सिरोंज। सिरोंज पुलिस के मनमाने रवैये के विरोध में शहर के पत्रकारों का आक्रोश मंगलवार को एक बार फिर सड़कों पर उतर आया। शाम को सभी पत्रकारों ने सामूहिक रूप से वाहन रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया तथा थाना प्रभारी के विरुद्ध जबरदस्त नारेबाजी की। इसके पहले पत्रकार भवन में हुई सामूहिक बैठक में हुए निर्णय में पत्रकारों पर दर्ज किए झूठे मुकदमा वापस लेने तथा सिरोंज थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग प्रभावी ढंग से उठाई गई।
ज्ञात हो कि सिरोंज में थाना प्रभारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा को आये लगभग तीन वर्ष बीतने वाले और उनके संरक्षण में यहां चल रहा जुआ-सट्टा-आडा का कारोबार भी काफी फल फूल रहा है। यहां तक कि वह नई नई चार पहिया वाहन भी खरीदकर पीली बत्ती लगाकर घूम रहे हैं। यदि कोई पत्रकार उनके द्धारा किये जा रहे अस्माजिक तत्वों से प्यार व नगर के असमाजिक तत्वों की खबरे छापते हैं तो उनपर झूठा प्रकरण दर्ज कर लिया जाता है, जिसका उदाहरण नगर वासियों के सामने है, परंतु हैरत की बात तो यह है कि यह सारा माजरा जनसम्पर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के गृह नगर का है। जिस ओर वह ध्यान नहीं दे रहे हैं बल्कि थाना प्रभारी को और ढील दे रहे हैं। उन्हीं के विभाग की मीडिया को धरने पर बैठने पर मजबूर कर रहे हैं।
पूर्व में भी कई पत्रकारों के साथ ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिसको लेकर मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से मिला गया, परंतु आज तक उस मिलने का कोई फायदा नहीं रहा है। इस तरह थाना प्रभारी पर कार्रवाई न करके माननीय मंत्री महोदय भी यह सिद्ध कर रहे हैं कि उनके ही संरक्षण से आज उनके गृह नगर की मीडिया अपने हक के लिये और झूठे मुकदमे वापस लेने के लिये सड़कों पर बैठ रही है, जो कि उनके लिये शर्म की बात है। इसी क्रम में शहर के एक वकील पर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए छेडछाड़ का प्रकरण की खबर मीडिया में आने से नाराज एक वकील ने अपने साथी वकीलों के साथ पुलिस पर दबाव बनाकर सोमवार को शहर के दो पत्रकारों के विरुद्ध झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी। पुलिस द्वारा बिना कोई जांच किए पत्रकारों पर दर्ज किए गए प्रकरणों का सिरोंज के सभी पत्रकारों द्वारा सोमवार देर रात तक थाने के सामने प्रभावी विरोध किया गया था।
पत्रकारों ने थाने के सामने करीब दो घंटे तक धरना देकर पुलिस की मनमानी के विरोध में जबरदस्त नारेबाजी की थी। जानकारी मिलने पर सिरोंज आए बासौदा एसडीओपी से मिले आश्वासन के बाद पत्रकारों ने अपना यह धरना प्रदर्शन समाप्त किया था। इसके बाद पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन का क्रम मंगलवार को भी दिनभर चलता रहा। दोपहर में नया बस स्टैण्ड स्थित बाल कृष्ण विद्यार्थी भवन में सभी पत्रकारों की बैठक का आयोजन भी किया गया। करीब तीन घंटे तक चली मैराथन इस बैठक में पत्रकारों को लेकर सिरोंज पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा के रवैये की तीखी निंदा की गई। वरिष्ठ पत्रकार सुबुर खान का कहना था कि सभी पत्रकार पूरी निष्पक्षता के साथ अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे है। ऐसी स्थिति में कुछ लोगों द्वारा मनगढंत कहानियां बनाकर पत्रकारों के विरूद्ध झूठा प्रकरण दर्ज करना एक तरह से प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रहार है।
पत्रकार राजीव जैन का कहना था कि पुलिस द्वारा इस तरह बिना जांच किए पत्रकारों पर प्रकरण कायम करना प्रेस की स्वतंत्रता का हनन है। जिसका हर स्तर पर जाकर विरोध किया जाएगा। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार रोहिताश्व शर्मा, लक्ष्मण सिंह कटियार, मनोज साईंनाथ तथा राजेश सहेले ने भी अपने विचार रखे। बैठक में पत्रकारों पर दर्ज झूठे मुकदमों के वापस न होने तथा सिरोंज थाना प्रभारी के निलंबन न होने तक आंदोलन का क्रम लगातार जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
शहर में निकाली वाहन रैली : दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद पत्रकारों ने पुलिस की मनमानी के विरोध में सामूहिक रूप से वाहन रैली भी निकाली। वाहन रैली में शामिल सभी पत्रकार हाथों पर काली पट्टी बांधे हुए थे तथा सिरोंज थाना प्रभारी एवं प्रशासन के मनमाने रवैये के विरोध में जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। मण्डी बायपास, बासौदा नाका, लिंक रोड, छतरी चौराहा, कष्टम पथ, कठाली बाजार, सर्राफा बाजार, कपड़ा बाजार, चांदनी चौक, कोर्ट गेट, राज बाजार तथा पुराना बस स्टेण्ड, थाना परिसर होते हुए तहसील परिसर में पहुंचकर जोरदार नारेबाजी के बाद समाप्त हुई।
नहीं बंटे अखबार : पत्रकारों पर दर्ज हुए मुकदमे के विरोध में मंगलवार को शहर में किसी भी अखबार का वितरण नहीं हुआ। सोमवार को सुबह सभी पत्रकार नया बस स्टैण्ड पर एकत्रित हुए तथा अखबारों का वितरण नहीं करने का निर्णय लिया। सभी हाकरों ने भी पत्रकारों के इस निर्णय का समर्थन करते हुए बस स्टैण्ड पर अखबारों के बंडल रखकर जोरदार नारेबाजी की। वहीं स्थानीय पत्रकारों ने थाना परिसर के सामने अपना विरोध दर्ज कराया साथ ही पुलिस प्रशासन व थाना प्रभारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा के खिलाफ भी नारेबाजी की गई।
गौरतलब हो कि पिछले तीन वर्षों से नगर में असमाजिक तत्वों का अड्डा सिरोंज बनता जा रहा था। जहां जुआ सट्टा आड के साथ ही अन्य गैर कानूनी कार्य भी किये जा रहे हैं। इन सब चीजों को स्थानीय पत्रकारों द्धारा अपने समाचार पत्रों में छापने पर उनपर दबाव बनाया जाता था। वहीं थाने मे बुलाकर धमकी तक दी जाती थी। इसके साथ ही पत्रकारों को निष्पक्ष लिखने से रोकने के लिये उनकी गाडि़यां भी रोक कर न्यायालय के चालान काटा गया, जिसके बाद अब एक बार फिर निष्पक्ष लिखने वाले दो पत्रकारों के खिलाफ षडयंत्रपूर्वक प्रकरण कायम किया गया। पहले भी पत्रकारों पर झूठे प्रकरण की कार्रवाई की जा चुकी है, जिसका सिलसिला अभी लगातार जारी है।
भोपाल से आमिर खान की रिपोर्ट.





