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बज गया बैंड बाजा फिर भी भैया राजा बजाएगा बाजा

बहुत साल पहले ‘सच्चा झूठा’ फिल्म में राजेश खन्ना खूब झूम झूमते हुए कह रहे थे – ‘मेरी प्यारी बहनियां, बनेंगी दुल्हनियां, सज के आएंगे दूल्हे राजा, भैया राजा बजाएगा बाजा’… लेकिन यह गीत लिखते वक्त गीतकार इंदीवर, गाते वक्त किशोर कुमार और संगीत देते हुए कल्याणजी आनंदजी ने शायद यह कभी भी सोचा नहीं होगा कि आगे जाकर इस गीत के बोल दो भागों में बंट जाएंगे। एक भाग तो हमारी प्यारी बहन के लिए सदा लागू होता रहेगा, तो दूसरा रह रहकर राजनीति में रह रहे राजाओं पर रूप बदलकर फिट होता रहेगा।

बहुत साल पहले ‘सच्चा झूठा’ फिल्म में राजेश खन्ना खूब झूम झूमते हुए कह रहे थे – ‘मेरी प्यारी बहनियां, बनेंगी दुल्हनियां, सज के आएंगे दूल्हे राजा, भैया राजा बजाएगा बाजा’… लेकिन यह गीत लिखते वक्त गीतकार इंदीवर, गाते वक्त किशोर कुमार और संगीत देते हुए कल्याणजी आनंदजी ने शायद यह कभी भी सोचा नहीं होगा कि आगे जाकर इस गीत के बोल दो भागों में बंट जाएंगे। एक भाग तो हमारी प्यारी बहन के लिए सदा लागू होता रहेगा, तो दूसरा रह रहकर राजनीति में रह रहे राजाओं पर रूप बदलकर फिट होता रहेगा।

कुछ दिन पहले तक इस गीत के कुछ शब्द डीएमके के कोटे से केंद्र में मंत्री बनकर देश को लूटनेवाले ए राजा पर लागू हो रहे थे। राजा ने टेलीकॉम घोटाले में लाखों करोड़ रुपए का घोटाला करके देश का खूब बाजा बजाया। राजा की राजनीति का बैंड बज गया पर उसने तो बाजा बजा ही डाला। अब यह गीत एक बार फिर रूप बदल कर राजा का बाजा बजा रहा है।

मामला यूपी के एक राजा का है। ये हैं प्रतापगढ़ ज़िले के कुंडा के राजा रघुराज प्रताप सिंह यानी राजा भैया। कोई सोलह साल पहले उत्तर प्रदेश के तब के सीएम कल्याण सिंह ने कुंडा में कहा था – गुंडा विहीन कुंडा करो, ध्वज उठाय दोऊ हाथ। कल्याण सिंह की नाव तो उसके बाद से ही लगातार हिचकोले खाकर फिर से बीजेपी ते तट पर आ लगी है। मगर जिस आदमी को उन्होंने 1996 में समूल नष्ट करने का संकल्प लिया था, खुद कल्याणसिंह ने उसको बाद में अपनी ही सरकार में मंत्री बनाया और उसके बाद भी राजा भैया अलग अलग सरकारों में कई बार मंत्री बने।

अब वह एक बार फिर खबरों में है। एक डीएसपी की हत्या के बाद यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने उनको सरकार से चलता कर दिया है और जांच बिठा दी है। लेकिन न तो राजा भैया पर यह कोई पहला मामला है और न ही गुंडई की शुरूआत उनसे शुरू हुई।

दरअसल यह उनके खून में है। कोई पंद्रह साल पहले कुंडा थाने में राजा भैया और उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह के ख़िलाफ़ हत्या के बहुत सारे मामले दर्ज थे और उनका नाम इलाके के राजाओं में तो आता ही था, हिस्ट्री शीटरों में भी था। राजा भैया के पिता के बारे में पुलिस रिकॉर्ड बोलता है कि वे अपराधी गिरोह के सरगना थे हमेशा खतरनाक हथियारों से लैस रहते थे।

उदय प्रताप सिंह खुद राजीव गांधी और अमिताभ बच्चन वाले देहरादून के दून स्कूल में पढ़े थे, पर अपनी औलाद यानी राजा भैया को जब पढ़ाने की बारी आई तो यह कहकर विरोध में उतर आए कि पढ़ाई करने से उनका बेटा बुज़दिल हो जाएगा। मां ने विरोध के बावजूद पढ़ाया, पर दबंग बाप का सवा हाथ के कलेजेवाला यह बेटा बाप से भी बढ़कर दबंग निकला। राजा भैया 24 साल की उमर में पहली बार निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे और धमाके के साथ विधानसभा पहुंचे।

अगले चुनाव में तो हद तब हो गई जब यूपी के सीएम कल्याणसिंह उनके खिलाफ धुंआधार प्रचार करने उतरे फिर भी बीजेपी के उम्मीदवार को धूल चटाकर राजा भैया विधानसभा पहुंचे और कल्याणसिंह की सरकार में मंत्री भी बन गए। उनके दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह हिमाचल प्रदेश के पहले गवर्नर थे। जेल से लेकर महल तक के कई सफर करनेवाले राजा भैया घोड़ों के शौकीन हैं और महंगी कारें देखकर बच्चों की तरह खरीदने की जिद पर अड़ जाते हैं। अपराध की शायद ही कोई धारा रही हो, जो उन पर नहीं लगी।

राजा भैया और जेल के नजदीकी रिश्ते को देखकर ही अखिलेश यादव ने उनको जेल मंत्री बनाया। पर अब राजा भैया के जेल जाने की बारी है। राजनीति के राजा अकसर दूसरों का बाजा बजवाते रहे हैं, पर इस बार राजा भैया का बाजा बजता दिख रहा है। पर, इतिहास गवाह है कि हर मुश्किल के बावजूद यूपी की राजनीति राजा भैया के लिए जगह बना ही लेती हैं। भले ही जनता का बाजा बजे तो बजे, क्या फर्क पड़ता है।

लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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