करीब एक साल पहले दिल्ली, एनसीआर में हलचल तेज़ हुई। ये हलचल थी मीडिया से जुड़े लोगों के बीच। मीडिया कर्मियों को जैसे ही इस बात के बारे में जानकारी मिलनी शुरू हुई कि अल्फा नाम से कोई नया चैनल आ रहा है हर कोई इसकी जानकारी जुटाने लगा। इस चैनल के बारे में उस वक्त ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं थी। जानकारी उन तक ही पहुंच पा रही थी जिनका करीबी मीडिया में अच्छे पद पर है।
कुछ महीने बाद ये जानकारी आई कि अल्फा चैनल के लिए रिक्रूटमेंट शुरू हुई है और सीपी में एक बिल्डिंग में चैनल का दफ्तर खोला गया। अब तक इस चैनल में वरिष्ठ पदों पर कुछ लोगों को रखा जा चुका था। यही लोग रिक्रूटमेंट का सारा काम देख रहे थे। जो लोग सीपी में बने अल्फा के ऑफिस में नौकरी की तलाश में पहुंचे, उन्हें रिटेन प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ा। रिटेन भी ऐसा की उसे सॉल्व करने में अच्छे अच्छे हिल जाएं। उस वक्त काफी लोगों ने सीपी के अल्फा ऑफिस में नौकरी के लिए रिटेन दिया। रिटेन के स्टैंडर्ड को देखकर लगा कि वाकई अल्फा कोई कमाल का चैनल आ रहा है।
कुछ महीने बाद एमिटी यूनिवर्सिटी के पास चैनल की बिल्डिंग बनने की खबरें आने लगी। धीरे धीरे मालूम हुआ कि सीपी में जिन लोगों ने रिटेन दिया था उनमें से कुछ के अपोइंटमेंट लेटर जारी कर दिए गए हैं। लेकिन इसके बाद सारा काम एमिटी ऑफिस से ही होने लगा। अब तक मीडिया जगत में अल्फा नाम से कोई चैनल आ रहा है इस बात की चर्चा जोरों से होने लगी। बड़े बड़े चैनल में काम कर रहे लोगों के मन में इस चैनल से जुड़ने की लालसा होने लगी। चैनल के साथ कुछ जाने पहचाने चेहरे और जुड़े तो इसका नाम नेशन टुडे रख दिया गया। इससे पहले की चैनल ऑन एयर हो पाता, नाम को लेकर पंगा हो गया। काफी खींचतान के बाद इस चैनल का नाम नेशन टुडे से बदलकर न्यूज़ नेशन कर दिया गया।
न्यूज़ नेशन नाम के इस चैनल को ऑन एयर हुए महीने भर से ऊपर का वक्त हो चुका है लेकिन फीडबैक अभी भी ज़ीरो ही मिल रहा है। इस चैनल से कई बड़े चेहरे अलविदा कह चुके हैं। जबकि चैनल के कई लोग चोरी चुपके अपने अलग रास्ते तलाश रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि न्यूज़ नेशन की हालत कहीं वीओआई जैसी तो होने वाली नहीं है। अमूमन होता ये है कि कोई भी कर्मचारी किसी नए चैनल को ज्वाइन करने के करीब 6 महीने तक छोड़ना नहीं चाहता है। और अगर चैनल अच्छा मिल जाए, सैलेरी अच्छी मिले तो छोड़ने की ज़रूरत ही क्या है। लेकिन न्यूज़ नेशन में ठीक इसके उलट हो रहा है।
इस चैनल के लोग दूसरे चैनल में इंटरव्यू देते देखे गए हैं। उन कर्मचारियों ने चैनल की स्थिति पर कुछ साफ साफ तो नहीं कहा लेकिन उनकी बातों से लग ऐसा ही रहा था कि न्यूज़ नेशन के अंदर हालात अच्छे नहीं है। मौजूदा स्थिति भी यही कहानी बयां कर रही है। जिस चैनल में अलजज़ीरा जैसे चैनल से ट्रेनर बुलाए गए हों, मशीन विदेशी हों, कर्मचारी बड़े बड़े चैनल से छोड़कर आए हों, भला वहां के लोग इतनी जल्दी दूसरे चैनल की तरफ क्यों भाग रहे हैं? ऐसे में अटकलें इस बात की है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो अल्फा समूह के न्यूज नेशन का भविष्य अंधकार में जा सकता है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






