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महिलाओं द्वारा “पलटकर जवाब” देने का मतलब है कि…

Manisha Pandey : महिला दिवस के दिन मैं एक प्रोग्राम में गई थी। यह प्रोग्राम उन औरतों पर था, जिनके मुंह पर मर्दों ने तेजाब फेंक दिया था। जानते है क्‍यों? नहीं जानते तो मैं बताती हूं।

1- एक साठ 65 साल का आदमी एक 17 साल की लड़की से शादी करना चाहता था। लड़की ने मना किया तो बुड्ढे ने उसके मुंह पर तेजाब फेंक दिया। तेजाब गले में चला गया और लड़की की आवाज ताउम्र के लिए जाती रही।

2- एक औरत लड़के ने 20 साल की एक लड़की के मुंह पर तेजाब फेंक दिया क्‍योंकि उसने उस लड़के के प्रणय निवेदन को अस्‍वीकार कर दिया था।

3- एक लड़की के मुंह पर तेजाब इसलिए फेंका गया क्‍योंकि वो अपने साथ हो रही छेड़खानी का विरोध कर रही थी।

4- एक लड़की के मुंह पर इसलिए तेजाब डालकर उसे बदशक्‍ल और अंधा कर दिया गया क्‍योंकि वो अपने पति से तलाक मांग रही थी।

5- इन सारी लड़कियों के मुंह पर, ऐसी सैकड़ों-हजारों लड़कियों के मुंह पर, हिंदुस्‍तान की, पाकिस्‍तान की, बांग्‍लादेश की, इस देश की, उस देश की और हर देश की लड़कियों के मुंह पर तब-तब तेजाब फेंका गया, जब-जब उन्‍होंने मर्दों की सत्‍ता को, उनकी बेलगाम ताकत को चुनौती देने की कोशिश की। जब भी उन्‍होंने सिर झुकाकर बात मानने से इनकार कर दिया, जब भी उन्‍होंने पलटकर जवाब दिया। जब भी उन्‍होंने ताकत को चैलेंज किया।

– तुम पलटकर जवाब दोगी, हम हमारे मुंह पर तेजाब फेंक देंगे।
– तुम हमें चुनौती दोगी, हम तुम्‍हें अंधा कर देंगे।
– तुम हमारी बात नहीं मानोगी, हम तुम्‍हें जला डालेंगे।

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मेरी दादी अक्‍सर कहा करती थीं कि लेखपाल शुक्‍ला की बीवी बहुत पिटत है, काहे कि चार गज के तो ओकर जबान चलत है। मैंने अक्‍सर औरतों को यह कहते सुना है कि उन्‍हीं औरतों के पति उन पर हाथ उठाते हैं, जो पलटकर जवाब देती हैं। औरत चुप मार जाए, कुछ जवाब न दे तो पति क्‍यों मारेगा उसे। दादी का भी बहुत क्‍लीयरली ये मानना था कि उन्‍हीं औरतों को घर में मार पड़ती है, जो पलटकर जवाब देती हैं।
"पलटकर जवाब"?…. "पलटकर जवाब" देने का क्‍या मतलब होता है….
– "पलटकर जवाब" देने का मतलब है कि आपकी बकवास को सिर झुकाकर, चुपचाप न सुनते और न सहते रहना।
– "पलटकर जवाब" देने का मतलब है कि आप जो बोल रहे हैं, उसका जवाब मेरे पास है। आपके तर्कों का प्रतितर्क भी मेरे पास है।
– "पलटकर जवाब" देने का मतलब है कि मुझे जवाब देना आता है।
– "पलटकर जवाब" देने का मतलब है कि अगर आप सुना रहे हैं तो सुनना भी सीखिए।
– "पलटकर जवाब" देने का मतलब है कि तुम कोई सारे संसार से ऊपर तो हो नहीं कि कुछ भी बकते रहोगे और मैं सिर झुकाकर सुनूंगी।
– "पलटकर जवाब" देने का सीधा सा मतलब है ताकत को चुनौती देना। सत्‍ता का प्रतिकार करना। ताकत मर्दों की है, सत्‍ता भी मर्दों की है। जब जवाब का जवाब नहीं दे पाते, जब तर्कों से प्रतिकार नहीं कर पाते तो हाथ उठाते हैं। पीटने पर उतारू हो जाते हैं।
मेरी दादी जब तक जिंदा रहीं, मुझे यही सिखाती रहीं कि अगर मुझे लेखपाल की बीवी की तरह नहीं पिटना है तो अपनी कैंची जैसी जबान पर लगाम रखनी चाहिए। कभी बहस नहीं करनी चाहिए। किसी को भी पलटकर जवाब नहीं देना चाहिए, खासकर मर्दों को। उस भाई को भी नहीं, जो मुझसे उम्र में छोटा है और दुष्‍ट हरकतों से बाज नहीं आता।
हर आदमी मुंह पर एसिड नहीं फेंकता, हर औरत का मुंह जलाया नहीं जाता, सौ में से सौ औरतें पिटती भी नहीं हैं, लेकिन जो भी पिटती हैं, जिनके भी मुंह पर तेजाब फेंका जाता है, उन सबको एक ही बात की सजा मिलती है – "पलटकर जवाब" देने की।

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मैं एक पढ़ी-लिखी, आत्‍मनिर्भर, नौकरी करने, अकेले रहने, आजाद, बिंदास जिंदगी जीने वाली लड़की हूं। मैं अब भी उन लाखों-करोड़ों लड़कियों में से हूं, जिसका चेहरा एसिड से बदशक्‍ल नहीं हुआ। जिसके साथ गैंग रेप नहीं हुआ। लेकिन इसका ये मलतब नहीं कि हम खुश और बेफिक्र जीते हैं। हमें यकीन है कि ऐसा कभी हो नहीं सकता। नहीं। हम भी कहीं-न-कहीं अपने दिल के सबसे गहरे, छिपे कोने में इस डर में जीते हैं कि कभी, कहीं, किसी दिन ऐसा हो न जाए।
कभी कोई मुंह पर एसिड न फेंक दे। कभी कहीं कोई रेप न कर दे।

मेरी मां सड़क पर छेड़खानी का एग्रेसिव विरोध करने पर इसीलिए डरती थीं। लड़कों का क्‍या भरोसा। वो कुछ भी कर सकते हैं। मेरा दोस्‍त मुझसे कई बार इस बात पर लड़ चुका है कि पब्लिकली छेड़खानी या ऐसा कुछ गलत होने पर ज्‍यादा लड़ा मत करो। मेट्रो के लेडीज डिब्‍बे में आदमी घुसे आ रहे हैं तो चुपचाप किनारे हो जाओ। उनसे भिड़ो मत। उसे भी यही डर सताता है कि लड़के कुछ भी कर सकते हैं। तुम घर में अकेली रहती हो। अकेले आती-जाती हो। क्‍या मालूम, कोई पीछा कर ले। तुम्‍हारा घर पता कर ले। मार डाले, एसिड फेंक दे, रेप कर दे। कुछ भी हो सकता है। प्‍लीज, मत लड़ा करो। ऑफिस में भी एक कुलीग ने एक दिन कहा कि मर्दों को जवाब मत दिया करो। क्‍या करना है। चुपचाप वहां से आगे बढ़ जाओ। मैं जानती हूं, मेरी मां क्‍यों डरती है। मेरा दोस्‍त क्‍यों डरता है। मुझे प्‍यार करने वाले सब लोगों को मेरी एग्रेसिवनेस से डर क्‍यों लगता है। बावजूद इसके कि वो जानते हैं कि मैं सही हूं, वो मुझे ही चुप रह जाने की सलाह देते हैं। वो जानते हैं कि सुरक्षित रहना है तो लड़की को ही अपना मुंह बंद रखना होगा।

इंडिया टुडे की फीचर एडिटर मनीषा पांडेय Manisha Pandey के फेसबुक वॉल से.

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