जागरण समूह के अखबार नवदुनिया के कर्ममचारी अभिषेक गुप्ता के आत्महत्या के मामले में सामने आ रहा है कि उसके ऊपर प्रबंधन ने जबर्दस्त दबाव बना रखा था, जिसके बाद उसने यह कदम उठाया. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है परन्तु माना जा रहा है कि अखबार के दबाव में मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा. अब तक नवदुनिया में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जागरण समूह के हाथों में आते ही इस अखबार की सूरत और सीरत दोनों बदल चुकी है.
अपने कर्मचारियों के शोषण के लिए कुख्यात जागरण समूह ने जब से नईदुनिया का अधिग्रहण किया है तबसे इस अखबार के कर्मचारियों का भी हाल बुरा है. यह संस्थान अपने तमाम कर्मचारियों को किसी ना किसी माध्यम से प्रताडि़त करता रहता है. अभिषेक के आत्महत्या के मामले में सामने आ रहा है कि उसकी मौत से एक दिन पहले यानी आठ मार्च को कार्यालय में किसी वरिष्ठ ने उसके साथ बहुत बदतमीजी की थी.
सूत्रों का कहना है कि उसे धमकी दी गई थी कि सर्कुलेशन के फंसे पैसे की रिकवरी उसके पास से की जाएगी, जिससे वह बुरी तरह डर और सहम गया था. संस्थान द्वारा पैदा किए गए इसी डर और दहशत ने उसे आत्महत्या करने को मजबूर कर दिया. नवदुनिया प्रबंधन की असंवेदनशीलता ने एक बाप, एक मां का सपना पल भर में चकनाचूर कर दिया. अभिषेक का कुछ समय बाद ही शादी होने वाली थी. सबसे दुखद बात तो यह रही कि अभिषेक की अंत्येष्टि में भी प्रबंधन की तरफ से शामिल होने कोई नहीं गया.
सूत्रों का कहना है कि अभिषेक ने अपने सुसाइड नोट में भी इस बात का जिक्र किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पुलिस अभिषेक को आत्महत्या करने के लिए उकसाने वाले किसी भी व्यक्ति या अखबार के मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी. अभिषेक के आत्महत्या की घटना के बाद से निचले स्तर के कर्मचारी बहुत दुखी हैं. हालांकि वे खुल कर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं, पर सवाल यही है कि क्या किसी संस्थान के लिए पैसा उसके अपने कर्मचारियों के जीवन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है.
मूल खबर – नईदुनिया प्रबंधन की प्रताड़ना से तंग आकर अभिषेक ने की आत्महत्या!





