दैनिक जागरण समूह केवल फर्जी मुकदमे ही नहीं कराता है बल्कि वह ऐसे-ऐसे लोगों को अपना पत्रकार भी बनाता है जो अपराधियों की मदद करते हैं या मदद करने के नाम पर लाखों वसूलते हैं. मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर का है. पुलिस की गिरफ्त में आए पांच हजार के इनामी हत्यारोपी ने ग्वालियर-झांसी से प्रकाशित दैनिक जागरण के पत्रकार देवेंद्रदीप सिंह उर्फ राजू सरदार पर मदद के नाम पर एक लाख से ज्यादा रुपए वसूलने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दिया.
प्रेस वार्ता में हत्यारोपी महिपाल सिंह का कहना था कि हत्या के मामले से उसका नाम हटवाने के लिए दैनिक जागरण के पत्रकार राजू सरदार ने उससे एक लाख रुपये से ज्यादा वसूल लिए. उसने बताया कि मार्च 2012 में घटना के समय छतरपुर एसपी प्रेमसिंह विष्ट थे, जो वर्तमान में सतना में पदस्थ हैं. राजू सरदार ने उनसे सेटिंग हो जाने के नाम पर कुछ राशि ली. इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनील तिवारी से मामला सुलटाने के नाम पर पत्रकार ने उससे वसूली की.
आरोपी महिपाल के अनुसार एसपी का तबादला होने पर पत्रकार ने उसकी मदद के नाम पर अन्य तरीकों से राशि वसूली. उसका फर्जी मेडिकल झांसी से पत्रकार राजू सरदार ने बनवाया, जिस आधार पर उसकी अग्रिम जमानत हो जाये. यह मेडिकल वर्तमान में हाईकोर्ट जबलपुर के अधिवक्ता मनीष दत्त के पास रखा है. राजू सरदार वर्तमान में जागरण का ब्यूरो चीफ होने के साथ भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्यसमिति का सदस्य भी हैं. उन्हें यह कहते सुना जाता है कि प्रभारी मंत्री हरिशंकर खटीक सहित कई मंत्रियों से उनके अच्छे संबध हैं. राजू सरदार पूर्व में भी हत्या के प्रयास के मामले में जिला जेल छतरपुर में बंद रहा है. नगर पुलिस अधीक्षक ने बयान दिया है कि राजू सरदार के खिलाफ भी अपराध दर्ज किया जायेगा.
इस संदर्भ में राजू सरदार का कहना है कि यह पूरी तरह से साजिश है. 15 दिन पहले मुझे पत्र से धमकी मिली थी कि पत्रकारों के एक गुट में शामिल हो जाओ नहीं तो जेल पहुंचा दिए जाओगे. मैंने इस बात की जानकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को दी थी. इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, अब मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है. राजू सरदार का कहना था कि आरोपी का प्रेस कांफ्रेंस भी मात्र तीन पत्रकारों के सामने किया गया, जबकि अन्य प्रेस कांफ्रेंस में सभी मीडियाकर्मियों को बुलाया जाता है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसे आरोप थे तो हम दोनों को आमने-सामने कराकर पूछताछ करते. जांच के लिए हमारी कॉल डिटेल निकाली जाती, पर ऐसा कुछ नहीं किया गया. यह साजिश है मुझे बदनाम करने के लिए. अगर इसमें सच्चाई है तो जांच कराकर मेरे ऊपर मुकदमा कायम किया जाए.





