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सासाराम में अस्‍पताल के उपाधिक्षक ने दी पत्रकारों को जेल भेजवाने की धमकी

नवम्बर माह से जननी बाल सुरक्षा योजना का पैसा का वितरण नहीं होने पर समाचार संकलन करने गये पत्रकारों पर सदर अस्पताल के उपाधिक्षक भड़क गये। उन्होंने पहले तो फोटोग्राफरो को तस्वीर लेने से रोका तथा बाद में जेल भेजवाने की धमकी भी डे डाली। वे पत्रकारों से उलझ भी गये। डीजल घोटाला से लेकर दवा खरीद मामले में गडबडी के लिए कुख्यात सासाराम के सदर अस्पताल के अधिकारियों की करतूत तो देखिये। चोरी भी कर रहे हैंऔर सीना जोरी भी।

नवम्बर माह से जननी बाल सुरक्षा योजना का पैसा का वितरण नहीं होने पर समाचार संकलन करने गये पत्रकारों पर सदर अस्पताल के उपाधिक्षक भड़क गये। उन्होंने पहले तो फोटोग्राफरो को तस्वीर लेने से रोका तथा बाद में जेल भेजवाने की धमकी भी डे डाली। वे पत्रकारों से उलझ भी गये। डीजल घोटाला से लेकर दवा खरीद मामले में गडबडी के लिए कुख्यात सासाराम के सदर अस्पताल के अधिकारियों की करतूत तो देखिये। चोरी भी कर रहे हैंऔर सीना जोरी भी।

गड़बड़ी के बावजूद अस्पताल के उपाधिक्षक ने धमकी दे डाली। 5 माह से जननी बाल सुरक्षा योजना के पैसे के लिए दौड़ रही माताओं के खबर को कवरेज करने गये संवाददाताओं को जमकर हड़काया। कहा कि वे पत्रकारों को जेल भिजवाने की कूबत रखते हैं। अब इनके इस ठाठ के पीछे किसका हाँथ हैं ये तो चौबे जी ही जाने। लेकिन इस सुशासन में जिस प्रकार से वास्तविकता दिखाने वाले खबरचियों पर सरकार के लोग अपना दवाब बनाते देखे जा रहे हैं, ये आने वाले कल के लिए घातक हैं। सदर अस्पताल सासाराम में सिविल सर्जन के कार्यालय में पिछले ही माह एक बाबू को निगरानी विभाग ने अपने ही विभागीय कर्मी से घूस लेते धर दबोचा था।

सुशासन की सरकार में नीतीश कुमार के पदाधिकारी निरंकुश हो गये हैं। कहते हैं कि जैसा राजा का चरित्र होता हैं उसके मुलाजिम भी उसी के नक्शे कदम पर चलते हैं। ये सिलसिला सदर अस्पताल सासाराम की ही बानगी नही हैं बल्कि पूरे सूबे की ही ये स्थिति है। पत्रकार किस परिस्थिति में बिहार में काम कर रहे हैं, ये उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। आज समाज उनके तरफ आशा लिये देख रहीं हैं कि वही कुछ कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से सरकार में पदाधिकारी अपनी गलती छुपाने के लिए पत्रकारों को समाचार संकलन से रोकते हैं और जेल भेजवाने की धमकी देते हैं, वो सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली बात है।

सवाल यह है कि आखिर इन पदाधिकारियों को कौन इतनी हिम्मत देता है कि गलत करें और उसे उजागर होने पर धमकी भी दें। लालू यादव की सरकार उनके साले की कारनामों से गयी, ठीक उसी तरह इस सुशासन सरकार की दुर्गति इन्हीं भ्रष्ट अधिकारियों के कारनामे से होने वाली है। समय रहते नीतीश जी को चेत जाना चाहिए और ऐसे बेलगाम अधिकारियों पर अंकुश लगाना चाहिए। आज समस्त सरकारी व्यवस्था चौपट हो गयी है। एक मात्र आसरा मीडिया बचा है। सरकारी नुमाइंदे इसे भी कुंद कर देने के फिराक में हैं। आज जहाँ हर कोई सक्षम वर्ग लूट लोने के फिराक में हैं, ऐसे में मीडिया ही अपनी जबाबदेही निभा रही है।

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