामिल होने के आरोपी राजा भइया के समर्थन में नारेबाजी की तो दूसरी तरफ़ कुंडा में भी राजा ने अपने लोगों से प्रदेश सरकार के खिलाफ़ नारेबाजी करवाई.

यह दिखाता है कि हमारा समाज कितना बंटा हुआ है जो देश की रक्षा करने वाले वर्दीधारी को भी अपने फ़ायदे के लिये हिन्दू और मुसलमान की नज़र से देख लेता है. संविधान और समाज की रक्षा का प्रण ले कर शहीद होने वाले जांबाज़ ज़िया उल हक़ के लिये ना तो उन्हें बोलते हुए मैंने देखा जो नक्सली हिंसा के शिकार पुलिस अफ़सरों के लिये फ़ेसबुक को पाट देते थे और ना उन्हें दुख जताते और गर्व करते हुए देखा जो पिछले दिनो सीमा पर शहीद हुए सैनिकों के लिये लिख और बोल रहे थे. किस पतन की तरफ़ हम चल पड़े हैं, वो हम खुद ही देख ले, ना दिखे तो मुझे माफ़ करें क्योकि मैं आसमान पर रह कर समाज की बात नहीं बल्कि समाज में रह कर समाज की बात करता हूँ…

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कुंडा के शहीद सीओ ज़िया उल हक़ और उनकी पत्नी के लिये लिखने या बोलने वाले लोग किसी संगठन, दल या एनजीओ की थपथपी के मोहताज नही हैं, यह एक स्वत:स्फ़ूर्त सामाजिक प्रतिक्रिया है, और यह किसी सिंह, खान, तिवारी और मिसिरा की ज़िम्मेदारी नहीं है कि वो इसके खिलाफ़ लिखे और बोले. आप वर्मा, गुप्ता, यादव और अंसारी भी हैं तो लिख और बोल सकते हैं, क्योंकि जब तक कुंडा में हुई हिंसा के आरोपी खुले आम घूमेंगे, तब तक ना आप सुरक्षित हैं ना ही आपका परिवार, हां वही परिवार जिसे आप इंसान कहते हैं और गाहे बगाहे जिसके लहू के लाल होने की गारंटी देते फ़िरते हैं ..ज़िया उल हक़ के कातिल आज़ाद हैं, तब तक आप सबकी ज़िम्मेदारी है कि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिये मोहम्मद अनसआवाज़ बुलंद करते रहें…

लेखक मोहम्मद अनस युवा, तेजतर्रार और सरोकारी पत्रकार हैं. माखनलाल विश्विद्यालय के पत्रकारिता के छात्र रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक बोलने और लिखने के लिए जाने जाते हैं. सोशल मीडिया में खासे सक्रिय रहते हैं. उनका यह लिखा उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है.


मोहम्मद अनस का यह लिखा भी पढ़ सकते हैं…

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