मालिक इन दिनों बेहद मुश्किल में है इसलिए उसके चैनल में काम करने वालों के लिए भी ये चैनल किसी जेल से कम नहीं है। जिन लोगों को इस चैनल से रिहाई का अवसर नहीं मिला वो यहां काम करने को मजबूर हैं। लेकिन कहते हैं कि बड़े नाम वाले कैदियों को जेल में भी तकलीफ नहीं होती। यही वजह है कि अच्छे अच्छों के साथ चैनल को भी ठिकाने लगाने वाले प्रधान संपादक अब भी एश कर रहे हैं।
भले ही चैनल में लोगों को सेलरी ना मिलने की अफवाह उड़ रही हो, लेकिन संपादकजी और चैनल के बड़े अधिकारी किसी होटल में पार्टी कर रहे हैं। चैनल की तो तेरहवीं कब की हो चुकी, लेकिन मातम में मौज करने वालों के बुरे दिन कौन ला सकता है भाई, इसीलिए चैनल के अधिकारियों की मौज जारी है। जो मालिक को डुबोकर चैनल का श्राद्ध करने के बाद भी महान बना रहे वही तो मीडिया का असली नटवरलाल है। चीयर्स! (कानाफूसी)
एक कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. खबर के साथ एक तस्वीर भी मेल की गई है जिसमें कई लोग पार्टी कर रहे हैं. पर तस्वीर का प्रकाशन इसलिए नहीं किया गया क्योंकि उससे सभी लोगों की पहचान उजागर हो रही है. वैसे भी किसी एक के मुश्किल में होने से बाकी लोगों की जिंदगी रुकती नहीं और लोग अपने सुख-दुख को जीते रहते हैं. इसलिए भी इस कानाफूसी में लोगों के नाम व चैनल का नाम हटा दिया गया है.






