Mohammad Anas : इंदौर में पत्रिका अखबार के फोटोग्राफर रोहित त्रिवेदी के साथ सांघवी इंस्टीट्यूट (Sanghvi Institute) के वाइस प्रेसीडेंट (vice-president) ने मार पीट की है. इस घटना की रपट पुलिस ने sections 323 (causing bodily harm), 342 (wrongful confinement), 506 (criminal intimidation) and 34 of the Indian Penal Code में दर्ज़ करके जांच शूरू कर दी है. रोहित अपने साथी हैं और कानपुर से हैं. फ़िलहाल मध्य प्रदेश के अखबारों के आखिरी पेज तैयार हो गये होंगे.
मेरा निवेदन है पत्रकार साथियों से कि इस मामले को प्रमुखता से उठायें, बिना किसी लाग लपेट के ताकि पत्रकारों के साथ होने वाली बर्बरता पर अंकुश लगाया जा सके. रोहित त्रिवेदी को बहुत चोट आयी है. उनको दो घंटे तक बंद करके मारा गया, जब वो कालेज में हो रही काउंसलिंग को कवर करने गये थे. रोहित त्रिवेदी का नंबर 09685752599 है. उनसे बात करके घटना के बारे में विस्तार से पता किया जा सकता है.
Bikash K Sharma : Where is Press Freedom… Indore- A press photographer was thrashed mercilessly by the vice-president and other staff members of Sanghvi Institute when he tried to take photographs inside the premises on Thursday. The lensman, whose face and body was swollen as a result of injuries sustained during the attack, has been admitted to MY Hospital. He also allegedly lost his wallet and gold chain, during the fracas.
Anuj Pandey : दैनिक भास्कर ने इस मामले को पहले पन्ने पर जगह देना तो दूर, पूरी घटना का विवरण ही बदल कर रख दिया है. दैनिक भास्कर (इंदौर संस्करण) की रिपोर्ट (पृष्ठ 4) कुल तीन पैराग्राफ में है जिसका पहला हिस्सा यूं है…
''संघवी इंस्टीट्यूट मेँ युवक की पिटाई, दोनोँ पक्षोँ ने की शिकायत : राऊ स्थित संघवी इं. मेँ गुरूवार को एक युवक द्वारा हंगामा करने पर कतिपय लोगोँ ने पिटाई कर दी. युवक खुद को मीडियाकर्मी बताकर फोटो ले रहा था. कॉलेज प्रबंधन ने उससे परिचय पत्र मांगा तो बगलेँ झांकने लगा. इस दौरान झूमा झटकी मे उसे मामूली चोटे आई हैँ. उसे M. Y. मेँ भर्ती किया गया है. दोनो पक्षोँ ने थाने मेँ एक दूसरे के खिलाफ शिकायत की है.''
साथ ही यह भी लिखा गया है कि वह अनुचित तरीके से छात्राओँ के फोटो भी ले रहा था तथा गाली गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी (प्रतीक संघवी के मुताबिक). निस्संदेह यह भी किसी पत्रकार ने ही लिखा है. पत्रकार कम चाटुकार ज्यादा, इनसे क्या उम्मीद करेँ?
फेसबुक से.





