छत्तीसगढ़ में एक कोरिया जिला है. वहां के एक सरकारी अफसर की डायरी का एक पन्ना मनीष सोनी नामक एक नौजवान, जो कि खुद पत्रकार भी है, ने चोरी से फाड़ लिया और उसे अब फेसबुक पर डाल दिया है. उस डायरी के पन्ने को यहां आपके सामने पेश किया जा रहा है, जो नीचे है. मनीष सोनी ने डायरी का पन्ना फेसबुक पर डालते हुए एक-दो पैरे में अपनी बात भी कह दी है, जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि भ्रष्ट पत्रकारों को लेकर कुछ एक नौजवान पत्रकारों में किस तरह का गुस्सा है.
सरकारी अफसर के डायरी का पन्ना और मनीष सोनी लिखित अपनी भड़ास इस प्रकार है…

Manish Soni : जिसे बुरा लगे वो लाईक न करे और जिसे ज्यादा बुरा लगे कृपया वो सफाई देने की जहमत न करे
…कोरिया जिले के कुछ कथित चोट्टे किस्म के "खर पतवारों" की ये वो लिस्ट है जिसे जिले के एक सरकारी विभाग के डाइरेक्टर ने अपने याददाश्त के लिए (कि उन्होंने 500 रुपये और 1000 हजार रुपये किसे-किसे दिया) अपनी निजी डायरी में लिख रखा था. गलती से डायरी को मैंने चुरा लिया. चोरी इसलिए की ताकि रायपुर में बैठे तमाम समाचार चैनलों के स्टेट हेड और कुछ ऐसे भी स्टेट स्टोपर जिन्होंने अपनी पॉलिसी के तहत चैनल की ''आईडी' 'बेची है, अब उन्हें भी पता चले की उनके शागिर्द आईडी खरीद कर क्या कर रहे हैं. प्रदेश की राजधानी में बैठे ब्यूरो से मेरा आग्रह है कि यहाँ के भोले भाले ग्रामीणों को पत्रकार बनाने के नाम पे झांसा देकर उन्हें इस तरह से भीख मांगने को मजबूर न करें. या उन्हें इतनी ट्रेनिग दें कि कम से कम मांगने के बाद मिलने वाली रकम इनके जमीर को जिन्दा रखने में मददगार हो. डायरी के पन्ने में लाल घेरा इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए है और पीले घेरे में कैद हैं यहां के बड़े-बड़े अखबार के जिला प्रतिनिधि.






