Braj Bhushan Dubey : खामोश! राजा भइया का फूंका पुतला तो होगी एफआईआर। यह वाकया है गाजीपुर जनपद के बारा ग्राम का जो कैबिनेट मंत्री श्री ओम प्रकाश सिंह की विधानसभा में आता है। बारा में मंगलवार को कुछ जागरूक युवाओं ने राजा भइया का पुतला फूंककर विरोध जताया। पेपर में समाचार प्रकाशित हुआ। मामला पहुंचा स्थानीय मंत्री के यहां। भाई मंत्री जी के क्षेत्र में बिना उनकी अनुमति के पत्ता तक नहीं हिल सकता।
नागवार लगा, भौहें तन गयी तो स्टेशन अफसर की क्या मजाल जो एफआईआर दर्ज न करे। श्री इमरान खां, श्री इसरार, गुफरान सहित 6 लोगों को नामजद करते हुये 25 अन्य लोगों पर आईपीसी की धारा 143 व 153 के तहत अपराध पंजीकृत करा दिया। ये वही लोग हैं जिन्होंने श्री ओम प्रकाश जी को अपना मत यह कहते हुये नहीं दिया था कि आप जनप्रतिनिधि होने के लायक नहीं हैं।
Vrij Nandan Chaubey भारतीय लोकतंत्र की असली तस्वीर यही है, आजाद भारत के आजाद लोकतंत्र के 66 सालों के बाद की यह हालत है । भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) यह आज़ादी देता है कि अहिंसक तरीके से आप किसी का भी विरोध कर सकते हैं। लेकिन यह क्या है? माननीय मंत्री जी ! ज़रा उस बेवा के बारे में भी सोचिए!
Awanish Vijaya तब तो मंत्री जी अपना पुतला फुँकवाने लायक हो गए है!
Brijesh Jaiswal लोकतंत्र में अपना बात कहना भी गुनाह है वाह रे सपा सरकार
Manish Rai मेरे भाईयों मानव की संवेदना नष्ट यहोती जा रही है ! मानवता किसी कोने में मुह छुपाये रो रही है ! दर्द सबका एक जैसा होता है चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान!
xxxx
Braj Bhushan Dubey : रंको की नपुंसकता से ही पैदा होता है राजा जैसा दरिन्दा। ऐसे राजा केवल कुण्डा में नहीं गांव-गांव में हैं। सम्मानित साथियों। पुलिस उपाधीक्षक जियाउल हक की हत्या के बाद राजा पर अपराध तो दर्ज करा दिया शहीद की पत्नी परवीन ने, राजा ने मंत्रिमण्डल से त्याग पत्र भी दे दिया किन्तु उनकी गिरफतारी हो पायेगी, शहीद परिवार को न्याय मिल पायेगा, सम्भव नहीं लगता। आज जो न्यूज चैनलो पर कुण्डा विधान सभा के दर्जनो लोगों का बयान दिखाया गया वे सभी यही कह रहे थे कि राजा भइया निर्दोष हैं, वे बहुत अच्छे हैं आदि आदि। सभी के चेहरे देखने पर यह महसूश हो रहा था कि वे किस प्रकार ये बातें उपर से कह रहे हैं। उनके भीतर एक भय दीख रहा था कि यदि सही बात बोलोगे तो तुम्हारी रक्षा कौन करेगा, सोच लो। लोगों की इसी नपुंसकता ने जगह-जगह विधायक, सांसद, चेयरमैन, प्रमुख व प्रधान के रूप में राजा जैसे दरिनदों को पैदा किया है। हां जो आवाज उठायेगा उसकी न शासन सुनेगा और न प्रशासन। आवाज उठाने वालों का हश्र देखकर अब जगह-जगह रंकों/प्रजा ने राजा जैसे लोगों को स्वीकार करना अपनी नियति मान लिया है।
गाजीपुर के आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और सोशल व पोलिटिकल एक्टिविस्ट बृज भूषण दुबे के फेसबुक वॉल से.





