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लखनऊ

यूपी के सभी अखबार अखिलेश सरकार की एक साल की उपलब्धियों के विज्ञापन से भरे हुए थे

15 मार्च 2013 की सुबह सभी प्रमुख समाचार पत्रों को देखा तो ऐसा लगा कि उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने सभी अखबारों को खरीद लिया है. सभी अखबार अखिलेश सरकार की एक साल की उपलब्धियों के विज्ञापन से भरे हुए थे. कन्या विद्या धन योजना, बेरोजगारी भत्ता, वूमेन पॉवर लाइन, समाजवादी एम्बुलेन्स सेवा, लैपटॉप वितरण योजना और अवस्थापना एवं औद्यौगिक विकास के शीर्षक से सरकार की उपलब्धियों को खूब बखान किया गया था. उत्तर प्रदेश का नक्शे अखबार में देखकर ऐसा लगा मानो एक साल में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की काया पलट दी हो.

15 मार्च 2013 की सुबह सभी प्रमुख समाचार पत्रों को देखा तो ऐसा लगा कि उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने सभी अखबारों को खरीद लिया है. सभी अखबार अखिलेश सरकार की एक साल की उपलब्धियों के विज्ञापन से भरे हुए थे. कन्या विद्या धन योजना, बेरोजगारी भत्ता, वूमेन पॉवर लाइन, समाजवादी एम्बुलेन्स सेवा, लैपटॉप वितरण योजना और अवस्थापना एवं औद्यौगिक विकास के शीर्षक से सरकार की उपलब्धियों को खूब बखान किया गया था. उत्तर प्रदेश का नक्शे अखबार में देखकर ऐसा लगा मानो एक साल में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की काया पलट दी हो.

उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की बढ़िया सी स्माईल करती फोटो के साथ लिखा था- उत्तर प्रदेश में 20 करोड़ जिंदगियों में परिवर्तन के 365 सुनहरे दिन (15 मार्च 2012 से 15 मार्च 2013)। अखिलेश और मुलायम सिंह की स्माईल करती तस्वीर को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे पूरा उत्तर प्रदेश मुस्कुरा रहा हो और उत्तर प्रदेश में किसी को कोई दुख तकलीफ  नहीं रही.

अखबार में विज्ञापन रूपी समृद्ध और भयमुक्त उत्तर प्रदेश की छवि देखकर दिल को बड़ा सकून मिला. लगा वाकई में सपा सरकार ने कमाल कर दिया और पता भी नहीं चला. लेकिन अखबार के अंदर के पन्नों पर लूट, चोरी डकैती की खबरों पर नजर गयी तो पता चला कि अखबार के पहले पन्ने पर तो विज्ञापन रूपी ये वही भ्रमजाल है जो चुनाव से ठीक पहले वोटरों को अपने पक्ष में रिझाने के लिए रचा जाता है लेकिन इस बार सरकार की नाकामियों को ढ़कने के लिए रचा गया है.

दिमाग पर ज्यादा जोर डाले बिना अखिलेश सरकार के एक साल के कार्यकाल में 27 सांप्रदायिक दंगों की याद भी ताजा हो गई जिनमें मथुरा, आगरा और फैजाबाद के दंगे भुलाए नहीं भूलते. आए दिन पुलिस की पिटाई और सपा कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी की खबरें अभी जेहन में ताजा ही थी. कुंडा सीओ जिया उल हक की हत्या की ख़बर की याद भी अभी धुंधली नहीं पड़ी थी. लेकिन अखिलेश यादव के हिसाब से उत्तर प्रदेश के 20 करोड़ जिंदगियां सुकून से रह रही हैं. एक भी व्यक्ति परेशान नहीं है. किसी को किसी का भय नहीं है. न किसी बेरोजगार युवा को अपने भविष्य की चिंता है और न ही किसी भूखे को अपना पेट भरने की चिंता..! एक साल में प्रदेश में हुए 27 सांप्रदायिक दंगों से किसी को भी कोई शिकायत नहीं है…न ही किसी को अपनों को खोने की पीड़ा है..

अखिलेश सरकार का एक साल पूरा होने पर तो अखिलेश सरकार द्वारा रचा विज्ञापनों का भ्रमजाल तो कम से कम यही  कहानी कह रहा है कि उत्तर  प्रदेश देश का सबसे समृद्ध और भयमुक्त शासन वाला राज्य  है..! सरकार के एक साल के भ्रमजाल में प्रदेश की 20 करोड़ जनता को फंसाने के लिए अखिलेश सरकार को ज्यागा मशक्कत नहीं करनी पड़ी..! विज्ञापन के रूप में करोड़ों रूपए उड़ा देने भर से ये भ्रमजाल तैयार हो गया और अखिलेश यादव और उनकी सरकार के साथ ही मुलायम सिंह और समाजवादी पार्टी के नेता अखबारों पर नजर घुमा-घुमाकर इस आत्मसंतुष्टि में हैं कि सपा सरकार ने 365 दिनों में उत्तर प्रदेश की 20 करोड़ जनता की तकदीर बदल दी..! अखिलेश जी हमारी तरफ से भी सरकार का एक साल पूरा करने पर बधाईयां स्वीकार किजिए लेकिन माफ किजिएगा हमारा चश्मा विज्ञापन के इस भ्रमजाल के अंदर की तस्वीर भी बयां कर रहा है जो शायद आपके लिए तकलीफदेह होगी।

दीपक तिवारी का विश्लेषण. संपर्क: [email protected]

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