नई दिल्ली। गीतिका शर्मा स्यूसाइड केस में अदालत ने आरोपी एवं हरियाणा न्यूज के मालिक गोपाल गोयल कांडा और अरुणा चड्ढा की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेज की कॉपी देने को कहा था। डिस्ट्रिक्ट जज एसके सरवरिया की अदालत ने कहा कि आरोपियों ने निचली अदालत से भी उन इलेक्ट्रॉनिक डेटा और दस्तावेज की कॉपी की मांग की थी, जिन पर अभियोजन पक्ष ने भरोसा किया था। पुलिस ने तब लिखित आश्वासन दिया था कि फॉरेंसिक लैब से ये डेटा और दस्तावेज मिलने के बाद वह उनकी कॉपी देगी।
अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैबरटरी (एफएसएल) के रिजल्ट और इलेक्ट्रॉनिक इस्ट्रूमेंट (हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन) की कॉपी एफएसएल के पास ही है। अभियोजन पक्ष ने उन्हें सप्लिमेंटरी चालान के साथ पेश करने का लिखित आश्वासन दिया है, ऐसे में आरोपियों का इस अदालत से हार्ड डिस्क वगैरह की कॉपी दिलवाने की मांग करना ठीक नहीं है। अदालत ने कांडा और अरुणा की यह डिमांड भी खारिज कर दी कि मोबाइल कंपनी को आठ मोबाइल फोनों की कॉल डिटेल रेकॉर्ड (सीडीआर) सेफ रखने का निर्देश दिया जाए। अदालत ने कहा कि सीडीआर तो पहले ही आरोपी को दिए गए हैं और इसकी मूल कॉपी पेश करने की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, इस मांग में यह बताया ही नहीं गया कि किस अवधि की सीडीआर सेफ रखी जाए।
कांडा और अरुणा पर गीतिका को सुसाइड के लिए मजबूर करने का आरोप है। पूर्व एयर होस्टेस गीतिका ने 5 अगस्त 2012 को अशोक विहार स्थित अपने फ्लैट में पंखे से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पुलिस को मौके से जो सुसाइड नोट बरामद हुआ, उसमें कांडा और अरुणा के परेशान करने की बात कही गई थी। अदालत ने आदेश में कहा कि पहले ही ट्रायल कोर्ट गीतिका का अबॉर्शन करने वाली डॉ. विशाखा मंजूल की जब्त डायरी की कॉपी आरोपियों को देने का निर्देश दे चुका है। उन्हें डायरी की कॉपी, गीतिका के पासपोर्ट की कॉपी वगैरह दिए जा चुके हैं। आरोपियों की यह भी डिमांड थी कि उन्हें जरूरी दस्तावेज के साथ-साथ आरोप पत्र की कॉपी भी दी जाए, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। (एनबीटी)





