खुद को बहुत बड़ा प्रबंधन गुरु बताने वाले अरिंदम चौधरी की कलई खुल गई है. वह प्रबंधन गुरु नहीं बल्कि क्रूर प्रबंधक है, जो अपने यहां काम करने वालों का हक-हिस्सा मार लेता है. अरिंदम चौधरी ने जिस प्लानमैन मीडिया नामक बैनर तले द संडे इंडियन मैग्जीन का प्रकाशन किया, उसके दर्जन भर से ज्यादा कर्मचारियों ने अपने नाम, अपनी मेल आईडी और अपने मोबाइल नंबर के साथ एक संयुक्त पत्र लिखा है. यह पत्र जस्टिस काटजू के नाम है जो प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के चेयरमैन हैं.
अरिंदम चौधरी के हाथों सताए हुए इन मीडियाकर्मीयों ने जस्टिस काटजू को अपनी पीड़ा विस्तार से बताई है. कैसे उन लोगों को बिना वजह बर्खास्त कर दिया गया, उनका बकाया नहीं दिया जा रहा, बार-बार मांग करने के बावजूद सेलरी नहीं दी जा रही है, इस बारे में पत्र में गहराई से वर्णन किया गया है. इन कर्मियों ने अपने हक, अपने बकाया के लिए हर तरफ से प्रयास कर लिया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. अरिंदम चौधरी और उनके खास लोग अपने अपने कान में तेल डाल कर मस्त हैं. अरिंदम चौधरी और उनके खास चमचे, जिनमें प्लानमैन मीडिया में कार्यरत संपादक लोग भी शामिल हैं, खुद शाही जिंदगी जी रही हैं, लक्जरी कार से चल रहे हैं, लेकिन अपने यहां के कर्मियों को वेतन नहीं दे रहे हैं. थक-हार कर ये लोग अब काटजू से गुहार कर रहे हैं ताकि पैसे न होने से मुश्किल हालात से जूझ रहे प्लानमैन मीडिया के मीडियाकर्मियों का परिवार नष्ट होने से बचाया जा सके. पूरा पत्र ये है…

आप सभी मीडियाकर्मियों से अनुरोध है कि इस प्रकरण को और इस पत्र को हर तरफ शेयर करें, सबको फारवर्ड करें ताकि दुनिया को कथित मैनेजमेंट गुरु के फ्राड का पता चल सके. उल्लेखनीय है कि प्लानमैन मीडिया की मैग्जीन द संडे इंडियन में कार्यरत रहे वरिष्ठ व मशहूर फोटोग्राफर प्रमोद पुष्करणा ने अपना बकाया पाने के लिए निजी स्तर पर काफी पत्रचारा अरिंदम चौधरी और उनके लोगों से किया लेकिन उन्हें कहीं से कोई रिस्पांस नहीं मिला. तब उन्होंने अपने पत्रों व अपनी समस्या को फेसबुक पर प्रकाशित करना शुरू किया. प्रमोद पुष्करणा के पत्रों को भड़ास पर प्रमुखता से प्रकाशित किया गया. फिर भी अरिंदम चौधरी पर कोई असर नहीं पड़ा. अब अरिंदम चौधरी से पीड़ित सभी पत्रकारों ने एकजुट होकर अपने हक के लिए आवाज उठाई है और काटजू को पत्र भेजा है. भड़ास इन सभी पत्रकार साथियों के दुख और आंदोलन में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है. अगर पीड़ित मीडियाकर्मी अपने हक के लिए एकजुट नहीं होंगे तो ये नालायक प्रबंधन के लोग अपनी चालों और अपनी हरकतों से पत्रकारों व पत्रकारिता की गरिमा को तार-तार कर के रख देंगे.
-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया
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