Anand Pradhan : नरेन्द्र मोदी ने आज 'धर्मनिरपेक्षता' की परिभाषा दी कि 'इंडिया फर्स्ट'. मोदी के मुताबिक, हर धर्म-विचार से देश पहले और ऊपर है. सवाल है कि मोदी किस 'इंडिया' की बात कर रहे हैं? बहस का मुद्दा तो यही 'आइडिया आफ इंडिया' का है.. क्या मोदी का 'इंडिया' उससे अलग है जो आर.एस.एस की शाखाओं में 'नमत्से सदा वत्सले मातृभूमि…' गाते हुए भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने के संकल्प के साथ दोहराई जाती है? यह रही वह पूरी प्रार्थना जो संघ की शाखाओं में 'राष्ट्रगीत' की तरह गाई जाती है जो देश को 'हिंदू राष्ट्र' घोषित करती है:
“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।१।।
प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।२।।
समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम् ।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् ।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।३।। “
साफ़ है कि 'इंडिया फर्स्ट' के नाम पर आरएसएस के सांप्रदायिक-फासीवादी 'हिंदू राष्ट्र' को बेचने की कोशिश की जा रही है… जागो देशवासियों जागो….
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके और वर्तमान में आईआईएमसी के प्रोफेसर आनंद प्रधान के फेसबुक वॉल से साभार.






