सिरोंज : विगत दिनों नगर के दो पत्रकारों पर थाना प्रभारी द्धारा दबाव में आकर झूठा प्रकरण दर्ज करने के मामले में पत्रकार महासंघ ने राजधानी पहुंचकर पुलिस विभाग के आला अधिकारियों व मंत्री को सिरेांज पुलिस की कार्यप्रणाली से अवगत कराते हुऐ पत्रकारों पर दर्ज झूठा प्रकरण वापस लेने व थाना प्रभारी के स्थांनतरण की मांग की। इंसाफ की गुहार लगाने के लिए सिरोंज के पत्रकारों ने अब राजधानी के मंत्रियों व पुलिस विभाग के आला अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है।
गौरतलब है कि विगत दिनों नगर के दो पत्रकार प्रमोद साहू व सचिन शर्मा द्धारा एक खबर छापने को लेकर एक व्यक्ति विशेष के आवदेन पर थाना प्रभारी आरपी मिश्रा ने ब्लैकमेलिंग का मामला बगैर जांच के दर्ज कर लिया था, जिसको लेकर प्रदेश भर के पत्रकारों में रोष व्याप्त है। वहीं इस झूठे प्रकरण को वापस लेने की मांग लगातार की जा रही थी। थाना प्रभारी द्धारा पत्रकारों पर झूठा मुकदमा दर्ज करने की धमकी को लेकर कई बार शिकायत स्थानीय विधायक व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से भी की जा चुकी थी। परंतु इस बार दो पत्रकारों पर दर्ज हुए प्रकरण को वापस लेने की मांग व थाना प्रभारी के स्थानंतरण की मांग को लेकर पत्रकार महासंघ के सदस्य राजधानी में गृह मंत्री उमा शंकर गुप्ता, जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहीणी, डीजीपी नंदन दुबे, आईजी विजय यादव से मिले।
पत्रकार इस दौरान गृह मंत्री, डीजीपी व आईजी को सारी घटना से अवगत कराया। साथ ही विगत सालों से सिरोंज में पुलिस के सरंक्षण में पनप रहे अस्माजिक तत्वों के कारोबार, जुआ, सट्टा, आड, आदि से भी अवगत कराया। इसके साथ समाचार पत्रो की कटिंग भी आला अधिकारियों व मंत्री महोदय के समक्ष रखी, जिस पर सभी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुऐ इस सारी घटना की जांच उच्च अधिकारियों से कराने की बात कही। गृह मंत्री उमा शंकर गुप्ता बिना जांच करे पत्रकारों पर दर्ज झूठे प्रकरण पर चिंता व्यक्त करते हुऐ तत्काल आईजी विजय यादव से फोन पर बात की और पत्रकारों को गिरफ्तार न करने व इस मामले की गंभीरता से जांच कराने को कहा। साथ ही थाना प्रभारी की जानकारी भी ली।
जबकि डीजीपी नंदन दुबे ने सभी पत्रकारों को आश्वस्त किया कि इस तरह बगैर जांच एक तरफा कार्रवाई करना गलत है। उच्च स्तरीय जांच से पहले पत्रकारों को गिरफ्तार नहीं किया जाए। बगैर सच्चाई जाने किसी पर भी झूठा प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सकता। वहीं जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने भी एक हफ्ते में उचित कार्रवाई करने की बात कही। इस दौरान बासौदा के वरिष्ठ पत्रकार जफर कुरैशी, ऋषभ जैन व भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश निगम ने पूरे समय स्थानीय पत्रकारों का साथ दिया तथा कहा कि पत्रकारों के खिलाफ चल रही साजिशों का पर्दाफाश करने के लिए जिले व प्रदेश के पत्रकार एकजुट हैं। वहीं जनसम्पर्क मंत्री की छवि भी इस घटना से काफी धूमिल हो रही है। क्योंकि यह उनके गृह नगर के पत्रकारों का मामला है। कई बार मंत्री महोदय से थाना प्रभारी के स्थानतरण की मांग की जा चुकि है, परंतु मंत्री महोदय ने अब तक अपने नगर के पत्रकारों कि इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया है, जिसके चलते यह माना जा रहा है कि कहीं न कहीं मंत्री महोदय के संरक्षण से थाना प्रभारी यहां के पत्रकारों को परेशान कर रहे हैं और उन पर झूठा प्रकरण दर्ज करने मे अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
माना यह भी जा रहा है कि थाना प्रभारी कुछ पत्रकारों को और घेरने की फिराक में है, जो उनके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। अब देखना यह है कि जनसम्पर्क मंत्री अपने गृह नगर के पत्रकारों की कितनी हिफाजत कर पाते हैं या फिर अपने आश्वासन को झूठा साबित करके थाना प्रभारी को यही बिराजमान रखते हैं। यह मंत्री महोदय के दो दिन पूरे होने के बाद ही पता चलेगा। बहरहाल यदि थाना प्रभारी का स्थानतरण नहीं किया गया तो शहरवासियों को यह बात समझने में कतई देर नहीं लगेगी कि जनसम्पर्क मंत्री जी की ढील का ही यह कारण है कि आज उनके नगर के पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज किये जा रहे हैं।
आमिर खान की रिपोर्ट.





