वन माफिया कुछ इस कदर तराई के जंगलों को वीरान करने में लगे हुए हैं कि आने वाले दिनों में महाराजगंज से हरियाली विलुप्त सी हो जाएगी। जंगल की बेशकीमती साखू व सागौन की लकड़ियों को चंद रुपयों के लिए विभागीय साठगांठ से गैर जनपदों को पहुंचाया जा रहा है। खाकी भी इन वन माफियाओं की सरपरस्त होती दिख रही है। रविवार की घटना को देखकर इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है किस कदर पैसों की लालच में जनपद के हरियाली को बेंचा जा रहा है!
मामला है फरेन्दा वन रेंज के सदर, परागपुर, घोड़सारे बीट सहित अन्य जगहों का। जहां से आये दिन लकड़ी चोर पेड़ों को काट कर आरा मशीनों पर पहुंचा रहे हैं, वही उसके बाद वे पिकप व अन्य साधन के सहारे सीमावर्ती जनपदों मेंहदावल, बस्ती, सिद्धार्थनगर सहित गोरखपुर भेज दिया करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि इस कार्य की जानकारी पुलिस व वन विभाग के लोगों को नहीं है। यह सारा काम उनके ही इशारों पर किया जाता है, पर जब भी उनसे इस मुद्दे पर बात की जाती है तो वे अनभिज्ञता जाहिर करते हैं। रविवार की इस घटना से तो यही प्रतीत होता है कि इस पूरे खेल में विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है।
रविवार को साखू की लकड़ी लदी पिकप फरेन्दा कस्बे से होते हुए निकली। इसी दौरान फरेन्दा कस्बे में ड्यूटी कर रहे दो सिपाहियों ने उस पिकप को रोक लिया। सूत्रों की माने तो यह लकड़ी अवैध तरीके से बिना परमिट के ही पन्नी से ढक कर ले जाई जा रही थी। लेकिन, पुलिस कर्मियों ने उक्त पीकप को रोक उनसे धनउगाही कर हरी झण्डी दे दी। उक्त पिकप के बारे में थानाध्यक्ष फरेन्दा अनिल सिंह व रेंजर रामजीयावन प्रसाद ने भी अनभिज्ञता जताई है। अब ऐसे में सवाल यह खड़ा हो गया है कि जब विभाग को यह पता ही नहीं तो किसके इशारे इस काम को अंजाम दिया जा रहा है! कही न कही इसमे विभाग सहित अन्य दागदार नजर आते दिख रहे हैं।
महाराजगंज से अरुण कुमार वर्मा की रिपोर्ट.





