ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के निदेशक उमा शंकर की जन्मतिथि में हुई तमाम अनियमितताओं के सम्बन्ध में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, लखनऊ राजेश उपाध्याय ने सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा प्रस्तुत प्रार्थनापत्र को स्वीकार कर लिया. अपने आदेश में सीजेएम ने कहा कि प्रार्थिनी का प्रार्थनापत्र परिवाद के रूप में दर्ज किये जाने योग्य है. अतः उन्होंने ठाकुर का प्रार्थनापत्र स्वीकार करते हुए आदेश किया कि मामला परिवाद के रूप में दर्ज हो.
सीजेएम ने बयान दर्ज किये जाने हेतु सुनवाई की अगली तिथि 29 मार्च 2013 नियत की है. ठाकुर ने हरि शंकर पाण्डेय, विशेष सचिव, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा की गयी जांच रिपोर्ट के आधार पर उमा शंकर के मूल आवेदनपत्र तथा व्यक्तिगत पत्रावली गायब करा कर उनकी जन्मतिथि 25 अक्टूबर 1951 से छह साल घटाकर 25 अक्टूबर 1957 किये जाने के बारे में प्रार्थनापत्र दिया था.
पाण्डेय ने 30 अक्टूबर 2012 को संजीव दूबे, प्रमुख सचिव, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को प्रस्तुत नौ पृष्ठों की जांच आख्या में लिखा था कि उमा शंकर ने अपने निहित स्वार्थों की पूर्ती हेतु छह वर्ष का अनुचित सेवाकाल बढ़ाए जाने हेतु की आपराधिक मंशा से शहजादे लाल, संयुक्त सचिव, हरेन्द्र वीर सिंह, विशेष सचिव आदि के साथ दुरभिसंधि कर यह आपराधिक कृत्य किया. ठाकुर ने इस सम्बन्ध में थाना गोमतीनगर और एसएसपी लखनऊ द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं करने की दशा में सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया था.





