मौका था उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार का एक साल पूरा होने का। एक साल कब बीत गया किसी को पता नहीं चला। कइयों को तो ये सुनकर हैरत भी हुई कि बहुगुणा सरकार का एक वर्ष पूरा हो गया है। कांग्रेस के मुखिया विजय बहुगुणा समेत उनकी टीम प्रदेश में विकास के दावे के साथ दिनभर जश्न में डूबी रही। इस जश्न का हिस्सा मीडिया के लोग भी रहे। जश्न में शामिल हो भी क्यों ना, आखिरकार उन्हें भी मलाई खाने की आदत सी जो हो गई है।
कांग्रेस का एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर उत्तराखंड के लिए प्रसारित होने वाले तमाम रीजनल न्यूज चैनलों और अखबारों ने सीएम बहुगुणा के काम की जो तारीफ की वो यकीकन इनकी सीएम भक्ति का परिचय दे रहा है। उत्तराखंड में इस वक्त कई रीजनल न्यूज चैनल चल रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा चैनल बचा हो जिसने विजय बहुगुणा के एक साल के कार्यकाल को बढ़ा चढ़ाकर ना बताया हो। आलम ये था कि सीएम से जुड़ी कोई भी खबर ब्रेकिंग बनाकर चलाई जा रही थी। एक चैनल ने ये ये न्यूज तक ब्रकिंग में चला डाली कि सीएम की घोषणा के मुताबिक सितारगंज में सड़क के निर्माण का काम शुरू हो गया है। कोई इस चैनल से पूछे भाई इसमें ब्रेकिंग जैसा है क्या।
आगे सुनिए, एक चैनल ने ये ब्रकिंग बना दी कि बहुगुणा सरकार का एक साल पूरा होने पर देहरादून में कांग्रेस जश्न मना रही है। आपको क्या लगता है इसमें ब्रेकिंग जैसा क्या है भाई। 13 मार्च को उत्तराखंड के तमाम रीजनल चैनलों में सीएम विजय बहुगुणा के फेवर में खबर चलाने की होड़ सी लगी रही। बहुगुणा को खुश करने के लिए उनसे जुड़ी हर खबर को ब्रेकिंग के रूप में चलाया जा रहा था। लेकिन सवाल ये है कि आखिरकार मीडिया बहुगुणा जी पर इतना मेहरबान क्यों हो गया? आखिरकार बहुगुणा जी ने मीडिया को ऐसा क्या खिला दिया कि हर किसी ने उनका गुणगान करना शुरू कर दिया।
आपको बता दें दरअसल ये पूरा खेल विज्ञापनों से जुड़ा हुआ है। सालभर बहुगुणा सरकार की तरफ से न्यूज चैनलों और अखबरों को विज्ञापन के रूप में मोटा पैसा दिया जाता है। इस पैसे की बदौलत ही कई चिरकुट चैनल अपना काम चला रहे हैं। भला ऐसे में किसी ही हिम्मत है कि कोई बहुगुणा जी के एक साल के कामकाज पर उंगली उठा पाता। ये सारा विज्ञापन का ही खेल था कि सालभर जिन मंत्रियों ने दिल्ली दौड़ लगाई, विदेश के दौरे किए, फाइव स्टार में पार्टियां की, उन्हें विकास पुरूष बना दिया गया। भाई पैसा चीज़ ही ऐसी है, अच्छे अच्छों की बोलती बंद कर देता है। तमाम चैनलों ने दिखाया कि बहुगुणा सरकार ने एक साल में बहुत कुछ कर दिखाया। लेकिन मीडिया के ज़रिए गुणगान करवा देने से ये नहीं माना जा सकता है कि वास्तव में विकास का काम हुआ है।
असल मायने में बहुगुणा सरकार ने पिछले एक साल में किया ही क्या है। विजय बहुगुणा सीएम बनने से पहले टिहरी से सांसद थे। सीएम बने रहने के लिए उन्हें विधानसभा का चुनाव जीतना था। पहले तो सितारगंज से बीजेपी के विधायक किरण मंडल को लालच देकर सीट खाली कराई गई। इस साल के चार महीने तो बहुगुणा को जोड़ तोड़ की राजनीति करने में ही गुजर गए। बहुगुणा जी विधानसभा का चुनाव जीते तो अब उन्हें टिहरी के सांसद पद से इस्तीफा देना पड़ा। टिहरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव में सीएम ने अपने बेटे साकेत बहुगुणा को उतार दिया। अपने बेटे साकेत को चुनाव जीताने के लिए बहुगुणा ने पूरा एक महीना खर्च कर दिया। इस दौरान सरकारी मशीनरी का भी जमकर इस्तेमाल किया गया। इससे जनता को कुछ हासिल नहीं हुआ।
कुछ मिलाकर 6 महीने तो ऐसे ही निकल गए। बचे उनके एक साल के कार्यकाल के 6 महीने, इन 6 महीनों में से 3 महीने तो उन्होंने देहरादून से दिल्ली की दौड़ में बिता दिए। अब जो तीन महीने बचे उनमें बहुगुणा जी ने कभी शिलान्यास, कभी समीक्षा बैठक तो कभी कैबिनेट मीटिंग में बिता दिए। घोषणाएं तो खूब की गई लेकिन धरातल पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। सड़कें बनाने की बात कही गई, लेकिन उत्तराखंड में एक भी सड़क नहीं बनी है। पानी की समस्या दूर करने की बात कही गई लेकिन लोग अभी भी प्यासे हैं। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती का वायदा किया गया, लेकिन सरकारी अस्पताल में अभी डॉक्टरों का टोटा है। रोजगार मुहैया कराने की वायदा किया गया, हर कोई जानता है कि रोजगार कितनों को मिला है। कानून व्यवस्था सुधारने की बात की गई, लेकिन कानून व्यवस्था सुधरी ही कहां है। कांग्रेस सरकार ने गैरसैंण में कैबिनेट की बैठक कर ये जता दिया कि वो राज्य को विकास की पटरी पर आगे ले जाएगी लेकिन धरातल पर विकास हुआ ही कहां है। ऐसे में अगर मीडिया बहुगुणा सरकार के एक साल के कामकाज की तारीफ करता है तो भैया दाल में कुछ तो काला जरूर है।





