दैनिक जागरण के बारे में दुनिया जानती है कि इसके मालिकान जमकर माल कमाते हैं और अपनी पूरी टीम को मार्केट में लगाए रहते हैं ताकि कतरा कतरा निचोड़ा जा सके. दैनिक जागरण के मालिकों के इस रुख के कारण यहां बड़े पदों पर यानि मैनेजर, संपादक, चीफ रिपोर्टर, ब्यूरो चीफ आदि की कुर्सी पर ऐसे लोगों को बिठाया जाता है जो मालिकों के उगाही के विजन को अमलीजामा पहना सकें. इसी कारण चुनावों में दैनिक जागरण की संपादकीय टीम नेताओं को पेड न्यूज पैकेज के लिए पकड़ती है और चुनावी कवरेज के एवज में भारी भरकम राशि मांगती है.
इसी कारण पूरे साल भर तक दैनिक जागरण के मैनेजर, संपादक, चीफ रिपोर्टर आदि अपने अपने इलाके के शैक्षणिक संस्थानों से लेकर अन्य विभागों तक में दूहने का कार्यक्रम चलाते रहते हैं. जो मालिक के लिए उगाही करेगा, तो अपने लिए क्यों नहीं करेगा. सो, दैनिक जागरण से जुड़े ज्यादातर वरिष्ठ पदों पर आसीन लोग देखते ही देखते कई प्लाटों, मकानों आदि के मालिक बन जाते हैं और जल्द ही करोड़पति कहलाने लगते हैं.
दिल्ली में दैनिक जागरण से जुड़े एक महोदय, जो एक चीफ मैनेजर साहब के बड़े करीबी हैं, की चर्चा आजकल खूब हो रही है. उनके बंगलों, प्लाटों, मकानों की चर्चा मीडिया वाले खूब करते हैं. जाहिर है, चीफ मैनेजर साहब अपना कोटा पूरा कर लेने के बाद अपने नाते-रिश्तेदारों का पेट भरने में लगे हैं और इस सब पर मालिक लोग इसलिए मौन रहते हैं क्योंकि उगाही का बड़ा माल तक उनके पास पहुंच ही जाता है और वे खूब जानते हैं कि जो उनके लिए उगाही करेगा, थोड़ा बहुत अपने लिए भी करेगा.
ऐसे ही पता चला है कि दैनिक जागरण की एक यूनिट में एक चीफ रिपोर्टर अपनी पत्नी के नाम एक न्यूज वेबसाइट प्रारंभ कर चुका है. कोई भी बड़ी घटना की सूचना मिलती है तो सबसे पहले वो चीफ रिपोर्टर अपनी वेबसाइट अपडेट कराता है, उसके बाद अपने बासेज को सूचित करता है. चीफ रिपोर्टर को फील्ड में कहीं कोई क्लाइंट या बकरा या पार्टी नजर आई तो वह तुरंत उससे माल निकलवा लेता है, दैनिक जागरण के लिए नहीं, अपनी वेबसाइट के लिए. चीफ रिपोर्टर पर कोई उंगली भी नहीं उठा सकता क्योंकि उतने पैसे का वह विज्ञापन अपने साइट पर दिखा देता है और जागरण में निगेटिव खबर छापने से बचा लेता है.
तो, कमाने का यह फार्मूला आजकल दैनिक जागरण में खूब हिट हो रहा है. इसके चर्चे चहुंओर हैं. और, कहने वाले कहते हैं कि जागरण में काम करने वाला आखिर कमाए क्यों नहीं क्योंकि वह देख रहा है कि उसके उपर वाले मालिक से लेकर मैनेजर-संपादक तक सिर्फ एक ही धुन लगाए रहते हैं, विज्ञापन वसूली बढ़ाओ, राजस्व बढ़ाओ, टारगेट पूरा करो, टर्नओवर बढ़ाओ… उन्हें इससे कोई मतलब नहीं कि उनका ब्यूरो चीफ किस तरीके से टारगेट पूरा करता है. यही वजह है कि जागरण के जिले जिले के ब्यूरो चीफ टारगेट पूरा करने के साथ साथ अपने निजी टारगेट भी खूब पूरा करते हैं और इसके लिए कोई न कोई रास्ता निकाल लेते हैं. (कानाफूसी)






