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विधायकों की गुंडागर्दी (चार) : क्षितीज से इलाके के पत्रकार भी डरते हैं, राम कदम का जन्म सिर्फ कानून तोड़ने के लिए ही हुआ

मंगलवार को महाराष्ट्र विधान सभा के अंदर विधायकों का एक गुट इंसानियत को भूलकर पुलिस अधिकारी सचिन सूर्यवंशी पर जानवरों की तरह टूट पड़ा.. सूर्यवंशी को इन्होंने तब तक मारा जब तक वो घायल होकर ज़मीन पर नहीं गिए गए.. सूर्यवंशी को पुलिस की ड्यूटी ईमानदारी ने निभाने की सजा दी गई.. वैसे देश में हालात बहुते बुरे हैं.. चंद पुलिसवाले ही हैं जो ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाते हैं तो कई बार अपनी मर्जी से तो कई बार सफेदपोशों के कहने पर अपना ईमान बेच देते हैं.. लेकिन सूर्यवंशी पुलिस फोर्स के लिए एक मिसाल बन चुके हैं.

मंगलवार को महाराष्ट्र विधान सभा के अंदर विधायकों का एक गुट इंसानियत को भूलकर पुलिस अधिकारी सचिन सूर्यवंशी पर जानवरों की तरह टूट पड़ा.. सूर्यवंशी को इन्होंने तब तक मारा जब तक वो घायल होकर ज़मीन पर नहीं गिए गए.. सूर्यवंशी को पुलिस की ड्यूटी ईमानदारी ने निभाने की सजा दी गई.. वैसे देश में हालात बहुते बुरे हैं.. चंद पुलिसवाले ही हैं जो ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाते हैं तो कई बार अपनी मर्जी से तो कई बार सफेदपोशों के कहने पर अपना ईमान बेच देते हैं.. लेकिन सूर्यवंशी पुलिस फोर्स के लिए एक मिसाल बन चुके हैं.

इन्होंने जब वसई विरार के कुख्यात ठाकुर घराने के युवा विधायक क्षितीज ठाकुर से मुंबई के बांद्रा वर्ली सी लिंक पर तेज़ रफ्तार गाड़ी चलाने के लिए चालान काटा तो क्षितीज ठाकुर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया.. क्षितीज ठाकुर ने सूर्यवंशी को ना सिर्फ जमकर लताड़ा बल्कि गालियां तक दी.. यही नहीं क्षितीज ठाकुर ने हद में भी रहने की धमकी दी. लेकिन पुलिस अधिकारी सचिन की हिम्मत को वो डिगा नहीं सके.. पुलिस अधिकारी उनसे बार बार कानून का पालन करने की गुजारिश कर रहा था.

घायल सब इंस्‍पेक्‍टर सचिन सूर्यवंशी

खैर किसी तरह कानूनी औपचारिकता के बाद क्षितीज ठाकुर मौके से रवाना हुए लेकिन उनके मन में बस यही चल रहा था कि वो किसी भी हाल में सचिन को नहीं छोड़ेंगे.. वो नापाक घड़ी आ भी गई जब सचिन को राज्य के गृहमंत्री आरआर पाटील ने विधानसभा में बात करने के लिए बुलाया.. सचिन तय वक्त के मुताबिक विधान सभा पहुंचे भी लेकिन उन्हें भला क्या मालूम था कि जिन लोगों की रक्षा उनकी बिरादरी के लोग करते हैं वही लोग उनकी जान लेने पर आमादा हो जाएंगे… मौका मिलते ही विधायक क्षितीज ठाकुर के साथ राम कदम और उनके साथी विधायक सचिन पर मौत की तरह टूट पड़े.. वो तो भला हो वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों का जिन्होंने सचिन को विधायकों की बेरहमी से छुड़ाया.. सचिन पर

क्षितीज ठाकुर

हमला करने के आरोप में अब तक पांच विधायकों क्षितीज ठाकुर, राम कदम, प्रदीप जायसवाल, राजन साल्वी, जय कुमार रावल को 31 दिसबंर तक के लिए विधानसभा से निलबिंत किया जा चुका है.. और हर तरफ इनकी निंदा हो रही है.

सचिन सूर्यवंशी से मारपीट में खासकर जिन दो विधायकों ने ज्यादा सुर्खियां बटोरी उनमें क्षितीज ठाकुर के साथ राम कदम का नाम शामिल है.. पहले बात क्षितीज ठाकुर की जो ठाणे के जिस वसई नालासोपारा से विधायक हैं, वहां इनके पिता और चाचा की तूती बोलती है..वैसे तो क्षितीज के खिलाफ इससे पहले कोई अपराधिक मामला दर्ज़ नहीं था लेकिन इनके पिता हितेंद्र ठाकुर और चाचा भाई ठाकुर के खिलाफ कई तरह के अपराधिक मामले दर्ज़ हैं.. इलाके के किसी भी बिल्डर की औकात नहीं जो इनके इशारे के बिना निर्माण कार्य कर सके.. भाई ठाकुर तो नालासोपारा के बिल्डर संतोष दुबे की हत्या के

राम कदम

आरोप में जेल में भी बंद चंल रहे हैं.. यानि दंबगई क्षितीज ठाकुर को उनके अपनों से मिली है.. कई बार देखा गया है कि इलाके के पत्रकार भी इनसे पंगा नहीं लेते.

क्षितीज के अलावा जिस राम कदम का नाम सचिन की पिटाई में आ रहा है लगता है उनका जन्म सिर्फ कानून तोड़ने के लिए ही हुआ..राम कदम राज ठाकरे की पार्टी से घाटकोपर के विधायक हैं लेकिन ये खुद को इस तरह पेश करते हैं जैसे पुरी मुंबई में इनकी सत्ता चलती है.. ये पहली बार तब चर्चा में आए जब उन्होंने विधानसभा में हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी को थप्पड़ रसीद कर दिया.. राम कदम के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं.. वैसे तो ये अकसर भक्ति में लीन भजन गाते दिख जाते हैं, लेकिन कब ये किसी की अकारण पिटाई कर दें ये खुद भी नहीं जानते.. वैसे एक बार फिर ये मुश्किल में हैं खुद राज ठाकरे भी इनकी आदतों की वजह से खफा चल रहे हैं.. अब देखने वाली बात ये होती है कि विधानसभा से निलंबित होने के बाद इनकी आदत में सुधार होता है या फिर ये इसी तरह कारमाना करते रहेंगे.

लेखक अश्विनी शर्मा मुं‍बई के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

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