तनहाइयों पर गाया मुबारक बेगम का बेहद मकबूल गीत सुनने के दौरान ये कतई नहीं लगता कि ये गायिका भी एक दिन तनहाइयों के आगोश में समा जाएंगी और वहां सिवाय अंधेरे के कुछ न तलाश पाएंगी. वो तो भला हो फेसबुक का, जहां खुर्शीद अनवर नामक एक साथी ने मुबारक बेग़म से बातचीत के बाद उनकी खराब माली हालत और गर्दिश के दिन के बारे में अपने वॉल पर लिखा व लोगों से मदद की अपील की. कुछ अन्य साथियों ने उनके स्टेटस को शेयर किया. इस न्यूज, पहल को भड़ास ने समग्रता के साथ दुनिया के सामने पेश किया.
फिर शुरू हुई मुबारक बेग़म की खैर-ख़बर लेने की गंभीर कवायद. मुंबई मिरर न्यूजपेपर से विकी ललवानी का फोन मेरे
पास आया कि मुबारक बेग़म से संपर्क करने का कोई नंबर मिल जाए. मैंने खुर्शीद अनवर से बात की और उन्हीं का नंबर मुंबई मिरर वाले रिपोर्टर को दे दिया. सहाना मीडिया के डायरेक्टर वाहिद अली खान ने खुब ब खुद संज्ञान लेते हुए मुझसे कहा कि मुबारक बेगम साहिबा का कोई करीबी हो तो कहिए मुझसे बात कर ले. मैंने फिर खुर्शीद अनवर साहब को नंबर देते हुए कहा कि आप वाहिद जी को रिंग कर लें. वाहिद ने निजी तौर पर ग्यारह हजार रुपये का चेक मुबारक बेग़म को भेजा और मुंबई के अपने करीबी व समृद्ध साथियों को मुबारक बेग़म की मदद के लिए प्रेरित किया.
सबसे बड़ा काम 'इंडिया न्यूज' चैनल ने किया. दीपक चौरसिया के एडिटर इन चीफ बनने के बाद इस चैनल की दशा-दिशा एकदम से बदल गई है. राणा यशवंत जैसा प्रोफेशनल जर्नलिस्ट, जो खुद संवेदनशील कवि भी हैं, मुबारक बेग़म के लिए चिंतित हुआ और अपनी टीम को मुबारक बेग़म की जिंदगी पर विशेष प्रोग्राम बनाने के लिए लगा दिया. इंडिया न्यूज की मुंबई टीम के कई साथी इस काम में लगे. मुबारक बेग़म का इंटरव्यू किया. उनसे बहुत कुछ पूछा और बेगम साहिबा ने सबका भरपूर और खुल के जवाब दिया. बाद में महिला दिवस पर मुबारक बेगम की हालत पर कई महिलाओं के साथ एक विशेष परिचर्चा की गई जिसमें मुबारक बेग़म को भी मुंबई से लाइव रखा गया.
इंडिया न्यूज चैनल के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद असर ये हुआ कि सुषमा स्वराज से लेकर कई नेताओं और मशहूर हस्तियों ने मुबारक बेगम की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्हें मदद के लिए गंभीर प्रयास करने का वचन दिया. कहने का आशय ये कि अकेले भी बहुत कुछ हो सकता है, अगर करने की ईमानदार मंशा और जज्बा हो. खुर्शीद अनवर ने अकेले ही शुरुआत की और फिर संवेदनशील लोगों का कारवां बनता गया.
कई अन्य चैनलों, अखबारों, लोगों ने भी मुबारक बेग़म की मदद की होगी और जरूर की होगी, उन सभी को सलाम करता हूं. ये अलग बात है कि मुझे उन सभी लोगों के बारे में नहीं पता, जिन जिन लोगों ने निजी या संस्थान के तौर पर मुबारक बेग़म की किसी न किसी रूप में मदद की है.
इंडिया न्यूज पर मुबारक बेग़म बोल पड़ीं कि मुझे फिर से मेरे चाहने वालों का प्यार मिलने लगा है, इससे बड़ी खुशी की बात क्या होगी. मुबारक बेग़म ने अपनी हालत के बारे में बताया कि वे कैसे किससे कहें कि उन्हें क्या क्या दिक्कत है. पैसे के चकाचौंध में हर कोई अपने में लीन है. एक जमाने में बहुत पापुलर थी मैं, जनता को मेरे गीत बहुत पसंद थे, लेकिन पैसे का चकाचौंध के आगे धीरे धीरे मेरा जीवन अंधेरे की तरफ बढ़ता चला गया.
मुबारक बेग़म का इंटरव्यू देखते हुए एक चीज शिद्दत से समझ में आई कि ये महिला बेहद गैरत वाली हैं, संजीदा हैं. मुबारक बेग़म सिर्फ इकलौती कलाकार या पत्रकार या नागरिक नहीं हैं जो जीवन के उत्तरार्द्ध में अकेलेपन, गरीबी और डिप्रेशन की शिकार हैं. ऐसे बहुत लोग हैं.
हमारी आपकी कोशिश रहनी चाहिए कि अपनी जवानी के दिनों में हम उन बुजुर्गों की जरूर चिंता करें जिन्होंने अपने वक्त में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम किया, देश-दुनिया-समाज को किसी भी रूप में कुछ किया. तभी तो हम अपने बुढ़ापे में उम्मीद रख सकेंगे कि कोई मेरे जैसा नौजवान जरूर होगा जो मेरी फिक्र करेगा. पूरी दुनिया एक परिवार है. इसलिए सबकी चिंता हर एक को होनी चाहिए. इस काम में मीडिया का बहुत बड़ा रोल है. इंडिया न्यूज चैनल समेत उन सभी अखबारों और चैनलों को बधाई जिन्होंने हम लोगों की पहल के बाद पूरे प्रकरण को प्रमुखता से अपने यहां शाया किया.
मुबारक बेगम का गाया और बेहद मकबूल ''कभी तनहाइयों में…'' सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…
http://bhadas4media.com/video/viewvideo/685/mubark-begum-kabhi-tanhaiyon-mein-yun.html
मुबारक बेग़म की हालत से संबंधित पहली पोस्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
http://bhadas4media.com/article-comment/9157-2013-03-04-09-02-26.html
यशवंत
एडिटर, भड़ास4मीडिया
यशवंत
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