Shambhunath Shukla : जामा मस्जिद के शाही इमाम मुलायम सिंह को सलाह दे रहे हैं कि अखिलेश की सरकार नाकारा है। ऐसा उन्होंने डीएसपी जियाउल हक हत्याकंाड में राजा भैया का नाम आने पर कहा। लेकिन मुस्लिम वोटों के ये सौदागर क्या बताएंगे कि अखिलेश जब राजा भैया को सरकार में मंत्री बनाए जाने को लेकर झिझक रहे थे तब मौलाना क्यों नहीं अखिलेश के बचाव में उतरे। तब क्यों राजा भैया को मंत्री बनने दिया। आज एक पुलिस अफसर की हत्या पर मौलाना इतने अधिक भावुक हो रहे हैं लेकिन छह जुलाई २०११ को मुरादाबाद के मैनाठेड़ी गांव में जब डीआईजी एके सिंह को भीड़ ने बेइंतहा मारा था तब मौलाना ने कोई बयान नहीं दिया था।
मौलाना उन आईपीएस जसबीर सिंह को क्यों नहीं याद करते जिसे कल्याण सिंह ने मिशन राजा भैया पर लगाया और जैसे ही राजा भैया ने कल्याण सरकार बचाई जसबीर को खुड्डे लाइन डाल दिया गया और जसबीर को आज तक अच्छी पोस्टिंग नहीं मिली। मायावती आज राजा भैया के मामले में संसद में हंगामा कर रही हैं लेकिन इन्हीं मायावती ने रामशिरोमणि पांडेय को बलि का बकरा बना दिया था और जब एक सड़क दुर्घटना में पांडेय मारे गए तो मायावती ने पूछा था कि ये रामशिरोमणि पांडेय कौन हैं? जियाउल हक की हत्या की निंदा करनी चाहिए और उनकी बेवा परवीन आजाद के प्रति संवेदना जतानी चाहिए लेकिन देखिए कि मौलानाओं, मीडियाओं और नेताओं ने उन्हें ऐसा घेर लिया है कि एक स्त्री अपने पति की दुखद मौत पर रो तक नहीं पा रही।
लेखक शंभूनाथ शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनके फेसबुक वाल से.





