: भारतीय जाली नोटों का अड्डा बना नेपाल (पार्ट वन) : मित्र राष्ट्र नेपाल हमारे देश भारत की अर्थव्यवस्था तोड़ने वाले जाली नोटों का अड्डा बन गया है। इसके लिये नेपाल सरकार थोड़ा भी चिन्तित नहीं दिख रही है। उसका एकमात्र कारण है कि उन आतंकवादियों या भारत विरोधी रणनीतिकारों को नेपाल सरकार खुला संरक्षण दे रही है। यही नहीं जाली नोटों के बड़े तस्कर एवं आईएसआई का प्रतिनिधि मिर्जा दिलशाद बेग नेपाल में मंत्री भी रह चुका था। नेपाल के काठमाण्डू में स्थित चक्रपथ महराजगंज में पकिस्तानी दूतावास स्थित है। वहां पर भारत विरोधी नितियों को अंजाम दिया जाता है।
इतना नहीं नेपाल के प्रमुख धनाड्य और जाली नोटों के सौदागर मिर्जा दिलशाद बेग, सौकत बेग, युनुस अंसारी, फैजान अहमद, मजीद मनिहार ये कोई छोटे व्यक्ति नहीं बल्कि नेपाल के राज्यमंत्री के समान दर्जा प्राप्त व्यक्ति थे, जो नेपाल में फर्जी नोटों को पाकिस्तान से मंगाकर भारत भेजा करते थे। धीरे-धीरे नेपाल की सत्ता तक पहुंचने में आईएसआई कामयाब हो गई। धीरे-धीरे नेपाल के नेताओं को आर्थिक मदद कर सत्ता परिवर्तन कराना प्रारम्भ कर दिये। हद तो तब हो गई जब आईएसआई ने जामिम शाह नामक व्यक्ति ने स्पेस टाइम्स नामक पत्रिका एवं टीवी चैनल चलाकर भारत विरोधी अभियान प्रारम्भ कर दिया। प्रत्येक दिन भारतीय लोग नेपाल के सीमा का अतिक्रमण कर रहे हैं तथा भारत में नेपाली के साथ अत्याचार होता है। यही समाचार दिखाया जाने लगा। भारतीयों के प्रति नेपाली आक्रोश बढ़ने लगा। संबन्ध खराब होने लगे परन्तु इसी बीच आपसी विवाद में जामिम शाह मारा गया, जिससे भारत को थोड़ी राहत मिली। जामिम शाह के मरने के बाद आईएसआई ने फर्जी नोटों का नेतृत्व युनुस अंसारी को दे दिया जो इस समय नेपाल के सेन्ट्रल जेल में कैद है।

जाली नोटों के विषय में भारत सरकार ने कई बार अपनी पक्ष रखी परन्तु नेपाल सरकार द्वारा नेपाल में ऐसी गतिविधि होने से सदैव इनकार करता रहा है। नेपाल के पुलिस मुख्यालय के अनुसार 07.12.11 से 09.12.12 तक 1 करोड़ 90 लाख जाली भारतीय रुपया नेपाल सरकार ने जब्त किया है तथा दिसंबर से इधर 40 लाख नकली भारतीय करेन्सी जब्त किया गया है, जिसमें 39 नेपाली, 6 भारतीय, 42 पकिस्तानी पकडे़ गये हैं, जिसमें 50 मुसलमान रहे हैं। नेपाल के पुलिस मुख्यालय के अनुसार अब तक 8 वर्षों में 40 करोड़ रुपया प्राप्त किया है तथा 103 पकिस्तानी लोग अभी भी जेल में बंद हैं। भारत ने वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव 1390, 1445 तथा 1526 में नेपाल में भारत विरोधी संलग्नता को उठाया था। तथा इस पत्र में भारत ने यह भी बताया था कि दाउद इब्राहिम आईसवर्ग बिल्डिंग पुतली सड़क काठमाण्डू में उपस्थित है तथा नेशनल सेन्ट्रल ब्यूरो ने जामिम शाह को दक्षिण अफ्रिका और पाकिस्तान में दाउद से मिलने तथा भारतीय जाली नोट को खेप भारत भेजने का शंका जाहिर किया था। परन्तु नेपाल सरकार ने इसे खारिज कर दिया। भारत में जो भी नोट आते हैं वह नेपाल ट्रान्जिट से ही भारत में प्रवेश करते हैं। अगर नेपाल सरकार थोड़ी गंभीर हो जाय तो शायद भारत में जाली नोट न आ सकें।
कौन था मिर्जा दिलसाद बेग? : नेपाल में एक कहावत थी कि ’’सौ गिरजा न एक मिर्जा’’ गिरजा मतलब नेपाल के पूर्व प्रधान मंत्री गिरजा प्रसाद कोईराला। मिर्जा इतना शक्तिशाली हो गया था कि प्रधान मंत्री भी उसके ऑख नहीं लगते थे, वह कहता था सौ गिरजा यानि सौ प्रधान मंत्री भी आ जाय तो मिर्जा का कुछ भी नही बिगाड़ सकते। नेपाल की राजनीति में पाकिस्तान की खुफिया ऐजेन्सी आईएसआई ने मिर्जा दिलसाद बेग को अपना प्रतिनिधि बनाकर नेपाल के अंदर भारत के खिलाफ रणनीति करने के लिये खड़ा कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जन्मे मिर्जा 14 वर्ष के उम्र में जीप बनाने का काम करने लगा था। पुनः किसी के कहने पर वह बंम्बई चला गया। वहां पर भी 6 वर्ष व्यतीत करने के बाद एक जमींदार से मुलाकात हुई। उस जमींदार ने अपने क्षेत्र ले जाने का निश्चय किया। वह क्षेत्र था कृष्णा नगर जो नेपाल के कपिलवस्तु जिले में स्थित है तथा उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थ नगर जिले का सीमा पड़ता है तथा बार्डर बढ़नी के समीप होने के कारण तस्करी ज्यादा होती है। जमींदार के घर भी ज्यादा दिन वह टिक न सका। केवल 2 महीने में उनका घर छोड़ छोटी-मोटी तस्करी करने लगा। उसकी महत्वकांक्षा उसको परेशान करती थी। पुनः वह अनवर नामक तस्कर के समीप आया। वही से उसकी जिंदगी छलांग लगा दी। वह विदेशी सामान, सोने, चरस का तस्करी करने लगा मिस्त्री होने के कारण गाड़ियों के पुर्जे को इधर से उधर करने लगा।
सन् 1990 में नेपाली पुलिस ने उसके घर से 11 किलो चरस बरामद किया था। उसके उपर जिला अदालत कपिलवस्तु से 5 हजार जुर्माना पर वह रिहा हुआ। प्रथम मुकदमा यहीं पर दर्ज हुआ। उसके बाद नेपाल के अंदर लगभग 48 मुकदमे उसके उपर दर्ज हुये और दिन दो गुना रात चौगुना उसकी स्थिति बढ़ती गयी। अब वह भारत से फरार बदमाश को अपने वहां संरक्षण देने लगा तथा भारतीय गाड़ियों को चुराकर नेपाल में बेचवाने लगा। इस तरह उसने नेपाल के कृष्ण नगर में 2 मंजिला घर तथा 10 एकड़ जमीन खरीद लिया। पुनः उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के उर्दू बाजार में एक व्यापारी के वहां डकैती डाल करोड़ों का गहना लूट लिया। वहीं पर उसको बिहार का खूंखार अपराधी मल्लू सिंह ने अपनी गिरोह में शामिल कर लिया तथा गामा सिंह को भी अपने गिरोह में शामिल कर लिया। पुनः मिर्जा अपने गुरु अनवर खॉं तथा शकुर कसाई की हत्या कराकर तस्करी के बाजार में अपने आप को खड़ा कर दिया। सन् 1993 में गोरखपुर के मेनका टाकीज में विस्फोट करवा सबको हैरत में डाल दिया। तथा अपने छुपने का अड्डा कृष्णा नगर को अपने गढ़ के रूप में मजबूत कर लिया। यही से उसकी दोस्ती दाउद इब्राहिम से हो गयी। और पुनः वह अपने जिंदगी में कभी पीछे नहीं देखा।
दाउद इब्राहिम के कहने पर वह आरडीएक्स तथा स्टनेगन का सप्लाई करने लगा। इसी बीच भारतीय नम्बर की गाड़ी एमएच 04 ए 3664 की मारूति वैन में 2 स्टेटगन सहित नेपालगंज के जमुनाहा चौकी में पकड़ा गया। 6 महीने जेल में बिताने के बाद पुनः अपराध जगत में आ गया। पुनः उसने 1995 में 24 मार्च एलडी अरोरा नामक भारतीय भंसार अधिकारी को इलाहाबाद के सर्कुलर रोड में उनके घर के आगे गोली मार हत्या कर दिया। जिला और सत्र न्यायालय कानपुर 1998 मार्च में जज डेजिग्नेटेड अन्डर टाडा ऐक्ट के अन्तर्गत नेशनल ब्यूरो आफ इनवेस्टिगेशन और नेशनल सेन्ट्रल ब्यूरो आफ इण्डिया (इन्टरपोल) नई दिल्ली ने नेपाल सरकार को पत्र लिख भारत सौपने का आग्रह किया था तथा उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 हजार का इनाम भी उसके उपर रखा था। 1995 में वह नेपाल के राजनीति में उतरा और वह जिला सभापति का चुनाव जीता। उसके बाद कृष्णा नगर से सांसद का चुनाव लड़ने लगा तथा वह जीतकर मुस्लिम समुदाय का नेतृत्व कर लोकेन्द्र बहादुर चन्द्र के सरकार में सहायक मंत्री बन गया। सूर्य बहादुर थापा के सरकार में वह राज्य मंत्री बन गया। पुनः वह नेपाल में विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य तथा आवास और भौतिक योजना मंत्री बना और पाकिस्तान की यात्रा करने लगा।
इसी बीच वह जाली नोट अपने गाड़ी में रख बिहार सीमा के रक्सौल में पाकिस्तानी राजदूत के साथ 3 करोड़ लेकर पहुंचा। पैसा भारत में पहुंचते ही पकड़ लिया गया। पकड़े गये व्यक्ति ने बताया कि स्वयं मिर्जा पैसे को लिये भारतीय क्षेत्र में बार्डर पार करवाया था। काफी अपराध करने के बाद वह परिवार सहित हज करने मक्का मदीना गया। वहीं से वह सुधरना चाहता था तथा कोई भी गैर कानूनी काम करना बंद कर दिया था। अब वह दाउद इब्राहिम तथा आईएसआई के ऑखों का किरकिरी हो गया था। आईएसआई की बात भी वह नकार देता था। आईएसआई ने उसे मौत के घाट सुलाने के लिये दाउद को लगाया। दाउद ने सन् 2002 में उसकी हत्या करा नेपाल में आईएसआई की कमान मजीद मनीहार को सौंप दी।
कौन है मजीद मनीहार? यह अगले अंक में.
नेपाल से लौट कर ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी की रिपोर्ट.





