बाजार नियामक सेबी ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को हिरासत में लिए जाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने अपील की है कि सुब्रत रॉय को भारत से बाहर जाने की इजाज़त न दी जाए. सेबी का ये क़दम निवेशकों के 24 हज़ार करोड़ रुपए लौटाने से जुड़ा है, जिस पर अमल नहीं हुआ. सेबी ने ये मामला जस्टिस केएस राधाकृष्णन की बेंच के सामने रखा, जिसके बाद बेंच ने अप्रैल के पहले हफ्ते में मामले की सुनवाई की बात कही.
सेबी ने कोर्ट से अपील की है कि मामले की अगली सुनवाई तक वो सहारा के प्रमुख सुब्रत रॉय और सहारा के दो अन्य निदेशकों को हिरासत में लिए जाने के लिए क़दम उठाए. सेबी ने कोर्ट से अपील की है कि उनके पासपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में रखवा लिए जाएं. सहारा ग्रुप और सेबी के बीच 24,000 करोड़ रुपए की वसूली को लेकर क़ानूनी लड़ाई चल रही है.
सहारा हाउसिंग इवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) के ख़िलाफ़ अपने दो अलग-अलग आदेशों में सेबी ने कहा है कि इन दोनों कंपनियों ने बॉन्ड धारकों से 6,380 करोड़ और 19,400 करोड़ रुपए की राशि जुटाई और इसमें 'विभिन्न अनियमितताएं' बरती गईं. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में सहारा ग्रुप को आदेश दिया था कि वो निवेशकों को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाए और सेबी से इस काम को सुगम बनाने को कहा था.
इससे पहले सहारा ग्रुप ने कोशिश की थी कि कोर्ट उन्हें ये पैसा चुकाने के लिए कुछ और समय दे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस याचिका को ख़ारिज कर दिया और साथ ही उन्हें फटकार भी लगाई. सहारा समूह का दावा है कि सेबी का आदेश ‘पुराने तथ्यों’ पर आधारित है और शेयर बाज़ार नियामक का किसी व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की का आदेश देना ठीक नहीं है. सहारा के अनुसार सेबी के आदेश जनवरी 2012 के तथ्यों पर आधारित हैं और तब से अब तक चीज़ें बदल चुकी हैं. प्रवक्ता ने कहा कि पैसे कंपनियों को लौटाने हैं, ऐसे में व्यक्तिगत संपत्तियों की कुर्की के आदेश उचित नहीं हैं. (बीबीसी)





