Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

नकल के मोर्चे पर फेल व्‍यवस्‍था

मार्च के महीने को नकल का महीना कहा जाए तो कोई बुराई नहीं होगी, असल में मार्च महीने की शुरुआत देशभर में बोर्ड परीक्षाओं से होती है। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान देश के लगभग सभी राज्यों में नकल माफिया पूरी तरह एक्टिव मोड में आ जाते हैं। वो अलग बात है कि हिन्दी पट्टी की राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश में नकल की खबरें अधिक प्रकाश में आती हैं।

मार्च के महीने को नकल का महीना कहा जाए तो कोई बुराई नहीं होगी, असल में मार्च महीने की शुरुआत देशभर में बोर्ड परीक्षाओं से होती है। दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान देश के लगभग सभी राज्यों में नकल माफिया पूरी तरह एक्टिव मोड में आ जाते हैं। वो अलग बात है कि हिन्दी पट्टी की राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश में नकल की खबरें अधिक प्रकाश में आती हैं।

बिहार और उत्तर प्रदेश के नकल माफिया तो देशभर में कुख्यात हैं। मार्च के पहले हफ्ते में शुरू हुई दसवीं व बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में अब तक हजारों छात्र अनफेयर मीन्स केस (यूएमसी)  में बुक हो चुके हैं बावजूद इसके नकलबाजों और नकल माफियाओं के हौसले पस्त होने की हद दर्जे तक बढ़े हुए हैं।

यूपी, बिहार में तो नकल माफिया छात्रों को परीक्षा पास कराने के लिए लाखों का ठेका लेते हैं और मार्च के महीने में प्रदेश में नकल की मंडी सज जाती है। सरकार नकल माफियाओं पर नकेल कसने के लाख दावे और प्रपंच करती है और परीक्षा शुरू होते ही व्यवस्था थोथी, खुली नकल की पोथी की पुरानी स्क्रिप्ट दोहराई जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी स्कूलों में छात्रों को पूरी पढ़ाई नहीं कराई जाती है कि वो अपने बलबूते परीक्षा दे पायें। क्या पाठयक्रम छात्रों के मानसिक स्तर से ऊपर है। क्या स्कूलों में योग्य शिक्षकों की कमी है। क्या छात्र नकल के बिना परीक्षा पास होने के काबिल नहीं है। नकल छात्रों की मजबूरी है या फिर वो खुद इस कृत्य में शामिल हैं। क्या वर्तमान शिक्षा का ढांचा और प्रणाली छात्रों को नकल के लिए प्रेरित करती है। क्या नकल अधिक अंक पाने का शार्ट कट है। क्या व्यवस्थागत दोष नकल माफियाओं को आक्सीजन प्रदान करती है। क्या शिक्षा माफिया, सफेदपोश नेता और सरकारी मशीनरी की तिगड़ी मोटी कमाई के चक्कर में व्यवस्था को पंगु बनाये हैं। ये वो तमाम सवाल हैं जिन पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है।

यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन अलीगढ़ जनपद में गोंडा क्षेत्र के मुरवार स्थित आदर्श विद्या निकेतन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पर नकल के लिए जमकर फायरिंग हुई। इसमें स्थानीय निवासी एक एनएसजी कमांडो की मौत हो गई। यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा से लगातार ऐसी खबरें मिल रही हैं कि प्रतिदिन छापों के दौरान सैंकड़ों छात्रों को अनुचित साधनों के प्रयोग और परीक्षा की पवित्रता भंग करने के अपराध में परीक्षा से निष्कासित किया जा रहा है। नकल माफियाओं की पकड़ ऊपर और शिक्षा महकमे में अंदर तक है। जैसे ही किसी परीक्षा केंद्र में छापा दस्ता अपने कदम बढ़ाता है, उसकी सूचना परीक्षा केंद्र तक पहुंच जाती है। मौके पर नकल सामग्री के ढेर के अलावा इक्का-दुक्का छात्र ही पकड़ में आते हैं। छापा दस्ते की गाड़ी वापस लौटते ही खुला खेल फर्रूखाबादी शुरू हो जाता है।

ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में बने परीक्षा केंद्रों में अधिकतर कक्ष निरीक्षक ही छात्रों को नकल सामग्री उपलब्ध करवाने से लेकर चेकिंग दस्ते के आने पर नकल सामग्री को जेब में रखने से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम करते हैं। छात्र बेखौफ किताब, गाइड और हल किये प्रश्र पत्र रखकर कापी भरते हैं। कदाचार के सहारे परीक्षा पास करने का संकल्प लेकर आए छात्र कोई भी रिस्क उठाने के लिए तैयार हैं। हर साल की भांति इस साल भी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए राज्य सरकारों द्वारा नकल माफिया के सामने फेल साबित हो रहे हैं। माफिया छात्रों को डरा धमका कर खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं। पैसे न देने पर छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है। ऐसा ही एक मामला अलीगढ़ जिले की अतरौली तहसील के एक परीक्षा केंद्र पर दूसरी पाली की परीक्षा में छात्रों के साथ राइफल के दम पर वसूली की गई। इस दौरान कुछ छात्रों को सात हजार रुपये न देने पर हॉकियों से बुरी तरह से पीटा गया।

नकल माफियाओं के साथ अभिभावक भी कम नहीं हैं। बिहार के हाजीपुर जिले में चल रहे मैट्रिक परीक्षा के दौरान कदाचार करते पकड़े गए 28 परीक्षार्थियों को परीक्षा से निष्कासित कर दिया गया वहीं नकल में सहयोग करते 31 अभिभावक पकड़े गए। परीक्षा निरीक्षकों के साथ सुरक्षा डयूटी में तैनात होमगार्डस और पुलिस के जवान भी नकल के खेल में शामिल हैं। महुआ में गत शनिवार को कदाचार कराने के आरोप में प्रशासन ने 30 अभिभावक को गिरफ्तार किया गया।

नकल माफियाओं की पकड़ इतनी मजबूत है कि हर साल वो ब्लैक लिस्टेड परीक्षा केंद्रों को सूची मेें शामिल करवाने में कामयाब हो जाते हैं। जिलों में मनचाहे कॉलेजों को बोर्ड परीक्षा का केंद्र  बना कर उगाही की जमीन तैयार की जाती है। अव्वल तो यह है कि दर्जनों परीक्षा केंद्र ऐसे है जिसमें परीक्षार्थियों के बैठने की जगह तक नहीं है। परीक्षा के समय ही यह कालेज खुलते हैं जबकि बाकी समय कॉलेजों को भैंसों का तबेला बना दिया जाता है। जनवरी-फरवरी से ही शिक्षा माफिया परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं। प्रैक्टिकल के नाम पर वसूली कर चुके शिक्षा माफिया अब परीक्षा में भी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। यूपी और बिहार में तो अधिकतर स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं था। शिक्षा माफिया किराए के फर्नीचर का जुगाड़ करके काम चला रहे हैं।

असल में बाहरी जिलों से परीक्षा पास कराने के नाम पर आठ से दस हजार रुपये तक का ठेका लेकर परीक्षा फार्म भरे जाते हैं। छात्रों को माफिया पहले ही आश्वस्त कर देते हैं कि उनका सेंटर नकल वाले स्कूल में ही जाएगा। उत्तर प्रदेश में कई शिक्षा माफियाओं पर रासुका भी लग चुका है। मगर उन पर कोई असर नहीं है। नकल के लिए बदनाम इन सभी विद्यालयों को हर साल की तरह इस साल भी परीक्षा केंद्र बनाया गया है। बोर्ड परीक्षा में पास होने के लिए अनपढ़ों के लिए सुनहरा अवसर है। कापी लिखने के लिए पांच सौ से एक हजार रुपये प्रति विषय के वसूल किए जाते हैं। बिना पढ़े ही उन्हें डिग्री हासिल हो जाती है। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई बदनाम जिलों में बाहरी जिलों से हर साल लाखों विद्यार्थी पहुंचते हैं।  इन छात्रों से पास कराने के नाम पर हजारों रुपये लिए जाते हैं।

सरकार के पास बहानों की कमी नहीं है। असल में मोटी कमाई के फेर में शिक्षा विभाग और सरकारी मशीनरी सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद किये रहती है। सरकारी स्कूलों में शिक्षक  अक्सर डयूटी से गायब रहते हैं वहीं नियमित प्रशिक्षण के अभाव में वो पूरा पाठयक्रम पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में छात्र परीक्षा पास करने के लिए टयूशन, जुगाड़ या फिर नकल माफियाओं की ओर अग्रसर होता है। इसमें पढ़ाई के प्रति संजीदा और काबिल छात्रों को बड़ा नुकसान होता है। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद सरकारी स्कूलों में हालत बद से बदत्तर होती जा रही है। यूं तो सरकारी स्कूलों में खामियां काफी हैं लेकिन अब सवाल बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा पर उठाया जा रहा है। बिहार में जिला शिक्षक शिक्षा संस्थान भागलपुर जिले में 49 प्रशिक्षुओं से जिले के 10 शहरी व 40 ग्रामीण विद्यालयों के 150 शिक्षकों के बीच सर्वे कराया है और यह सर्वे टीम ने खुद घंटों शिक्षकों और बच्चों की गतिविधियों को देखकर किया है। सर्वे में यह रिपोर्ट सबके सामने आयी कि जिले में चार तरह के शिक्षक हैं। इसमें 50 फीसदी शिक्षक ऐसे हैं जो सिलेबस पूरा करने के लिए अनमने ढंग से पढ़ा देते हैं, 20 फीसदी शिक्षक ऐसे हैं जो पढ़ाते व समझाते भी हैं, ऐसे शिक्षकों की संख्या भी 20 प्रतिशत है, जो पढ़ाते हैं, समझाते हैं। लेकिन ऐसे शिक्षकों की संख्या महज 10 फीसदी है, जो पढ़ाते हैं, समझाते हैं, परिवेशीय उदाहरण देकर समझ विकसित भी करते है।

यूपी, बिहार में शिक्षा व्यवस्था की खस्ता हालत किसी से छिपी नहीं है, लेकिन शिक्षा के मामले में देश का विकसित राज्य पंजाब और हरियाणा भी पिछड़ेपन का शिकार है।  जहां तक पंजाब के सरकारी स्कूलों का संबंध है, इनका बुरा हाल है जिसके कारण राज्य में शिक्षा का भट्टा बैठा हुआ है। अनेक स्कूलों की इमारतें जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। अनेक स्कूलों में प्रयोगशाला उपकरण, कम्प्यूटर आदि लम्बे समय से खराब पड़े हैं। स्कूलों में अध्यापकों व अन्य स्टाफ की भारी कमी है। पंजाब की एजुकेशन वैल्फेयर कमेटी (ई.डब्ल्यू.सी.) के अनुसार राज्य के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की 16,766 पद खाली थे। पंजाब के सरकारी स्कूलों के अध्यापकों में बढ़ रही अनुशासनहीनता, श्बंक्य मारने तथा लेट पहुंचने की शिकायतें भी मिलती रहती हैं। कुछ सरकारी स्कूलों में तो अध्यापकों ने स्वयं न जाकर अपने स्थान पर बच्चों को पढ़ाने के लिए श्प्रॉक्सी टीचर्य तक रखे हुए हैं। बड़ी संख्या में पंजाब के सरकारी स्कूलों के अध्यापक लम्बी छुट्टी लेकर वर्षों से विदेशों में बैठे हैं। वे छुट्टी की अवधि समाप्त होने के बाद भी ड्यूटी पर नहीं लौटे और न ही इतने वर्ष बीतने पर उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई। अब पंजाब सरकार की नींद खुली है और गैर-हाजिर अध्यापक-अध्यापिकाओं व अन्य स्टाफ के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई है। इसके अंतर्गत अब पंजाब शिक्षा विभाग ने कई वर्षों से गैर-हाजिर अध्यापकों व अन्य कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला भी लिया है। अब तक 450 कर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं जबकि अन्य 700 कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने बारे कार्रवाई अब की जा रही है। शारीरिक व मानसिक रूप से पढ़ाने के अयोग्य व अनफिट् 40 अध्यापकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा रही है। कमोबेश ऐसी स्थिति हर राज्य में सरकारी स्कूलों में देखी जा सकती है।

शहर के मुकाबले यदि हम गांव की बात करें तो वहां शिक्षा का स्तर और भी नीचे है। हाईस्कूलों में पढ़ाई नाममात्र को होती है। योग्य शिक्षकों का भी भारी अकाल है। जब तक शिक्षा विभाग में व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए कठोर पग नहीं उठाए जाएंगे, तब तक राज्यों में शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं हो सकता। वर्तमान परिदृश्य में सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार्य लागू करने के दावे को बुरी तरह झुठला रहा है और यहां शिक्षा प्रणाली की अत्यंत निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहा है। जब छात्र स्कूल में पढ़ेंगे ही नहीं तो वो परीक्षा हाल में दिमाग की बजाय नकल का सहारा ही तो खोजेंगे। अगर सरकार नकल रहित परीक्षाएं करवाना चाहती है तो उसे कार्य संस्कृति में बदलाव करना होगा वरना हर साल देश में बढ़ती फौज नक्कालों की फौज का रोक पाना संभव नहीं होगा।

लेखक डा. आशीष वशिष्‍ठ स्‍वतंत्र पत्रकार हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...