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गिरफ्तारी की याचिका से बौखलाए सुब्रत रॉय ने सेबी को खुली बहस की चुनौती दी

सेबी और सहारा के बीच कानूनी जंग अब अखबरों के जरिए भी लड़ी जा रही है। सेबी ने सहारा ग्रुप के चीफ सुब्रत रॉय की गिरफ्तारी की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दी तो सहारा ने सहारा मीडिया के जरिए सेबी के इस कदम को चुनौती दी है। सहारा इस लड़ाई को सड़क पर भी लड़ने की तैयारी कर रहा है। लेकिन जानकार मानते हैं कि सहारा की इस अखबारबाजी का कोई असर नहीं होगा बल्कि उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

सेबी और सहारा के बीच कानूनी जंग अब अखबरों के जरिए भी लड़ी जा रही है। सेबी ने सहारा ग्रुप के चीफ सुब्रत रॉय की गिरफ्तारी की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दी तो सहारा ने सहारा मीडिया के जरिए सेबी के इस कदम को चुनौती दी है। सहारा इस लड़ाई को सड़क पर भी लड़ने की तैयारी कर रहा है। लेकिन जानकार मानते हैं कि सहारा की इस अखबारबाजी का कोई असर नहीं होगा बल्कि उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

मुश्किल में सहारा भी फंसी है लेकिन अब वो अपना बचाव करने के बजाए रेगुलेटर पर ही तरह तरह के आरोप लगा रही है। सेबी पर हमला करने के लिए सहारा को सबसे धारदार हथियार है अखबारों में विज्ञापन। अब इससे सहारा क्या हासिल कर पाएगा ये देखना होगा।

बस बहुत हो गया ये विज्ञापन है और इसे सहारा ने छपवाया है। इसमें सेबी को खुली चुनौती दी गई है। सहारा ग्रुप के प्रमुख सुब्रत रॉय सहारा और उनके दो डायरेक्टरों की गिरफ्तारी की सेबी ने जब से अर्जी सुप्रीम कोर्ट में लगाई है, सहारा ने अखबारी जंग छेड़ दी है। सहारा का कहना है कि उसने निवेशकों को पूरा पैसा वापस कर दिया है और जो बचा है वो सेबी के पास जमा कर दिया है। सहारा का आरोप है कि सेबी उसे जानबूझकर परेशान कर रहा है। विज्ञापन में सुब्रत रॉय सहारा ने सेबी चीफ को टीवी चैनल पर खुली बहस की चुनौती दी है। लेकिन कानून के जानकार मानते हैं कि कानूनी मामले इस तरह अखबार के विज्ञापनों से नहीं लड़े जा सकते। सेबी ने जो भी मामला उठाया है उसे सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना है। और अब ऐसे स्टंट से सहारा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

सहारा की दो कंपनियों सहारा रियल एस्टेट और सहारा हाउसिंग के बैंक खाते पहले ही सील हो चुके हैं। सहारा ने बैंक खाते डीफ्रीज कराने के लिए लखनऊ हाईकोर्ट में अर्जी दे रखी है। लेकिन इस बार सेबी भी झुकने को तैयार नहीं है। सेबी के सामने भी निवेशकों के 24,000 करोड़ रुपये वापस दिलाने की चुनौती है। और ये जिम्मेदारी उसे सुप्रीम कोर्ट ने सौंपी है। गिरफ्तारी मामले में अप्रैल में सुनवाई होनी है। जानकारों को मानना है कि कानूनी लड़ाई हारने के बाद अब सहारा अपनी साख बचाने में लगा है। अखबारों के जरिए लागों की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश हो रही है। बारबार सहारा ग्रुप के 10 लाख कर्मचारियों और करोड़ों निवेशकों की दुहाई दी जाती है। पर इस सब से क्या कोई फर्क पड़ेगा।

इस मामले में सबसे दिलचस्प ये है कि 2 करोड़ से ज्यादा निवेशकों को 24,000 करोड़ रुपये वापस मिलने हैं लेकिन सहारा के दफ्तरों के सामने ना कोई भीड़ है और ना ही निवेशकों में कोई गुस्सा। सूत्र बताते हैं सेबी इन्हीं उदार निवेशकों के बारे में जानने को बेचैन है। दूसरी तरफ सहारा इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रहा है कि आखिर वो निवेशक कहां हैं जिन्हें पैसे वापस चाहिए। लड़ाई दिलचस्प है और इसे नतीजे का इंतजार है। (एमसी)

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