: कानाफूसी : लखनऊ से एक महत्वपूर्ण सूचना आई है कि बाबूलाल कुशवाहा एंड कंपनी ने जनसंदेश टाइम्स को ठिकाने लगा दिया है. इस हिंदी दैनिक को अब गीता प्रेस के मालिकों को बेच दिया गया है. गीता प्रेस के मालिक पोद्दार हैं जिनकी तीसरी पीढ़ी का एक नवयुवक बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर इस अखबार का संचालन करने लगा है. नाम है अनुज पोद्दार. सूत्रों के मुताबिक घपलों-घोटालों से बनाई गई अकूत संपत्ति का बाबूलाल कुशवाहा एंड कंपनी ने जमीन बनाने, संपत्ति खरीदने, अखबार खोलने आदि कई कामों में लगाया. अब जबकि घोटाले के चक्कर में बाबूलाल सत्ता और बसपा से बाहर किए जा चुके हैं, उनके लोग संपत्तियों को बेचने में जुटे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा कैश साथ में रखा जा सके. इसी के तहत जनसंदेश टाइम्स को बेच दिया गया है.
सीबीआई जांच के लपेटे में आए बाबूलाल कुशवाहा को उनके करीबियों ने सलाह दे दी थी कि आप अपनी सारी संपत्तियों से खुद को अलग कर लें ताकि जांच आदि में फंसने पर नुकसान कम से कम हो. इसी वजह से काली कमाई से खरीदी गई जमीन और खोले गए अखबार को बेचने का काम शुरू कर दिया गया है. यह सबकुछ बेहद गुपचुप ढंग से किया जा रहा है. बाबूलाल कुशवाहा के प्रत्यक्ष नियंत्रण से अखबार के हट जाने और नए मालिक के हवाले हो जाने से स्टाफ के ढेर सारे लोग खुश हैं लेकिन आशंका बस यही है कि काली कमाई से खड़े किए गए अखबार को गीता प्रेस के मालिकान सात्विक बनाकर बचा पाएंगे, यह तय नहीं है.
कुछ लोगों का कहना है कि बिक्री की बात पूरी तरह सच नहीं है. सिर्फ अंडरस्टैंडिंग हुई है बाबूलाल और पोद्दार के बीच. इसी के तहत पोद्दार के हाथों कंपनी व अखबार का संचालन दे दिया गया है. पर्दे के पीछे से अखबार बाबूलाल के एजेंडे पर काम करता रहेगा. सूत्रों के मुताबिक बाबूलाल को सत्ता और बसपा से हटाए जाने के दिनों में अखबार ने मायावती सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना लिया. शशांक शेखर, नसीमुद्दीन समेत कई बसपाई अफसरों नेताओं की पोल खोलने में यह अखबार जुट गया. इस कारण भी अखबार पर जबरदस्त दबाव पड़ा और अखबार को बाबूलाल को बेचना पड़ा. कुल मिलाकर कई तरह की चर्चाएं हैं. क्या सच है और क्या झूठ, इस बारे में जनसंदेश टाइम्स से जुड़ा कोई भी व्यक्ति मुंह खोलने को तैयार नहीं है.
जनसंदेश टाइम्स में कार्यरत लोग इस बात से जरूर आशंकित हैं कि कहीं बाबूलाल के गिर रहे ग्राफ की चपेट में यह अखबार भी न आ जाए. एक समय में बसपाई अखबार के नाम से प्रसिद्ध जनसंदेश टाइम्स अब बसपा के विरोध में खड़ा हो गया है तो सरकार में बैठे लोग बाबूलाल और अखबार का इलाज करने की साजिशें रच रहे हैं. इन साजिशों की चपेट में आने से कितने दिन अखबार बच पाएगा, यह कहना मुश्किल है. उधर, गीता प्रेस के मालिकों पोद्दार के बारे में भी चर्चा शुरू हो गई है कि धार्मिक व सात्विक किताबों की बिक्री में लगे रहे ये लोग अपनी अच्छी छवि को मटियामेट करने के लिए एक कलंकित अखबार को गले लगा रहे हैं. कहीं इस अखबार से उनकी अब तक की बनी बनाई अच्छी छवि का सत्यानाश न हो जाए.
लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजी गई सूचनाओं पर आधारित. कानाफूसी कैटगरी की खबरें चर्चाओं-गासिप पर आधिरत होती हैं जिसमें सच्चाई का अंश संभव भी है और नहीं भी. इसलिए पाठक अपने स्तर पर इन चर्चाओं की पुष्टि जरूर कर लें. अगर आपको इस चर्चा में कोई कमी-बेसी नजर आती है तो अपनी राय टिप्पणी नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में दर्ज कर सकते हैं या फिर [email protected] पर मेल कर सकते हैं.





