परम आदरणीय, चेयरपर्सन हिंदुस्तान मीडिया वन्चर्स, नई दिल्ली। महोदया, आपके संज्ञान में यह लाना बेहद जरूरी है कि उत्तराखंड से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। नए सम्पादक गिरीश गुरूरानी के तानाशाह फैसलों के कारण अखबार की छवि लगातार धूमिल होती जा रही है। प्रदेश में अमर उजाला समाचार पत्र का विकल्प बने हिंदुस्तान हिंदी को लोगों ने हाथों हाथ ले लिया था। वर्तमान में संस्थान से उन सभी पुराने लोगों को, जो कि स्वर्गीय केके बिडला साहब के समय से अखबार से जुड़े हुए थे, उनको एक-एक कर हटाया जा रहा है।
देहरादून के इस संस्थान में कुछ लोगों का एक समूह अखबार के जरिये अपने निजी हित सध रहा है, जिसका विपरीत असर अखबार की नींव पर पड़ रहा है। न्यूज़ एडिटर पूरण बिष्ट द्वारा की गई एक गलती से समाचार पत्र की दस हज़ार प्रतियाँ वापस लेनी पड़ी थी। बिष्ट द्वारा खबर में इतनी लापरवाही बरती गयी थी कि पांच करोड़ के स्थान पर पांच सौ करोड़ छप गया था। खबर का मजमून यह था कि राज्य सरकार ने गैरसेन मैं एक दिन की कैबिनेट मीटिंग पर पांच सौ करोड़ रुपया खर्च कर दिया था। जबकि मूल में पांच करोड़ रुपया खर्च किया गया था।
इसके आलावा पूरण बिष्ट द्वारा अपने लिखे हुए एक समाचार में यह लिख दिया था कि टीएचडीसी भागीरथी को टिहरी डैम से छह इंच मोटे पाइप से छोड़ा जा रहा है, इस खबर के तुरंत बाद ही टीएचडीसी के अधिकारियों ने हिंदुस्तान का विज्ञापन बंद कर दिया था। बाद में तत्कालीन ब्यूरो चीफ़ अविकल थपलियाल द्वारा यह मामला सुलझाया गया था, लेकिन प्रबंधन ने पूरण बिष्ट के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की और उल्टा गुरूरानी के आने के बाद अविकल पर गैर जरूरी दबाव बनाकर हिंदुस्तान छोड़ने के लिए विवश कर दिया गया। इससे पहले भी कई ऐसे पत्रकार जो उत्तराखंड संस्करण की स्थापना से अखबार से जुड़े थे, पर नए संपादक ने कई तरह के दबाव डालने शुरू कर दिए, नतीजतन हिंदुस्तान में ही रहकर वर्षों अपना अमूल्य समय देने वाले पत्रकारों की जगह संपादक गुरूरानी ने अनुभवहीन चहेतों को अखबार में बड़ी जिमेदारियां सौंप दी, जिससे अखबार का स्टार तो गिर ही रहा है बरसों से जुड़े पत्रकार भी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।
अभी हाल में ही गुरूरानी ने चार साल की पत्रकारिता का अनुभव रखने वाले विमल पुरवाल, जो की तहसील स्तर से रिपोर्टिंग करते थे, को वरिष्ठ रिपोर्टर बना कर अपने प्रमोशन का इंतज़ार कर रहे रिपोर्टरों को निराश किया है। इस निराशा का असर समाचार पत्र की ख़बरों से साफ़ पता लगता है। अपने इस कृत्य को सही ठहराने के लिए गुरूरानी ने विभिन्न शहरों के रिपोर्टरों पर यह दबाव बनाया कि विमल पुरवाल के प्रमोशन लिए उन्हें बधाई पत्र भेजे जायें। इन पत्रों का प्रयोग गुरूरानी द्वारा हिंदुस्तान के आला अधिकारियों को भेजकर यह साबित करने की कोशिश की गयी कि विमल पुरवाल के समकक्ष कोई और नहीं ठहरता। इस बात से देहरादून में ही वर्षों से काम कर रहे भास्कर उप्रेती, उषा रावत, मनीष भट्ट, दिनेश जोशी सहित अनेकों ने जब सम्पादकीय बैठकों में जब विमल की ख़बरों पर उँगलियाँ उठाई तो सम्पादक अपनी पूरी टीम पर बुरी तरह बिफर गए और यहाँ तक कह दिया कि तुम मेरे आदमी को फेल करने पर तुले हो, जबकि विमल की पत्रकारिता का स्टार है, श्रीनगर का कोई भी बुद्धिजीवी पाठक बता सकता है। विमल के साथ काम करने वाला तेज़ तर्रार युवा मनमोहन सिन्ध्वाल की ख़बरों पर अपना नाम लिखकर भेज करता था।
इन्हीं सम्पादक महोदय के कारण रूड़की जैसे बड़े सेण्टर से सीमा श्रीवास्तव ने त्यागपत्र दे दिया था। रूडकी में गुरूरानी ने अपने हिमाचल के साथी अनिल डोभाल को बिठा दिया। जिन्होंने वहां के विधायक प्रदीप बत्रा को ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं पौड़ी जो की मंडल मुख्यालय भी है, में पिछले छबबीस वर्षों से तैनात अनिल बहुगुणा को भी पहले तो महीने भर तक प्रताड़ित किया गया और बाद में उन्हें अखबार में क्या रखा है, कहकर जाने का मौखिक इशारा कर दिया गया। इस पूरी कार्रवाई के पीछे कोई वजह भी नहीं बताई गई। ऐसे में वर्षों से संस्थान को बढ़ा रहे रिपोर्टर भी मायूस हैं। आप मामले की गम्भीता को देख हिंदुस्तान की छवि और पुराना मुकाम लौटाने में तत्काल कार्यवाही करेंगी ऐसी हम उम्मीद कर रहे हैं।
सादर
दिनेश चन्द्र
देहरादून






By Kumar
June 10, 2019 at 9:22 am
बिहार में हिंदुस्तान अखबार की स्थिति बहुत खराब 25 से 30 पर सेंट रद्दी अखबार में बेचा जा रहा है दैनिक भास्कर आने पर हिंदुस्तान पर ज्यादा असर हो रहा है